by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 5 महीने की मासूम बच्ची रूही मिनोटे की जान चली गई। बच्ची को खांसी, सर्दी और बुखार के इलाज के लिए एक निजी मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाओं का मिश्रण दिया गया था, जिसमें एक हर्बल कफ सिरप भी शामिल था। यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ, जब बच्ची की हालत अचानक बिगड़ गई और वह सांस लेना बंद कर बैठी। परिवार का आरोप है कि दवाओं के सेवन के कुछ ही घंटों बाद बच्ची की जान पर बन आई।
घटना का पूरा विवरण:
यह दुखद घटना छिंदवाड़ा जिले के बिच्छुआ कस्बे में 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई। रूही के पिता संदीप मिनोटे ने बताया कि उनकी बेटी को सोमवार को अचानक खांसी, सर्दी और हल्का बुखार हो गया। परिवार सबसे पहले बिच्छुआ में स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, लेकिन वहां कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। निराश होकर वे पास के एक निजी मेडिकल स्टोर ‘कुरेठे मेडिकल्स’ पर गए। वहां दुकानदार ने बिना किसी डॉक्टर की सलाह के छोटे-छोटे पुड़िया (सैशे) में दवाएं और एक हर्बल कफ सिरप ‘कसामृत’ (Kasamrit) दिया। दुकानदार ने सलाह दी कि सिरप को शहद के साथ मिलाकर बच्ची को पिलाएं।
परिवार ने घर लौटकर उसी शाम दवाओं का कोर्स शुरू कर दिया। संदीप ने कहा, “हमने सोचा कि यह सामान्य दवा है, जो बच्चों के लिए सुरक्षित होगी। लेकिन मंगलवार रात से रूही की हालत बिगड़ने लगी। वह लगातार रो रही थी, सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उल्टी हो रही थी।” बुधवार सुबह परिवार फिर स्वास्थ्य केंद्र ले गया, लेकिन वहां भी डॉक्टर न होने के कारण कोई मदद नहीं मिली। आखिरकार, बच्ची को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कहा कि उसकी सांसें रुक चुकी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक जांच में दवाओं से एलर्जी या विषाक्तता का संदेह जताया जा रहा है।
रूही बिच्छुआ वार्ड नंबर 12 की रहने वाली थीं। उनके परिवार में मां, पिता और एक बड़ा भाई है। संदीप मजदूरी करते हैं और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण वे मजबूरी में दुकान पर निर्भर हो गए। घटना के बाद पुलिस ने बिच्छुआ थाने में मामला दर्ज कर लिया है। परिवार के पास से 16 पैकेट आयुर्वेदिक दवाएं और एक कफ सिरप बरामद किया गया है।
जिले में दवाओं से जुड़ी मौतों का सिलसिला:
यह घटना छिंदवाड़ा जिले के लिए एक और सदमा है, जहां हाल ही में दूषित कफ सिरप से 20 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। सितंबर 2025 में परासिया और चौराई क्षेत्रों में ‘कोल्ड्रिफ’ (Coldrif) नामक कफ सिरप के सेवन से कम से कम 20 बच्चे किडनी फेलियर का शिकार हो गए। यह सिरप तमिलनाडु की स्रेसन फार्मा कंपनी द्वारा बनाया गया था और स्थानीय सरकारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी ने अपनी निजी क्लिनिक पर इसे निर्धारित किया था। जांच में पाया गया कि सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन था, जो औद्योगिक सॉल्वेंट है और बच्चों के लिए घातक साबित होता है।
इसके अलावा, पंधुरना और बैतूल जिलों में तीन और बच्चे इस सिरप से प्रभावित हुए। कुल मिलाकर 24 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग ने 36 घंटों के अंदर जांच पूरी कर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन मध्य प्रदेश में रिपोर्ट आने में देरी हुई। केंद्र सरकार ने भी दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी और दुकानदारों द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बेचने से ऐसी त्रासदियां बढ़ रही हैं।
संभावित कारण और विशेषज्ञों की राय:
डॉक्टरों के अनुसार, हर्बल या आयुर्वेदिक कफ सिरप भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, खासकर शिशुओं के लिए। इनमें कभी-कभी छिपे हुए रसायन या एलर्जेंस हो सकते हैं। रूही के मामले में, सिरप को शहद के साथ मिलाने से बैक्टीरिया का खतरा भी बढ़ सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा, “छोटे बच्चों को कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें। खांसी-बुखार जैसे लक्षणों पर तुरंत मेडिकल मदद लें।” इसके अलावा, तनाव और पोषण की कमी भी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है।
जिले के स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा। फिलहाल, मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है और दुकानदार के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया जा रहा है।
क्या करें बचाव के लिए?
इस घटना से सबक लेते हुए, अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए। यहां कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए जा रहे हैं:
- डॉक्टर की सलाह अनिवार्य: कभी भी दुकान से सीधे दवा न खरीदें। सरकारी या विश्वसनीय अस्पताल जाएं।
- शिशु दवाओं पर सावधानी: दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप से परहेज करें। घरेलू उपाय जैसे भाप लेना या नमक-पानी गार्गल आजमाएं।
- लक्षणों पर नजर: अगर बच्चे को उल्टी, सांस की तकलीफ या पेशाब में कमी हो, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।
- जागरूकता फैलाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कैंप लगाकर लोगों को दवाओं के खतरे के बारे में बताएं।
- सरकारी सुविधाओं का उपयोग: डॉक्टरों की कमी की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से करें।
यह घटना मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। सरकार को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भर्ती और दवाओं की गुणवत्ता जांच पर तत्काल ध्यान देना होगा, ताकि ऐसी और मौतें न हों। रूही की मौत ने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया है, लेकिन उम्मीद है कि इससे सबक लेकर भविष्य सुरक्षित बनेगा।
