by-Ravindra Sikarwar
पटना: बिहार की सियासी गलियारों में एक नया विवाद छिड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संरक्षक लालू प्रसाद यादव द्वारा अपने पोते-पोतियों के साथ हेलोवीन का उत्सव मनाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन्हें निशाना बनाया है। बीजेपी ने लालू पर पाखंड का आरोप लगाते हुए उनकी पुरानी टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले को ‘फालतू’ (बेकार) करार दिया था। यह हमला बिहार विधानसभा चुनावों के ठीक पहले आया है, जहां पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है। बीजेपी का कहना है कि लालू जैसे नेता स्वदेशी धार्मिक आयोजनों की उपेक्षा करते हैं, लेकिन पश्चिमी संस्कृति के त्योहारों को गले लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इस विवाद ने न केवल राजनीतिक बहस को गर्मा दिया है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेलोवीन का जश्न: पोतियों के साथ लालू का परिवारिक पल
शनिवार, 1 नवंबर 2025 को लालू यादव की बेटी और आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें लालू अपने पोते-पोतियों के साथ हेलोवीन मना रहे दिखे। वीडियो में लालू प्रसाद यादव मुस्कुराते हुए बच्चों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जो भूत-प्रेत और कद्दू की थीम वाले कॉस्ट्यूम में सजे हुए हैं। रोहिणी ने कैप्शन में लिखा, “हर किसी को हेलोवीन की शुभकामनाएं।” यह वीडियो परिवार के निजी क्षण को दर्शाता था, जहां लालू बच्चों के साथ मस्ती करते नजर आ रहे हैं। हेलोवीन, जो मूल रूप से प्राचीन सेल्टिक परंपराओं से जुड़ा पश्चिमी त्योहार है, भारत में युवाओं और शहरी परिवारों में लोकप्रिय हो रहा है। इसमें कस्टम ड्रेसिंग, ट्रिक-ऑर-ट्रीटिंग और डरावनी सजावट का चलन है।
रोहिणी आचार्य ने इस पोस्ट को सकारात्मक तरीके से साझा किया, जो परिवारिक बंधनों को मजबूत करने का प्रतीक था। लेकिन यह वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक तीरों का निशाना बन गया। लालू, जो लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे खुशी के पलों में सक्रिय दिखे, जिसने उनके समर्थकों को प्रसन्न किया, लेकिन विपक्ष को हमले का मौका दे दिया।
फालतू टिप्पणी का पुराना विवाद: महाकुंभ पर लालू का बयान
बीजेपी का हमला लालू की फरवरी 2025 की उस विवादास्पद टिप्पणी पर केंद्रित है, जब प्रयागराज में महाकुंभ मेला अपने चरम पर था। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुंभ के लिए ट्रेनों में चढ़ने की होड़ में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू ने कहा था, “कुंभ का क्या मतलब है? फालतू है कुंभ।” उन्होंने भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए इसे व्यर्थ बताया। यह बयान तुरंत राजनीतिक तूफान ला दिया। बीजेपी और हिंदू धार्मिक संगठनों ने इसे आस्था पर हमला माना। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता मनोज शर्मा ने तब कहा था, “लालू का यह बयान आरजेडी की हिंदू-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। वे तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।”
महाकुंभ, जो हर 12 वर्ष में प्रयागराज में आयोजित होने वाला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इसमें गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व है। लालू की टिप्पणी ने न केवल राजनीतिक दलों को बांटा, बल्कि धार्मिक नेताओं ने भी निंदा की। आरजेडी ने इसे संदर्भ से हटकर बताया, लेकिन विवाद थमा नहीं। अब हेलोवीन वीडियो ने इस पुरानी चिंगारी को फिर भड़का दिया है।
बीजेपी का तीखा प्रहार: सांस्कृतिक पाखंड का आरोप
बीजेपी किसान मोर्चा (बीजेपीकेएम) ने एक्स पर एक स्प्लिट वीडियो शेयर किया, जिसमें एक तरफ लालू का कुंभ वाला बयान और दूसरी तरफ हेलोवीन जश्न दिखाया गया। पोस्ट में लिखा, “भूलना मत, बिहार के लोग। यही वही लालू यादव हैं, जिन्होंने आस्था और अध्यात्म का महान कुंभ फालतू कहा था और अब ब्रिटिश त्योहार हेलोवीन मना रहे हैं। जो आस्था पर प्रहार करे, बिहार की जनता उसे वोट नहीं देगी।” यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों रीट्वीट्स मिले।
बीजेपी प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा, “लालू जी कुंभ को फालतू बताते हैं, जो हिंदू संस्कृति का प्रतीक है, लेकिन हेलोवीन – जो पश्चिमी और ब्रिटिश परंपरा है – को अपनाने में कोई हिचक नहीं। यह उनकी दोहरी चाल को दर्शाता है। बिहार की जनता यह भूलने वाली नहीं।” बीजेपी का यह हमला बिहार चुनावों के संदर्भ में है, जहां एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच कड़ा मुकाबला है। चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। बीजेपी इसे हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने का हथियार बना रही है।
राजनीतिक संदर्भ: बिहार चुनावों से पहले तनाव
यह विवाद बिहार विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की रणनीति का हिस्सा लगता है। राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे हमेशा वोटरों को प्रभावित करते हैं। लालू यादव, जो लंबे समय से जेल और स्वास्थ्य मुद्दों से जूझ चुके हैं, अब भी आरजेडी के प्रमुख चेहरे हैं। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार में जुटी हैं। विपक्षी दलों ने बीजेपी के हमले को सस्ता बताया। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “लालू जी का हेलोवीन जश्न परिवारिक है, जबकि कुंभ पर उनका बयान भीड़ प्रबंधन की कमी पर था। बीजेपी सियासी लाभ के लिए आस्था का दुरुपयोग कर रही है।”
पिछले चुनावों में भी धार्मिक मुद्दे प्रमुख रहे हैं, जैसे राम मंदिर और कुंभ। बीजेपी का दावा है कि लालू की टिप्पणियां हिंदू मतदाताओं को नाराज करती हैं। सोशल मीडिया पर #KumbhFaltu और #LaluHalloween जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां समर्थक और आलोचक बहस कर रहे हैं।
सामाजिक प्रतिक्रियाएं: सांस्कृतिक बहस का दौर
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ यूजर्स ने लालू की हेलोवीन तस्वीरों को प्यारा बताया, जबकि अन्य ने इसे सांस्कृतिक पतन का प्रतीक कहा। एक यूजर ने लिखा, “कुंभ को फालतू कहने वाले हेलोवीन मना रहे हैं? बिहार की संस्कृति का क्या?” वहीं, लालू समर्थक बोले, “परिवारिक खुशी में राजनीति क्यों घुसेड़ रहे हो?” धार्मिक संगठनों ने भी पुरानी टिप्पणी पर फिर नाराजगी जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा देगा। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के दौर में ऐसे मुद्दे वोटरों को प्रभावित करते हैं। लालू की सेहत को देखते हुए आरजेडी तेजस्वी यादव पर निर्भर है, लेकिन लालू का नाम अभी भी प्रभावशाली है।
यह विवाद बिहार की सियासत को नया मोड़ दे रहा है। बीजेपी का हमला आस्था की रक्षा का दावा करता है, जबकि आरजेडी इसे निजी मामला बताती है। चुनावी रणनीति में सांस्कृतिक मुद्दे कितने असरदार साबित होंगे, यह 14 नवंबर के नतीजों से पता चलेगा। फिलहाल, लालू का हेलोवीन जश्न एक राजनीतिक हथियार बन चुका है।
