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by-Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत 27 वर्षीय नर्सिंग अधिकारी ने दो वरिष्ठ डॉक्टरों पर गंभीर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए थाना कम्पू में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि नौकरी की सुरक्षा के बहाने डॉक्टरों ने उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की और जातिगत अपमान भी किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 (यौन उत्पीड़न), 352 (अपराधी धमकी) और 3(2)(वा) (अनुसूचित जाति/जनजाति पर अपराध) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। दोनों आरोपी डॉक्टरों को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन पूछताछ के लिए समन जारी कर दिए गए हैं। यह घटना अस्पताल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

घटना का पूरा विवरण: कैसे शुरू हुई यह कथा?
घटना जया अरोया (JAH) सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से जुड़ी है, जो ग्वालियर में एक प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। पीड़िता, जो घाटीगांव क्षेत्र के सिमिरिया टंका गांव की निवासी है, पिछले कुछ समय से यहां नर्सिंग अधिकारी के पद पर तैनात थी। पीड़िता के अनुसार, आरोपी डॉक्टरों ने उसकी नौकरी को हथियार बनाकर दबाव डाला।

  • पहला आरोपी: डॉ. गिरीश शंकर गुप्ता, अस्पताल के अधीक्षक (सुपरिंटेंडेंट)। पीड़िता ने बताया कि डॉ. गुप्ता ने उसे अपने कार्यालय में बुलाया और नौकरी में स्थिरता के लिए “समझौता” करने की बात कही, जिसका इशारा यौन संबंधों की ओर था। जब पीड़िता ने इनकार किया, तो डॉक्टर ने धमकी दी कि उसकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
  • दूसरा आरोपी: डॉ. शिवम यादव, अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग (किडनी रोग विशेषज्ञ विभाग) के प्रमुख (HoD)। पीड़िता का आरोप है कि डॉ. यादव ने भी इसी तरह का व्यवहार किया। दोनों डॉक्टरों ने मिलकर पीड़िता को अलग-अलग मौकों पर फंसाने की कोशिश की, जिसमें अनुचित स्पर्श और अभद्र टिप्पणियां शामिल थीं। इसके अलावा, डॉ. यादव ने पीड़िता की जाति (अनुसूचित जाति) का अपमान भी किया, जो SC/ST एक्ट के दायरे में आता है।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि यह उत्पीड़न पिछले एक महीने से चल रहा था। डर के मारे वह चुप थी, लेकिन हाल ही में घटनाओं ने हद पार कर दी, जिसके बाद उसने अपने माता-पिता को पूरी बात बताई। माता-पिता ने तुरंत कार्रवाई की मांग की और 28 अक्टूबर 2025 की रात को थाना कम्पू में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस कार्रवाई: FIR से जांच तक का सफर

  • FIR दर्ज: 29 अक्टूबर 2025 को शाम को थाना कम्पू पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि मामला संवेदनशील है और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • जांच की प्रक्रिया:

  – पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई, लेकिन मानसिक आघात की पुष्टि हुई।

  – आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं, जैसे सीसीटीवी फुटेज, सहकर्मियों के बयान और व्हाट्सएप चैट।

  – दोनों डॉक्टरों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यदि दोषी पाए गए, तो सख्त कार्रवाई होगी।

  • अस्पताल की प्रतिक्रिया: अस्पताल प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। एक अधिकारी ने कहा, “हम ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे। आरोपी सस्पेंड हो सकते हैं।” हालांकि, पीड़िता के परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर ढिलाई का आरोप लगाया है।

सामाजिक संदर्भ: स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते उत्पीड़न के मामले
यह घटना मध्य प्रदेश और पूरे देश में स्वास्थ्यकर्मियों, खासकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न के मामलों की याद दिलाती है। हाल ही में ग्वालियर में ही एक जूनियर डॉक्टर के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया था, जिसने पूरे चिकित्सा समुदाय को हिलाकर रख दिया। राष्ट्रीय स्तर पर, कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर की हत्या-बलात्कार की घटना ने डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया।

कानूनी प्रावधानों का जिक्र:

धाराविवरणसंभावित सजा
BNS 74यौन उत्पीड़न3 वर्ष तक कारावास + जुर्माना
BNS 352आपराधिक धमकी2 वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों
SC/ST Act 3(2)(वा)जातिगत अपमान6 माह से 5 वर्ष तक कारावास + जुर्माना

पीड़िता के वकील ने कहा, “यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की खामी को उजागर करता है। हम कोर्ट में मजबूत केस लड़ेंगे।”

पीड़िता का बयान और परिवार की मांग:
पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं सिर्फ न्याय चाहती हूं। अस्पताल में महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए।” उसके परिवार ने मांग की है कि आरोपी डॉक्टरों को तत्काल निलंबित किया जाए और पीड़िता को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए। महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और रिपोर्ट मांगी है।

भविष्य की चुनौतियां और सबक:
यह प्रकरण स्वास्थ्य संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) की भूमिका पर सवाल उठाता है, जो POSH एक्ट के तहत अनिवार्य हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान और सख्त निगरानी से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच 15 दिनों में पूरी होगी।

ग्वालियर पुलिस से अपडेट्स के लिए संपर्क करें या महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करें। महिलाओं की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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