by-Ravindra Sikarwar
मुंबई: मुंबई के पॉवई इलाके में गुरुवार दोपहर एक छोटे से फिल्म स्टूडियो में 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाने वाले व्यक्ति रोहित आर्या को पुलिस ने गोली मार दी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। यह घटना आरए स्टूडियो में लगभग दो घंटे चली, जहां आर्या ने एयर गन और कुछ रसायनों का इस्तेमाल कर धमकी दी थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से सभी बंधकों को बिना किसी नुकसान के मुक्त करा लिया गया। यह न केवल कानून प्रवर्तन की कुशलता का उदाहरण है, बल्कि आर्या के गहरे व्यक्तिगत संकट की दुखद कहानी भी उजागर करती है, जो सरकारी बकाया भुगतान और मानसिक तनाव से जुड़ी हुई थी। जांच में सामने आया है कि आर्या ने आत्महत्या के बजाय इस चरम कदम को चुना, ताकि अपनी बात रख सकें।
रोहित आर्या की पृष्ठभूमि: एक संघर्षपूर्ण जीवन और व्यवसायिक नाकामी
रोहित आर्या, लगभग 50 वर्षीय मुंबई निवासी, एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता और प्रोडक्शन मैनेजर थे, जो छोटे-मोटे वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे। मूल रूप से महाराष्ट्र के एक छोटे शहर से, वे कई वर्षों से मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में संघर्षरत थे। पुलिस जांच के अनुसार, आर्या ने आरए स्टूडियो नामक एक छोटा सा स्पेस किराए पर लिया था, जो पॉवई के महावीर क्लासिक बिल्डिंग में स्थित है। यह स्टूडियो मुख्य रूप से ऑडिशन और छोटे प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होता था।
आर्या का जीवन हाल के वर्षों में आर्थिक और भावनात्मक संकटों से घिरा हुआ था। 2024 में, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के एक विभाग के साथ एक शैक्षणिक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए अनुबंध किया था, जिसमें सरकारी स्कूलों के लिए जागरूकता वीडियो बनाना शामिल था। उन्होंने दावा किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था, जिसके कारण वे कर्ज के जाल में फंस चुके थे। गुस्से में, आर्या ने पिछले साल उपमुख्यमंत्री दीपक केसकरकर के कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल की थी, जहां उन्होंने चेक जारी करने की मांग की। केसकरकर ने कथित तौर पर उन्हें 7 लाख और 8 लाख रुपये के दो चेक व्यक्तिगत सहायता के रूप में दिए थे, लेकिन आर्या का कहना था कि वादा किए गए बाकी पैसे कभी नहीं मिले। विभाग ने स्पष्ट किया कि आर्या का बजट अस्पष्ट था, खासकर विज्ञापन, प्रबंधन और तकनीकी खर्चों के मामले में, और उन्होंने आधिकारिक स्पष्टीकरण पर भरोसा करने की अपील की।
आर्या की मानसिक स्थिति भी चिंताजनक थी। पड़ोसियों और सहयोगियों के अनुसार, वे अक्सर अकेले रहते थे और अपनी परियोजनाओं की असफलता को लेकर उदास रहते थे। एक करीबी ने बताया कि वे आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे थे, लेकिन अंत में उन्होंने इसे “बातचीत का माध्यम” बनाने का फैसला किया। यह घटना उनके लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का चरम बिंदु साबित हुई।
घटना का विवरण: धोखे से बंधक बनाना और वायरल वीडियो की धमकी
गुरुवार दोपहर लगभग 1:30 बजे, आर्या ने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 17 बच्चों (उम्र 8 से 15 वर्ष) को वेब सीरीज के ऑडिशन के बहाने स्टूडियो बुलाया। इनमें लड़के-लड़कियां दोनों शामिल थे, जो सपनों की दुनिया में कदम रखने को उत्सुक थे। जैसे ही बच्चे अंदर पहुंचे, आर्या ने दरवाजा बंद कर दिया और उन्हें एक कमरे में बंद कर लिया। साथ ही, दो वयस्क – एक वरिष्ठ नागरिक और एक अन्य व्यक्ति – भी फंस गए, जिससे कुल 19 बंधक बन गए।
आर्या ने स्टूडियो में सेंसर लगाए थे, ताकि कोई बचाव प्रयास न हो सके। उनके पास एक घातक एयर गन थी, जो नरम ऊतकों पर करीब से चलाई जाए तो खतरनाक साबित हो सकती है, साथ ही कुछ रासायनिक पदार्थ और लाइटर भी थे, जिनसे वे आग लगाने की धमकी दे रहे थे। घटना से पहले, आर्या ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “मैं रोहित आर्या हूं। आत्महत्या करने के बजाय, मैंने एक योजना बनाई और कुछ बच्चों को बंधक बना लिया। मेरी मांगें बहुत सरल हैं – नैतिक और नैतिक प्रश्न। मैं कुछ लोगों से बात करना चाहता हूं। अगर उनकी प्रतिक्रिया पर कोई सवाल उठे, तो मैं पूछूंगा। अगर कुछ होता है, तो मैं जिम्मेदार नहीं हूं। जो मुझे उकसाएंगे, वे जिम्मेदार होंगे। एक सामान्य व्यक्ति सिर्फ बात करना चाहता है। कृपया मुझे किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर न करें।”
वीडियो में आर्या ने स्पष्ट चेतावनी दी: “अगर आप गलत कदम उठाते हैं, तो मैं सब कुछ आग के हवाले कर दूंगा और खुद भी मर जाऊंगा।” उन्होंने मांग की कि उन्हें विशिष्ट लोगों से बात करने दिया जाए, लेकिन विवरण अस्पष्ट थे। माता-पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिससे पॉवई पुलिस स्टेशन में हड़कंप मच गया।
पुलिस कार्रवाई: 35 मिनट की साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। लगभग 1:45 बजे, क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) के 8 कमांडो, फायर ब्रिगेड और सीनियर अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) सत्यनारायण चौधरी ने नेतृत्व किया। शुरुआत में, पुलिस ने दो घंटे तक बातचीत की कोशिश की, लेकिन आर्या की धमकियां बढ़ती गईं। उन्होंने एयर गन से पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने एक राउंड फायरिंग की।
स्रोतों के अनुसार, जब आर्या एक बच्चे पर निशाना साधने वाले थे, तभी एक पुलिस अधिकारी ने सटीक निशाना लगाकर उनकी छाती में गोली मार दी। यह सब बाथरूम से जबरन प्रवेश के दौरान हुआ, जहां से टीम ने चुपचाप स्टूडियो में घुसपैठ की। पूरी ऑपरेशन मात्र 35 मिनट में समाप्त हो गई। आर्या को तुरंत जोगेश्वरी ट्रॉमा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से एयर गन, रासायनिक कंटेनर और अन्य सामग्री बरामद की। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस दत्ता नलावड़े ने कहा, “सभी 17 बच्चे सुरक्षित हैं। जांच जारी है।”
प्रेरक कारक: बकाया भुगतान का दर्द और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा
पुलिस के प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आर्या का मुख्य उद्देश्य सरकारी बकाया भुगतान का मुद्दा उठाना था। वे मानते थे कि विभाग ने उनके प्रोजेक्ट को जानबूझकर लटका दिया, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई। वीडियो में उन्होंने इसे “नैतिक प्रश्न” बताया, जो संभवतः अधिकारियों से जवाब मांगने का प्रयास था। हालांकि, यह कदम पूरी तरह गलत और खतरनाक था, जिसने निर्दोष बच्चों को खतरे में डाल दिया।
यह घटना भारत में मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक तनाव के गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर काउंसलिंग और वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण है। मुंबई क्राइम ब्रांच को अब एनकाउंटर की जांच सौंपी गई है, ताकि सभी पहलुओं की पड़ताल हो सके।
एक दुखद अंत और सबक:
रोहित आर्या की कहानी एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति की है, जो सपनों के शहर में टूट गया। उनकी मौत ने न केवल एक परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे छोटी-छोटी समस्याएं बड़े संकट में बदल जाती हैं। सौभाग्य से, पुलिस की बहादुरी ने 17 मासूम बच्चों की जान बचाई, जो अब अपने परिवारों के साथ हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि बातचीत हमेशा हथियारों से बेहतर विकल्प है, और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। आगे की जांच से और विवरण सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल, यह मुंबई पुलिस की सतर्कता का विजय दिवस है।
