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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: उत्तर दिल्ली के तिमारपुर स्थित गांधी विहार में चौथी मंजिल के एक फ्लैट में 6 अक्टूबर की अंधेरी रात को एक सनसनीखेज हत्या हुई। यूपीएससी की तैयारी कर रहे 32 वर्षीय रामकेश मीणा का जला हुआ शव मिला, जिसे शुरू में गैस सिलेंडर फटने का हादसा माना गया। लेकिन पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उनकी ही लिव-इन साथी 21 वर्षीय अमृता चौहान ने अपने पूर्व प्रेमी और उसके साथी के साथ मिलकर उनकी गला दबाकर हत्या की। हत्यारों ने शव को पूरी तरह नष्ट करने के लिए घी, तेल और शराब डालकर आग लगाई तथा गैस सिलेंडर का सहारा लेकर इसे दुर्घटना दिखाने की चतुराई दिखाई।

रिश्ते की शुरुआत और विवाद की जड़:
रामकेश मीणा राजस्थान के रहने वाले थे और दिल्ली में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इस साल मई या जुलाई के आसपास उनकी मुलाकात अमृता चौहान से हुई, जो मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली हैं। अमृता फॉरेंसिक साइंस में बीएससी कर रही थीं (बाद में कंप्यूटर साइंस में शिफ्ट), क्राइम वेब सीरीज की शौकीन थीं। दोनों ने जल्द ही लिव-इन रिलेशनशिप शुरू कर ली और रामकेश के फ्लैट में साथ रहने लगे। लेकिन देर-सवेर अमृता को पता चला कि रामकेश ने गुप्त रूप से उनके अंतरंग वीडियो और फोटो हार्ड डिस्क में सेव कर रखे थे। जब अमृता ने इन्हें डिलीट करने को कहा, तो रामकेश ने साफ इनकार कर दिया। इससे अमृता आग बबूला हो गईं।

पूर्व प्रेमी को बताई बात, बनी हत्या की साजिश:
गुस्से में अमृता ने अपने पुराने प्रेमी सुमित कश्यप (27 वर्षीय) को यह राज खोला। सुमित, जो मुरादाबाद में एलपीजी सिलेंडर वितरक हैं, रामकेश पर गुस्सा हो गया। उन्होंने अपने दोस्त संदीप कुमार (29 वर्षीय, एसएससी-सीजीएल की तैयारी कर रहे) को भी शामिल किया। शुरू में योजना सिर्फ हार्ड डिस्क चुराने की थी, लेकिन हालात बिगड़ गए। अमृता ने अपनी फॉरेंसिक नॉलेज और क्राइम शोज से सीखे सबक का इस्तेमाल कर हत्या का प्लान बनाया। सुमित की गैस सिलेंडर की जानकारी ने कवर-अप को मजबूत किया।

हत्या का खौफनाक मंजर: 6-7 घंटे जली चिता
5-6 अक्टूबर की रात को तीनों नकाबपोश होकर फ्लैट में घुसे। रामकेश को पहले पिटाई की, फिर कुर्सी पर बांध दिया। संघर्ष के दौरान सुमित ने फोन चार्जर से उनका गला दबाकर दम तोड़ दिया। फिर शव पर रिफाइंड ऑयल, घी और वाइन/शराब उड़ेली। सुमित ने किचन से गैस सिलेंडर निकालकर रामकेश के सिर के पास रखा, नॉब खोला और लाइटर से आग लगा दी। उन्होंने किताबों से चिता जैसी संरचना बनाई, मुख्य द्वार अंदर से बंद किया (जाली हटा दी)। हार्ड डिस्क, दो लैपटॉप, ट्रॉली बैग, रामकेश की शर्ट और अन्य सामान ले भागे। लगभग एक घंटे बाद सिलेंडर फटा, जिससे शव पूरी तरह जल गया। आग सुबह करीब 2:50 बजे भड़की।

पुलिस जांच: सीसीटीवी और CDR ने खोली पोल
फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई तो जले शव के साथ सिलेंडर मिला। शुरू में लापरवाही से मौत का केस दर्ज हुआ। लेकिन रामकेश के परिवार को शक हुआ। सीसीटीवी में दिखा- तीन नकाबपोश घुसे, 39 मिनट बाद एक बाहर, रात 2:57 बजे अमृता और एक अन्य भागे, फिर आग। अमृता का फोन लोकेशन घटनास्थल पर, कॉल पर स्विच ऑफ। तिमारपुर थाने की टीम (इंस्पेक्टर पंकज तोमर, एसएचओ प्रवीण कुमार, डीसीपी राजा बन्थिया) ने मुरादाबाद में दबिश दी। 18 अक्टूबर को अमृता पकड़ी गई, जिसने सब कबूल कर सुमित-संदीप का नाम लिया। 21/22 को सुमित, 23 को संदीप गिरफ्तार। बरामद: हार्ड डिस्क, फोन, शर्ट आदि।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच:
तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या (302), साझा इरादा (34), आग/विस्फोट से नुकसान (436) आदि धाराएं लगाई गईं। विसेरा रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच जारी है। अमृता ने पूछताछ में कहा- “उसे सबक सिखाना था।” यह केस क्राइम शोज जैसा साबित हुआ, जहां नॉलेज ने प्लानिंग को परफेक्ट बनाया, लेकिन तकनीक ने बेनकाब कर दिया।

यह घटना प्रेम, विश्वासघात और बदले की खतरनाक मिसाल है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी रिमांड पर हैं, पूर्ण खुलासा होगा।

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