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by-Ravindra Sikarwar

इस्लामाबाद: पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने महिलाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने के लिए एक डिजिटल प्रशिक्षण कोर्स की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का नाम ‘तुफत अल-मुमिनात’ रखा गया है, जो संगठन की हाल ही में गठित महिलाओं की इकाई ‘जमात-उल-मोमिनात’ को मजबूत करने का प्रयास है। प्रत्येक महिला प्रतिभागी को 500 पाकिस्तानी रुपये (लगभग 156 भारतीय रुपये) का ‘दान’ देने और ऑनलाइन फॉर्म भरने की आवश्यकता है। यह कदम न केवल भर्ती को बढ़ावा देगा, बल्कि संगठन के लिए धन संग्रह का भी स्रोत बनेगा। संयुक्त राष्ट्र द्वारा चिह्नित आतंकी मसूद अजहर की बहनें इस कोर्स की प्रमुख व्याख्यात्री होंगी, जो 8 नवंबर से शुरू होने वाले दैनिक 40 मिनट के सत्रों का संचालन करेंगी।

कार्यक्रम का उद्देश्य और संरचना:
जेईएम ने इस ऑनलाइन कोर्स को महिलाओं के धार्मिक और जिहादी दायित्वों पर केंद्रित किया है। स्रोतों के अनुसार, यह पहल पाकिस्तान के रूढ़िवादी सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है, जहां महिलाओं की गतिविधियां सीमित रहती हैं। कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को इस्लाम और जिहाद के संदर्भ में उनकी भूमिका समझाई जाएगी, ताकि वे संगठन के एजेंडे को सक्रिय रूप से समर्थन दें। व्याख्यान ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए आयोजित होंगे, जो महिलाओं को घर बैठे शामिल होने की सुविधा प्रदान करेंगे।

मुख्य प्रशिक्षक मसूद अजहर की बहनें सादिया अजहर और समैरा अजहर होंगी। सादिया का पति यूसुफ अजहर, जो पुलवामा हमले के एक आरोपी था, मई 2025 में भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एयरस्ट्राइक में मारा गया था। इसके अलावा, जेईएम नेताओं के अन्य परिवारजन भी महिलाओं को जिहादी कर्तव्यों पर मार्गदर्शन देंगे। यह कोर्स संगठन की महिलाओं को सशस्त्र संघर्ष या आत्मघाती हमलों के लिए तैयार करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है, जैसा कि आईएसआईएस, हमास और एलटीटीई जैसे समूहों ने किया था।

पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम:
यह पहल अक्टूबर 2025 में मसूद अजहर के बहावलपुर स्थित मार्कज उस्मान ओ अली में दिए गए भाषण के बाद आई है, जहां उन्होंने पहली बार ‘जमात-उल-मोमिनात’ की घोषणा की थी। 19 अक्टूबर को पाक अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट में ‘दुख्तरान-ए-इस्लाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो महिलाओं को संगठन से जोड़ने का प्रारंभिक प्रयास था। जेईएम, जो भारत में कई हमलों जैसे 2019 के पुलवामा बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, अब डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम युवा महिलाओं को कट्टर बनाने और आतंकी नेटवर्क को विस्तार देने का प्रयास है।

वैश्विक चिंताएं और पाकिस्तान की भूमिका:
यह विकास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है, खासकर जब पाकिस्तान वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के मानदंडों का पालन करने का दावा करता है। स्रोतों ने बताया कि 500 रुपये का शुल्क ‘दान’ के रूप में लिया जा रहा है, लेकिन वास्तव में यह आतंकी फंडिंग का एक छिपा हुआ तरीका है। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की है और पाकिस्तान से आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। खुफिया एजेंसियां आशंकित हैं कि यह कोर्स न केवल भर्ती बढ़ाएगा, बल्कि महिलाओं को सक्रिय आतंकी भूमिकाओं में धकेल सकता है।

खतरे की घंटी:
जेईएम का यह डिजिटल अभियान दक्षिण एशिया में आतंकवाद की बदलती तस्वीर को उजागर करता है, जहां तकनीक का दुरुपयोग महिलाओं को निशाना बना रहा है। वैश्विक एजेंसियों को अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। यह घटना न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों पर भी सवाल खड़े कर रही है।

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