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by-Ravindra Sikarwar

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरोवर इलाके में स्थित नीरजा मोदी स्कूल में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। शनिवार, 1 नवंबर 2025 को कक्षा 6 की एक मासूम छात्रा अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। 12 वर्षीय अमायरा परिवार की इकलौती संतान थी, और पुलिस को शक है कि शिक्षक के कठोर व्यवहार से आहत होकर उसने यह कदम उठाया। घटना के बाद परिवार और अभिभावक संगठनों में आक्रोश फैल गया है, जबकि स्कूल प्रशासन पर साक्ष्य नष्ट करने का आरोप लगाया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है, और इस हृदयविदारक घटना ने निजी स्कूलों में छात्र सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण: स्कूल परिसर में फैली सनसनी
यह दुखद हादसा शनिवार सुबह करीब 10 बजे के आसपास हुआ, जब अमायरा कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों और सहपाठियों के अनुसार, वह अपनी कक्षा की शिक्षिका से नाराज नजर आ रही थी। कुछ मिनटों बाद ही वह कक्षा से बाहर निकली और सीधे स्कूल की चौथी मंजिल की बालकनी पर पहुंच गई। वहां से उसने नीचे छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसे नजदीकी सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अमायरा का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है, और प्रारंभिक जांच में कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं।

पुलिस ने बताया कि स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि घटना के क्रम को समझा जा सके। मानसरोवर थाना प्रभारी लखन खटाना ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। हमने स्कूल प्रबंधन से पूछताछ शुरू कर दी है, और सहपाठियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।” घटनास्थल पर खून के धब्बे साफ दिखाई दे रहे थे, लेकिन अभिभावक संगठनों का दावा है कि स्कूल ने जल्दबाजी में जगह को साफ करा दिया, जो साक्ष्य छिपाने की कोशिश हो सकती है। अमायरा के परिवार ने अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, लेकिन वे गहन जांच की मांग कर रहे हैं।

शिक्षक के व्यवहार का आरोप: सहपाठियों ने खोला राज
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने बताया कि उन्होंने कई छात्रों से बात की है, और सभी ने एक ही बात कही कि अमायरा शिक्षिका के व्यवहार से बेहद दुखी थी। “शिक्षिका ने क्लास में अमायरा को बुरी तरह डांटा था, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई। कुछ ही देर बाद उसने यह कदम उठा लिया।” जैन ने आगे आरोप लगाया कि स्कूल ने घटना के तुरंत बाद साइट को साफ करा दिया, जो जांच में बाधा डाल सकता है। अभिभावक संगठन ने मांग की है कि दोषी शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, साथ ही निजी स्कूलों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच अनिवार्य की जाए।

अमायरा एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से थी। उसके पिता एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार ने बताया कि अमायरा पढ़ाई में औसत थी, लेकिन हमेशा खुशमिजाज रहती थी। घटना से पहले कोई संकेत नहीं मिला था कि वह परेशान है। पड़ोसियों का कहना है कि वह संगीत और नृत्य में रुचि रखती थी, और स्कूल में भी सक्रिय रहती थी। यह घटना परिवार को गहरा सदमा दे गई है, और वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग और सरकार की प्रतिक्रिया: सुरक्षा पर सवाल
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “यह बेहद दुखद है। स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था की कमी साफ नजर आ रही है। चौथी मंजिल तक पहुंच सीमित होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कोई इंतजाम नहीं था।” उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल का दौरा करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग की टीम ने शनिवार शाम को स्कूल पहुंचकर प्रारंभिक जांच की, जिसमें पाया गया कि बालकनियों पर रेलिंग कमजोर थीं और निगरानी की कमी थी। विभाग ने स्कूल को नोटिस जारी कर दिया है और अस्थायी रूप से कुछ कक्षाओं को बंद करने का आदेश दिया है।

विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता ने कहा, “निजी स्कूलों में कॉर्पोरल पनिशमेंट (शारीरिक दंड) पर रोक है, लेकिन अमल नहीं होता। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी हैं।” राजस्थान में पिछले एक वर्ष में छात्र आत्महत्याओं के कई मामले सामने आ चुके हैं, जैसे सिकार में परीक्षा परिणाम से दुखी होकर एक छात्रा का मामला। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद छात्रों में तनाव बढ़ा है, और स्कूलों को काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने चाहिए।

व्यापक प्रभाव: स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
यह घटना न केवल अमायरा के परिवार को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल उठा रही है। नीरजा मोदी स्कूल एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जहां हजारों छात्र पढ़ते हैं। घटना के बाद स्कूल में अवकाश घोषित कर दिया गया, और अभिभावकों को बुलाकर स्थिति स्पष्ट की गई। संगठनों ने मांग की है कि सभी निजी स्कूलों में सीसीटीवी अनिवार्य हो, और शिक्षकों को संवेदनशीलता प्रशिक्षण दिया जाए। पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया है, और जांच पूरी होने पर आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकता है।

अमायरा की मौत ने समाज को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर अभिभावक अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं, जहां एक ने लिखा, “बच्चों की मुस्कान की हत्या हो रही है। स्कूल सुरक्षित आश्रय होने चाहिए, न कि दर्द का केंद्र।” विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि माता-पिता बच्चों से रोज बात करें और स्कूलों में हेल्पलाइन स्थापित करें। यह त्रासदी एक सबक है कि छोटी-छोटी बातें बच्चों के मन पर गहरा असर डाल सकती हैं। उम्मीद है कि जल्द न्याय मिलेगा और ऐसी घटनाएं न हों। अमायरा की आत्मा को शांति मिले, यही सबकी प्रार्थना है।

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