Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसी आपराधिक चाल का खुलासा हुआ है, जो यात्रियों को हताश और असहाय छोड़ देती है। एक छह सदस्यीय महिलाओं का गिरोह ट्रेनों, बसों और ऑटो रिक्शाओं में सफर करने वाली सहयात्रियों को निशाना बना रहा था। इनका हथियार था ‘उल्टी का नाटक’ – एक ऐसी तरकीब जिसमें वे नकली उल्टी का ड्रामा रचकर घबराहट पैदा करतीं और इसी फुर्सत में सोने के आभूषण चुरा लेतीं। यह गिरोह पिछले कई महीनों से सक्रिय था, और अब तक दर्जनों महिलाओं को शिकार बना चुका था। लखनऊ पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को इस गिरोह को धर दबोचा, जिससे शहर की महिलाओं में राहत की सांस चली। यह घटना न केवल सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा की पोल खोल रही है, बल्कि अपराधियों की सनसनीखेज रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी चालें यात्रियों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं, और इसके लिए जागरूकता अभियान जरूरी हैं।

गिरोह का तरीका: उल्टी के बहाने चोरी की कला
यह गिरोह पूरी तरह संगठित था, जिसमें छह महिलाएं शामिल थीं – उम्र 25 से 40 वर्ष के बीच। ये महिलाएं मुख्य रूप से महिलाओं से भरी ट्रेनों के जनरल कोच, लोकल बसों या ऑटो रिक्शाओं को अपना शिकार बनाती थीं। उनका modus operandi बेहद चालाकी भरा था, जो यात्रियों की सहानुभूति और घृणा का फायदा उठाता था। पुलिस के अनुसार, गिरोह की एक सदस्य सफर के दौरान निशाने वाली महिला से बातचीत शुरू कर देती, ताकि उसका ध्यान भटके। इसी बीच, दूसरी महिला अचानक बीमार होने का नाटक करती – वह दुपट्टे या प्लास्टिक बैग में नकली उल्टी (जो पहले से तैयार रखी जाती थी) उछालने लगती। यह दृश्य इतना घिनौना होता कि सहयात्रियों का ध्यान तुरंत उस ओर चला जाता। कुछ लोग मदद के लिए आगे बढ़ते, तो कुछ घृणा से मुंह फेर लेते। इसी अफरा-तफरी में तीसरी सदस्य चुपके से पीड़िता के गले की चेन, मंगलसूत्र या कंगन उतार लेती, और उसे तुरंत गिरोह की किसी अन्य सदस्य को सौंप देती, जो इसे छिपा लेती।

गिरोह का अगला कदम होता अगले स्टॉप पर उतरना। उल्टी करने वाली महिला शर्मिंदगी और बीमारी का बहाना बनाकर जल्दी से उतर जाती, और बाकी सदस्य भी बिखर जातीं। पीड़िता को चोरी का अहसास तब होता, जब वे काफी दूर चली जातीं। नकली उल्टी के लिए वे बाजार से सस्ती सामग्री जैसे खराब दही, पानी और रंगीन तरल पदार्थों का मिश्रण इस्तेमाल करतीं, जो बदबूदार और उल्टी जैसा दिखता था। पुलिस ने बताया कि यह चाल इतनी प्रभावी थी कि यात्रियों को शक ही नहीं होता। गिरोह की सरगना, एक 35 वर्षीय महिला, ने पूछताछ में कबूल किया कि उन्होंने इस तरकीब को ऑनलाइन वीडियो से सीखा था, और इसे ‘डिस्ट्रैक्शन थेफ्ट’ का नाम दिया था।

गिरोह का इतिहास: कई शहरों में सक्रिय, पहला वारदात अक्टूबर में
यह गिरोह लखनऊ के अलावा कानपुर, झांसी और प्रयागराज जैसे आसपास के शहरों में भी सक्रिय था। पुलिस के पास दर्ज शिकायतों के आधार पर अनुमान है कि इन्होंने कम से कम 20 से अधिक चोरियां कीं, जिनमें सोने के आभूषणों की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। पहला ज्ञात वारदात 27 अक्टूबर 2025 को हुई, जब विभा विहार खंड निवासी किरण नाम की एक महिला ऑटो से पत्रकारपुरम जा रही थी। गिरोह ने उसी ऑटो में सवार होकर चाल चली, और किरण के गले से मंगलसूत्र चुरा लिया। किरण ने बाद में थाने में शिकायत दर्ज की, लेकिन बिना सबूत के मामला ठंडा पड़ गया। इसी तरह, एक अन्य पीड़िता, एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका, ने बताया कि ट्रेन में उल्टी के ड्रामे के बाद उन्हें लगा कि सहयात्रियों ने मदद की, लेकिन जब वे घर पहुंचीं तो चेन गायब थी।

गिरोह की सदस्यें ज्यादातर गरीबी से जूझ रही विधवाएं या बेरोजगार महिलाएं थीं, जो एक-दूसरे के संपर्क में आईं। सरगना ने कहा कि वे महंगी जिंदगी की मजबूरी में यह रास्ता अपनाया, लेकिन अब पछता रही हैं। पुलिस ने उनके ठिकानों से चुराए गए आभूषण, नकली उल्टी की सामग्री और मोबाइल फोन बरामद किए, जिनमें शिकारों के फोटो और वीडियो भी थे।

पुलिस की कार्रवाई: मुखबिर की सूचना पर चाल चली, सभी गिरफ्त में
लखनऊ के डीसीपी ईस्ट शशांक सिंह के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स ने मुखबिर की टिप पर कार्रवाई की। 1 नवंबर को एक ट्रेन पर नजर रखी गई, जहां गिरोह ने फिर चाल चलने की कोशिश की। लेकिन इस बार पुलिस की सादी वर्दी वाली महिला कांस्टेबल भी सवार थीं। जैसे ही उल्टी का नाटक शुरू हुआ, वे दखल दे दीं। गिरोह की सभी सदस्यें पकड़ी गईं, और पूछताछ में पूरा राज खुल गया। डीसीपी सिंह ने कहा, “यह चाल बेहद शातिराना थी, लेकिन हमारी सतर्कता से यह टूट गई। हमने पीड़ितों से संपर्क किया है, ताकि चुराई गई चीजें लौटाई जा सकें।” गिरोह पर आईपीसी की धारा 379 (चोरी), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी चालें चलाने वाले अन्य गिरोहों पर भी नजर रखी जा रही है।

यात्रियों के लिए सलाह: सतर्क रहें, इन उपायों से बचें
पुलिस और विशेषज्ञों ने यात्रियों को सजग रहने की हिदायत दी है। यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स हैं:

  • ध्यान न भटकने दें: अगर कोई सहयात्रा अचानक बीमार पड़ने का बहाना बनाए, तो दूरी बनाए रखें और अपने सामान पर नजर रखें।
  • आभूषण छिपाएं: यात्रा के दौरान गले की चेन या कंगन को कपड़ों के अंदर रखें। अगर संभव हो, तो नकली आभूषण पहनें।
  • शिकायत करें: संदिग्ध व्यवहार देखें तो तुरंत आरपीएफ हेल्पलाइन 182 पर कॉल करें या नजदीकी स्टेशन पर सूचना दें।
  • समूह में यात्रा: अकेले सफर करने से बचें, खासकर रात के समय। महिलाओं को सलाह है कि वे हमेशा आपस में बातचीत रखें।
  • सीसीटीवी का फायदा: अधिकांश ट्रेनों और बस स्टैंडों पर कैमरे हैं, इसलिए चोरों को आसानी नहीं मिलती।

एक पीड़िता ने कहा, “मैं घबरा गई थी, लेकिन अब जानकर सतर्क रहूंगी। महिलाओं को ऐसे हमलों से बचाने के लिए जागरूकता जरूरी है।”

व्यापक प्रभाव: सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा पर बहस
यह घटना उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही है। पिछले वर्षों में इसी तरह की चालें बेंगलुरु की बीएमटीसी बसों में भी देखी गईं, जहां चोरों ने उल्टी का बहाना बनाकर जेबें साफ कीं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक तंगी और बेरोजगारी ऐसी अपराधों को जन्म दे रही है। रेलवे और परिवहन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाने का ऐलान किया है, जिसमें सादे कपड़ों में सिपाहियों की तैनाती शामिल है। सोशल मीडिया पर #PukeTrickThieves ट्रेंड कर रहा है, जहां यात्री अपनी कहानियां साझा कर रहे हैं।

यह गिरोह पकड़ना एक राहत है, लेकिन अपराध की जड़ें गहरी हैं। उम्मीद है कि इससे सबक लेकर यात्री सतर्क होंगे, और सरकारें सुरक्षा उपायों को मजबूत करेंगी। लखनऊ की सड़कें अब थोड़ी सुरक्षित लग रही हैं, लेकिन सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *