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by-Ravindra Sikarwar

बड़वानी (मध्य प्रदेश): राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने यात्रियों को दहला दिया। रविवार, 2 नवंबर 2025 को भोपाल से अलीराजपुर जा रही एक प्राइवेट पैसेंजर बस अचानक पलट गई, जिसमें सवार 16 लोगों को चोटें आईं। सौभाग्य से किसी की जान नहीं गई, लेकिन घायलों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की फुर्ती भरी कार्रवाई से सभी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने फ्रैक्चर, चोटें और सिर पर मामूली आघात जैसी समस्याओं का इलाज शुरू कर दिया। अधिकांश मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है। यह हादसा ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर रहा है, जहां अक्सर जानवरों की मौजूदगी दुर्घटनाओं का कारण बनती है।

हादसे का पूरा विवरण: सड़क पर जानवर के कारण हिली बस
यह दुर्घटना दोपहर के समय तलवाड़ा के पास हुई, जब बस राज्य की राजधानी भोपाल से निकलकर अलीराजपुर की ओर बढ़ रही थी। यह मार्ग जिला-स्तरीय यात्रा के लिए काफी व्यस्त रहता है, जहां ग्रामीण और व्यापारी अक्सर आवागमन करते हैं। बड़वानी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) धीरज बब्बर के अनुसार, बस चालक को अचानक सड़क पर एक जंगली जानवर के उभरने से झटका लगा। घबराहट में चालक ने बस को तेजी से मोड़ा, जिससे वाहन नियंत्रण से बाहर हो गया और सड़क किनारे पलट गया। “भोपाल से आ रही पैसेंजर बस तलवाड़ा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई और पलट गई,” एएसपी बब्बर ने आईएएनएस को बताया।

हादसे के समय बस में करीब 30-35 यात्री सवार थे, जो विभिन्न उम्र वर्गों से थे। पलटते ही चीख-पुकार मच गई, लेकिन आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों ने तुरंत सहायता शुरू कर दी। वाहन के मलबे से यात्रियों को बाहर निकालने में करीब आधा घंटा लगा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस की गति सामान्य थी, लेकिन सड़क पर अचानक आए जानवर ने स्थिति को बिगाड़ दिया। यह इलाका पहाड़ी और जंगली क्षेत्र से सटा हुआ है, जहां हिरण या कुत्ते जैसे जानवर अक्सर सड़कों पर भटकते हैं। हादसे से सड़क पर यातायात बाधित हो गया, और क्रेन की मदद से बस को हटाने में कई घंटे लग गए।

घायलों की स्थिति: अस्पतालों में चल रहा उपचार, कोई खतरा नहीं
दुर्भाग्यपूर्ण रूप से घायल होने वाले 16 यात्रियों में पुरुष, महिलाएं और कुछ बच्चे शामिल हैं। सभी को अंजड़ और बड़वानी के नजदीकी अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। चिकित्सकों के मुताबिक, चोटें गंभीर नहीं हैं – कुछ को हड्डियों में फ्रैक्चर, शरीर पर चोट के निशान और सिर पर हल्का आघात हुआ है। ज्यादातर मरीजों को निगरानी में रखा गया है, और उनका इलाज चल रहा है। “सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। उनकी हालत नियंत्रण में है,” एएसपी बब्बर ने राहत भरी जानकारी दी। एक बच्चे को सिर पर मामूली चोट लगी थी, जिसके लिए एक्स-रे और दवाओं का सहारा लिया गया। परिवारों को सूचित कर दिया गया है, और कुछ रिश्तेदार अस्पताल पहुंच चुके हैं।

प्रशासन की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य संभाले। जिला कलेक्टर ने भी स्थिति की समीक्षा की, और घायलों के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की। यह त्वरित प्रतिक्रिया किसी बड़ी त्रासदी को टालने में सफल रही।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: जांच और सुरक्षा उपायों पर जोर
पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच शुरू कर दी। बस चालक से पूछताछ की जा रही है, और वाहन की फिटनेस तथा गति रिकॉर्डर की जांच होगी। एएसपी बब्बर ने कहा, “पुलिस और प्रशासनिक दल घटनास्थल पर तुरंत पहुंचे। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया।” प्रारंभिक रिपोर्ट में चालक की लापरवाही नहीं पाई गई, लेकिन जानवरों से बचाव के लिए सड़क पर चेतावनी संकेतक लगाने की सिफारिश की गई है।

जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है, ताकि चालकों को जंगली क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी जा सके। इसके अलावा, बस ऑपरेटर कंपनी पर भी नजर रखी जा रही है, जो प्राइवेट फर्म है। विपक्षी नेताओं ने भी घटना पर शोक जताया और सड़क सुरक्षा के लिए विशेष फंड की मांग की।

व्यापक संदर्भ: मध्य प्रदेश में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या
यह हादसा मध्य प्रदेश के सड़क सुरक्षा आंकड़ों को चिंतित करने वाला बनाता है। राज्य में 2025 में अब तक सैकड़ों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें जानवरों या खराब सड़कों का हाथ रहा है। उदाहरण के लिए, अक्टूबर के अंत में बड़वानी के ही खेतिया में एक अन्य बस पलटने से एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि 50 से अधिक यात्री घायल हुए थे। वे नर्मदा परिक्रमा के लिए जा रहे थे। इसी महीने मोरена में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो मौतें और 15 चोटें हुईं। भिंड में ट्रक की टक्कर से पांच लोगों की जान गई, जबकि सिधी में एसयूवी और कंटेनर ट्रक के टकराने से तीन की मौत हुई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण मार्गों पर लाइटिंग, बैरियर और स्पीड ब्रेकर की कमी ऐसी घटनाओं को न्योता देती है। परिवहन विभाग ने चालान और वाहन जांच अभियान तेज करने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर यात्री अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं, जहां एक ने लिखा, “ग्रामीण सड़कें खतरनाक हो चुकी हैं। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।”

यह घटना यात्रियों की सुरक्षा पर बहस छेड़ रही है। प्रशासन का दावा है कि त्वरित कार्रवाई से जानें बचाई गईं, लेकिन भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ, राज्य सड़क सुरक्षा सप्ताह का इंतजार कर रहा है, जहां नए उपायों की घोषणा हो सकती है।

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