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by-Ravindra Sikarwar

ढाका के अंतरिम शासन प्रमुख मुहम्मद यूनुस एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को एक उपहार स्वरूप पुस्तक भेंट की — जिसका नाम है “Art of Triumph: Bangladesh’s New Dawn”

लेकिन इस उपहार ने कूटनीतिक हलकों में भूचाल मचा दिया है, क्योंकि पुस्तक के कवर पर एक ऐसा नक्शा छपा है जिसमें भारत के कई पूर्वोत्तर राज्य — असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर — बांग्लादेश की विस्तारित सीमा में शामिल दिखाए गए हैं।

क्या है ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ विवाद?
“ग्रेटर बांग्लादेश” की अवधारणा उन राष्ट्रवादी विचारों पर आधारित है जिनमें बांग्लादेश की सीमाओं को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई आधार पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।

इस विचार में भारत के बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों को “बांग्लादेश का प्राकृतिक हिस्सा” बताया जाता है — जिसे भारत लंबे समय से एक विस्तारवादी और अस्वीकार्य दावा मानता है।

क्यों बढ़ा विवाद:
यूनुस द्वारा यह पुस्तक उस समय दी गई जब वे और पाकिस्तानी अधिकारी आपसी संबंधों पर बातचीत के लिए मिले थे।

  • पुस्तक के कवर पर दर्शाए गए विवादित नक्शे में भारत के सात राज्यों को बांग्लादेश के अधीन दर्शाया गया है।
  • यह कवर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत में आक्रोश और राजनीतिक आलोचना का कारण बन गया।
  • कई विश्लेषकों ने इसे भारत-विरोधी प्रतीकात्मक इशारा करार दिया है।

भारत में प्रतिक्रिया:
भारत के राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में इस कदम को बेहद अपमानजनक और उकसाने वाला बताया जा रहा है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा उपहार भारत की भौगोलिक अखंडता पर सीधा हमला है।
  • कई सांसदों और पूर्व राजनयिकों ने इसे “कूटनीतिक असंवेदनशीलता” बताते हुए ढाका से औपचारिक स्पष्टीकरण की मांग की है।
  • सोशल मीडिया पर भी यूजर्स ने इसे “दुर्भावनापूर्ण प्रचार” करार दिया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चेतावनी देते हुए कहा कि “बांग्लादेश को भारत की सीमाओं, खासकर चिकन नेक कॉरिडोर की ओर नजर उठाने की गलती नहीं करनी चाहिए।”

पाकिस्तान से संबंधों पर संकेत:

  • यूनुस का यह कदम उस वक्त आया है जब बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ महीनों में राजनयिक समीकरणों में नया तालमेल देखने को मिला है।
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ दक्षिण एशिया में भारत-विरोधी धुरी बनाने की संभावनाओं की ओर संकेत देती हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय की स्थिति:
अब तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली ने इस घटना को “गंभीरता से लिया है” और भविष्य में इसके कूटनीतिक प्रभावों पर विचार किया जा रहा है।

पूर्व राजनयिकों का कहना है कि यदि इस नक्शे को आधिकारिक प्रतीक के रूप में स्वीकार किया गया तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई दरार डाल सकता है।

निष्कर्ष:
मुहम्मद यूनुस द्वारा दिया गया यह उपहार सिर्फ एक शिष्टाचार नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

भारत के सात राज्यों को “ग्रेटर बांग्लादेश” के अंतर्गत दिखाना, न केवल भारत की संप्रभुता पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे विश्वास को भी प्रभावित कर सकता है।

यह प्रकरण दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक नए तनाव की शुरुआत माना जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय कर सकता है।

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