by-Ravindra Sikarwar
महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण क्षेत्र में एक 28 वर्षीय महिला डॉक्टर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। सरकारी अस्पताल में तैनात यह डॉक्टर, जो मूल रूप से बीड़ जिले की रहने वाली थीं, गुरुवार रात करीब 12 बजे एक होटल के कमरे में फंदे से लटकी मिलीं। उनकी बायीं हथेली पर स्याही से लिखा एक संक्षिप्त सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने दो पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नोट में डॉक्टर ने लिखा था कि सब-इंस्पेक्टर गोपाल बडाने ने पिछले पांच महीनों में चार बार उनका बलात्कार किया और शारीरिक-मानसिक शोषण किया। इसके अलावा, उन्होंने इंस्पेक्टर प्रशांत बांकर पर लगातार मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसने उन्हें मौत के घाट उतारने के लिए मजबूर कर दिया। डॉक्टर ने नोट में स्पष्ट शब्दों में कहा, “गोपाल बडाने के कारण मैं मर रही हूं।” यह घटना न केवल परिवार को बल्कि पूरे समाज को स्तब्ध कर रही है, खासकर तब जब पीड़िता ने जून 2025 में ही फलटण के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस को एक पत्र लिखकर इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
परिवार के सदस्यों ने खुलासा किया कि डॉक्टर पर पुलिस और राजनीतिक दबाव के कारण गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने का भी आरोप था, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ गई। उनका चचेरा भाई ने बताया, “उन्हें बार-बार धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उनकी आवाज दबा दी गई। न्याय मिलना चाहिए।”
घटना के बाद सतारा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। आरोपी सब-इंस्पेक्टर गोपाल बडाने को निलंबित कर दिया गया है, जबकि दोनों के खिलाफ बलात्कार, आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के तहत मामला दर्ज हो गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और नोट की फोरेंसिक जांच चल रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग के प्रभारी भी हैं, ने सतारा एसपी से बात कर सख्त निर्देश दिए। एक टीम आरोपी बांकर की तलाश में जुटी हुई है, जो जिले से बाहर हैं।
महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चकणकर ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा, आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और महिलाओं की सुरक्षा में चूक हुई है। एनसीपी नेता आनंद परंजपे ने कहा, “महिलाओं पर अत्याचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति होनी चाहिए।” भाजपा ने भी जांच का भरोसा दिलाया।
