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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: केंद्रीय सरकार ने परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘भारत टैक्सी’ नामक देश की पहली सहकारी कैब सेवा शुरू की है। यह सेवा निजी कंपनियों जैसे ओला और उबर के दबदबे को तोड़ने के उद्देश्य से विकसित की गई है, जिसमें चालकों को अपनी कमाई पर पूर्ण नियंत्रण मिलेगा और यात्रियों को सुरक्षित, किफायती विकल्प उपलब्ध होगा। सहकारिता मंत्रालय और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के संयुक्त प्रयास से बनी यह पहल चालकों को सशक्त बनाने और बाजार में पारदर्शिता लाने पर केंद्रित है।

लॉन्च की प्रमुख विशेषताएं:

  • पायलट प्रोजेक्ट: दिल्ली में नवंबर 2025 के पहले सप्ताह से 650 वाहनों के साथ शुरुआत होगी। इसमें एयरपोर्ट और चुनिंदा रेलवे स्टेशनों पर सॉफ्ट लॉन्च होगा। पहले चरण में लगभग 5,000 चालक (पुरुष और महिला दोनों) शामिल होंगे। सफलता पर दिसंबर से मुंबई, पुणे, भोपाल, लखनऊ और जयपुर जैसे 20 शहरों में विस्तार होगा।
  • सहकारी मॉडल: सेवा सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित होगी, जो जून 2025 में 300 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ पंजीकृत हुई। आठ प्रमुख सहकारी संस्थाओं—एनसीडीसी, आईएफएफसीओ, अमूल (जीसीएमएमएफ), क्रिबीएचसीओ, नाबार्ड, एनडीडीबी, एनसीईएल आदि—ने इसमें योगदान दिया है। प्रत्येक संस्था ने 10 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
  • चालकों के लिए लाभ: निजी ऐप्स के विपरीत, यहां कोई कमीशन नहीं काटा जाएगा। चालक केवल नाममात्र की दैनिक, साप्ताहिक या मासिक सदस्यता शुल्क देंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। लाभ का पुनर्वितरण चालकों में होगा, साथ ही सामाजिक सुरक्षा कवर (जैसे स्वास्थ्य बीमा) सुनिश्चित किया जाएगा। छह महीने बाद चालक पांच शेयर (प्रति शेयर 100 रुपये) खरीदकर सदस्य बन सकेंगे।
  • यात्रियों के लिए सुविधाएं: पारदर्शी मूल्य निर्धारण, सरचार्ज प्राइसिंग पर रोक, और सरकारी निगरानी। ऐप एंड्रॉयड (गूगल प्ले स्टोर) और आईओएस (ऐपल स्टोर) पर उपलब्ध होगा। डिजीलॉकर, उमंग और एपीआई सेटू जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से एकीकरण कर पहचान सत्यापन आसान होगा। रिक्शा से चार पहिया वाहनों तक सभी को शामिल किया जा सकता है।
  • प्रबंधन संरचना: नई गवर्निंग काउंसिल का गठन हुआ है। अमूल के एमडी जयेन मेहता चेयरमैन और एनसीडीसी के डिप्टी एमडी रोहित गुप्ता वाइस चेयरमैन हैं। आईआईएम बैंगलोर मार्केटिंग रणनीति के लिए सलाह देगा, जबकि तकनीकी पार्टनर जल्द चुना जाएगा।

विस्तार की योजना:
मार्च 2026 तक मेट्रो शहरों में स्थापना, और 2030 तक 1 लाख चालकों के साथ जिला मुख्यालयों व ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच। यह ‘सहकार से समृद्धि’ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि का हिस्सा है, जिसकी घोषणा मार्च 2025 में गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में की थी। सहकारी नीति के तहत यह डिजिटल और शहरी सेवाओं में सहकारिता को मजबूत करेगा।

चुनौतियां और उम्मीदें:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेवा चालकों की शिकायतों (कमीशन, असुरक्षित आय) को दूर कर बाजार में संतुलन लाएगी। हालांकि, तकनीकी एकीकरण और प्रतिस्पर्धा से निपटना चुनौतीपूर्ण होगा। सरकार का दावा है कि यह मॉडल न केवल आर्थिक समावेशन बढ़ाएगा, बल्कि परिवहन को अधिक न्यायसंगत बनाएगा।

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