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by-Ravindra Sikarwar

अजमेर (राजस्थान): राजस्थान के प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले में एक ऐसी घटना घटी, जिसने न केवल मेले की चमक फीकी पड़ गई, बल्कि पशु व्यापार की नैतिकता पर भी बहस छेड़ दी। शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025 को मेले में प्रदर्शित एक दुर्लभ मुर्रा नस्ल की भैंस, जिसकी अनुमानित कीमत 21 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, अचानक बीमार पड़ गई और उसकी मौत हो गई। यह भैंस मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हुई थी, और हजारों दर्शक रोजाना इसे देखने उमड़ रहे थे। पशु चिकित्सकों की टीम ने जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसके विशालकाय शरीर और तेजी से बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण प्रयास विफल रहे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस घटना को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं, जहां लोग पशु क्रूरता और व्यापारिक लालच पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।

पुष्कर मेले का वैभव और इस भैंस की विशेषता:
पुष्कर पशु मेला, जिसे पुष्कर मेला के नाम से भी जाना जाता है, एशिया के सबसे बड़े पशु बाजारों में से एक है। यह हर साल कार्तिक पूर्णिमा के आसपास अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित होता है, जो 30 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025 तक चल रहा है। मेला ऊंट, घोड़े, गाय-भैंस जैसे पशुओं के व्यापार का केंद्र है, जहां देश-विदेश से पशुपालक, व्यापारी और पर्यटक जुटते हैं। इस बार मेला पारंपरिक रूप से ऊंट और पशु बिक्री के अलावा घोड़ों के व्यापार पर केंद्रित रहा, जहां 224 घोड़ों की बिक्री से 75 लाख रुपये से अधिक की आय हुई। लेकिन इस भैंस ने सबका ध्यान खींचा था।

यह भैंस मुर्रा नस्ल की थी, जो दूध उत्पादन और सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। लगभग 1,500 किलोग्राम वजन वाली इस भैंस को ‘सुल्तान’ नाम दिया गया था, और इसे विशेष वाहनों में लाया गया था। मालिक ने दावा किया कि इसकी कीमत 21 करोड़ रुपये है, क्योंकि यह दुर्लभ आनुवंशिक गुणों वाली है। मेले में इसे राजसी अंदाज में प्रदर्शित किया जा रहा था – विशेष स्टॉल पर रखा गया, जहां दर्शक सेल्फी लेने के लिए लाइन लगा देते थे। मालिक के अनुसार, इसकी देखभाल में प्रतिदिन 1,500 रुपये खर्च होते थे, जिसमें बेसन, अंडे, तेल, दूध, घी और लीवर टॉनिक शामिल थे। एक पशु प्रेमी ने तो इसे 9 करोड़ रुपये में खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन मालिक ने इनकार कर दिया था। वीडियो में दिखाया गया कि भैंस मेले के बीचों-बीच लेटी हुई है, चारों ओर भीड़ इकट्ठी हो गई है, और कुछ लोग शोकाकुल नजर आ रहे हैं।

मुर्रा भैंसें हरियाणा और पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं, जहां इनका उपयोग दूध और प्रजनन के लिए किया जाता है। इस नस्ल की औसत उम्र 25 वर्ष तक होती है, लेकिन विशेष देखभाल से यह और लंबी हो सकती है। हालांकि, इस घटना ने सवाल उठाया है कि क्या ऐसी कीमत वाले पशुओं को मेले की भागदौड़ में लाना उचित है?

मौत का कारण: स्वास्थ्य बिगड़ने से हृदयाघात का संदेह
घटना शुक्रवार दोपहर के समय घटी, जब भैंस अचानक कमजोर पड़ने लगी। मेले के आयोजकों को सूचना मिलते ही पशुपालन विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची। चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया, जिसमें इंजेक्शन और दवाओं का उपयोग किया गया। विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि भैंस के विशाल शरीर के कारण इलाज में कठिनाई हुई, और उसका स्वास्थ्य इतनी तेजी से बिगड़ा कि बचाना संभव न हो सका। प्रारंभिक जांच में हृदयाघात या गंभीर आंतरिक समस्या का संदेह जताया गया है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि भैंस को ‘मोटा’ दिखाने के लिए कई दवाएं इंजेक्ट की गई थीं, जो उसके स्वास्थ्य पर भारी पड़ी। एक यूजर ने लिखा, “व्यापार के नाम पर पशु क्रूरता हो रही है। क्या 21 करोड़ की कीमत में उसकी जिंदगी शामिल नहीं थी?” विभाग ने इन दावों की जांच शुरू कर दी है, और मेला स्थल पर पशु स्वास्थ्य जांच को और सख्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर आक्रोश:
घटना का एक 30 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिसमें मृत भैंस को घिरे लोग दिखाई दे रहे हैं। इंस्टाग्राम और ट्विटर पर #PushkarFairDeath और #AnimalCruelty ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने व्यंग्य किया, “21 करोड़ की भैंस भी किस्मत से नहीं बच सकी। क्या यह व्यापार का अंत है?” जबकि दूसरे ने कहा, “पशुओं को मेलों में लाकर तनाव देते हैं, फिर मौत पर शोक मनाते हैं।” हजारों कमेंट्स में लोग पशु अधिकारों की मांग कर रहे हैं। पशु कल्याण संगठनों ने सरकार से अपील की है कि मेले में पशु स्वास्थ्य मानकों को कड़ाई से लागू किया जाए।

इससे पहले मेला अन्य आकर्षणों के लिए चर्चा में था। एक चंडीगढ़ की 15 करोड़ रुपये की घोड़ी ‘शाहबाज’ ने सुर्खियां बटोरीं, जिसकी प्रजनन फीस ही 2 लाख रुपये है। वहीं, 23 करोड़ की एक अन्य भैंस ‘अनमोल’ भी स्टार बनी, जिसे राजसी भोजन दिया जाता था। लेकिन इस मौत ने मेले के उज्ज्वल पक्ष को धूमिल कर दिया।

व्यापक प्रभाव: पशु व्यापार पर बहस और सबक
यह घटना पुष्कर मेले की परंपरा को चुनौती दे रही है, जो सदियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक कृषि में मशीनीकरण बढ़ने से गाय-भैंस की मांग घटी है, जबकि घोड़ों का चलन बढ़ा है। लेकिन पशुओं को तनावपूर्ण यात्रा और प्रदर्शन से गुजारना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है। पशुपालन मंत्री ने कहा, “हम पशु कल्याण को प्राथमिकता देंगे। मेले में वेटरनरी टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी।” अभिभावक और पर्यटक संगठनों ने मांग की है कि भविष्य के मेलों में पशु स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य हो।

मालिक को अब आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह शोक में डूबा है। यह त्रासदी एक चेतावनी है कि व्यापार के नाम पर पशु जीवन को दांव पर न लगाया जाए। पुष्कर मेला अब भी जारी है, लेकिन इस घटना ने इसके सकारात्मक पहलुओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उम्मीद है कि इससे पशु संरक्षण के नए मानक बनेंगे, ताकि अगला मेला खुशी का हो।

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