by-Ravindra Sikarwar
धार/इंदौर: मध्य प्रदेश के धार जिले के औद्योगिक नगरी पीथमपुर के सेक्टर-3 में सागौर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण स्थल पर गुरुवार सुबह एक भयावह हादसा हो गया। दो क्रेनों द्वारा भारी गिरडर को ब्रिज पर चढ़ाने के दौरान सागौर साइड पर स्थित एक क्रेन अचानक पलट गई, जो सर्विस रोड पर गुजर रही दो पिकअप वाहनों – एक टाटा मैजिक और एक अन्य पिकअप – पर जा गिरी। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटनास्थल पर दो घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद घायलों को निकाला गया। यह हादसा निर्माण कार्य की लापरवाही का चिंताजनक उदाहरण है, जो क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। स्थानीय लोगों ने क्रेन के पलटने के बाद 8 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया, जो बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।
हादसे का पूरा विवरण: क्रेन का संतुलन बिगड़ने से वाहनों पर हमला
घटना गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे कूटी रोड पर सागौर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण स्थल पर घटी। यह ब्रिज लगभग 500 मीटर लंबा है और पिछले तीन वर्षों से निर्माणाधीन है। दो क्रेनें गिरडर को ब्रिज के दोनों सिरों से उठा रही थीं, ताकि इसे पिलर पर स्थापित किया जा सके। अचानक सागौर साइड की क्रेन के एक सपोर्ट ने मिट्टी में धंसना शुरू कर दिया, जिससे पूरा यंत्र संतुलन खो बैठा और ओवरब्रिज से नीचे गिर गया।
क्रेन का वजन और गिरडर की भारीपन के कारण यह दुर्घटना इतनी विनाशकारी साबित हुई कि सर्विस रोड पर गुजर रही दो पिकअप गाड़ियां चकनाचूर हो गईं। टाटा मैजिक के ड्राइवर को तुरंत बाहर निकाला जा सका, लेकिन अन्य दो लोगों को मलबे के नीचे दबा होने के कारण दो घंटे की मशक्कत के बाद बचाया गया। धार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मयंक अवस्थी ने बताया, “क्रेन के पलटने से वाहनों पर भारी मलबा गिर गया। एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल पहुंचने पर दम तोड़ दिया। चार घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर के मिनी टेक्सटाइल अस्पताल भेज दिया गया है।”
घायलों में दो पिकअप के चालक और यात्री शामिल हैं, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बचाव कार्य में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ), फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी रहीं। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि क्रेन का बूम (लंबा हिस्सा) सीधे वाहनों पर गिरा, जिससे आसपास धूल का गुबार उठ गया।
मृतकों और घायलों की पहचान: परिवारों पर शोक की छाया
मृतकों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, एक टाटा मैजिक के कंडक्टर और एक पिकअप के ड्राइवर थे। दोनों ही स्थानीय मजदूर थे, जो औद्योगिक क्षेत्र में काम करने के लिए रोजाना इस रोड से गुजरते थे। एसपी अवस्थी ने कहा कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है, और परिजनों को सूचना दे दी गई है।
चार घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया। इनमें से दो की हालत नाजुक है, और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। एक घायल ने बताया, “हम बस काम पर जा रहे थे, तभी जोरदार धमाका हुआ। क्रेन नीचे गिरते ही सब कुछ अंधेरा हो गया।” परिवारों ने प्रशासन से त्वरित न्याय की मांग की है।
निर्माण परियोजना की पृष्ठभूमि: तीन साल से लंबित सागौर ब्रिज
पीथमपुर, जिसे ‘एशिया का डेट्रॉइट’ भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। यहां ऑटोमोबाइल उपकरणों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, और एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) भी स्थित है। सागौर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण रेलवे मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में चल रहा है, जिसका उद्देश्य रेल-पथ और सड़क यातायात को सुगम बनाना है।
यह परियोजना पिछले तीन वर्षों से चल रही है, लेकिन बार-बार देरी का शिकार हो रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, निर्माण में उपयोग की जा रही मिट्टी की गुणवत्ता और क्रेनों की क्षमता पर सवाल उठे हैं। धार की एसपी ने कहा, “ब्रिज की लंबाई 500 मीटर है, और यह कूटी रोड पर स्थित है। निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर जांच के आदेश दिए गए हैं।” यह हादसा क्षेत्र में अन्य निर्माण स्थलों पर भी सुरक्षा ऑडिट की मांग को तेज कर देगा।
कारण और जांच: सुरक्षा मानकों की लापरवाही?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि क्रेन का सपोर्ट मिट्टी में धंस गया, जो संभवतः मिट्टी की नरमी या क्रेन के अधिक भार के कारण हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थल पर मिट्टी का परीक्षण ठीक से नहीं किया गया होगा। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि क्रेन ऑपरेटर को चेतावनी दी गई थी, लेकिन फिर भी हादसा हो गया। धार की एएसपी पर्ल बेलापुरकर ने बताया, “दुर्घटना के दौरान ब्रिज पर पिलर चढ़ाने का कार्य चल रहा था। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है, जिसकी फॉरेंसिक जांच होगी।”
प्रशासन ने निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया है, और रेलवे से सुरक्षा रिपोर्ट मांगी है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 12 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की, जिसके बाद स्थानीय लोगों का चक्का जाम प्रदर्शन समाप्त हो गया। जाम के कारण 8 किलोमीटर लंबी ट्रैफिक जाम लग गई थी, जो दोपहर तक हल हो गई।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं: औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सैकड़ों फैक्ट्रियां हैं, जहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। इस हादसे से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। स्थानीय ट्रेड यूनियनों ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन किया, मांग की कि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। एक यूनियन नेता ने कहा, “ऐसी लापरवाही से और जानें जा सकती हैं। सरकार को तत्काल जांच करवानी चाहिए।”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर शोक व्यक्त किया और अधिकारियों को त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। केंद्रीय रेल मंत्री ने भी ट्वीट कर कहा, “पीथमपुर हादसे में मृतकों को श्रद्धांजलि। निर्माण कार्यों में सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त करने के आदेश।” यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे राज्य में निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ देगी।
सबक और भविष्य की सावधानियां:
यह दुर्घटना विकास की दौड़ में सुरक्षा को पीछे छोड़ने की कड़वी याद दिलाती है। पीथमपुर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र में ऐसी घटनाएं आर्थिक हानि के साथ-साथ मानवीय क्षति पहुंचाती हैं। प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है, जिसकी रिपोर्ट आने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल, घायलों की सलामती की कामना ही की जा सकती है। यह हादसा हमें सिखाता है कि बुनियादी ढांचे का निर्माण तेजी से हो, लेकिन कभी भी सुरक्षा पर आंखें बंद न हों। आगे की अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।
