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By: Ravindra Sikarwar

Bhopal news: राजधानी भोपाल के नगर निगम संचालित स्लॉटर हाउस में गौवंश के अवैध वध का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस मुख्यालय के समक्ष पकड़े गए एक ट्रक में गौमांस की पुष्टि के बाद ही नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और स्लॉटर हाउस पर ताला लगा दिया। इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Bhopal news: गौमांस की पुष्टि, फिर भी प्रशासन की चुप्पी

17-18 दिसंबर की रात पुलिस मुख्यालय के सामने विहिप-बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 26 टन मांस से भरा एक ट्रक पकड़ा था। कार्यकर्ताओं ने तभी इसे गौमांस बताया और प्रदर्शन किया। मांस के नमूनों की जांच मधुरा प्रयोगशाला में कराई गई, जिसमें स्पष्ट रूप से गौमांस होने की पुष्टि हुई। 

इस पुष्टि के बावजूद कई दिनों तक नगर निगम प्रशासन पूरी तरह चुप्पी साधे रहा। गौमांस की जानकारी मिलते ही गुरुवार को अचानक स्लॉटर हाउस पर ताला लगा दिया गया, जिससे यह संदेह गहरा गया कि क्या अब तक जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही थीं?

Bhopal news: पुलिस कार्रवाई: दो गिरफ्तारियां, बड़े नाम अभी बाहर

गौमांस की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में मृत पशुओं को उठाने का ठेका प्राप्त करने वाला असलम कुरैशी और ट्रक चालक शामिल हैं। 

सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस के संचालक असलम चमड़ा को भी हिरासत में लिया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विहिप-बजरंग दल का तीखा प्रदर्शन और गंभीर आरोप

गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस आयुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। 

विहिप के विभाग सह मंत्री हरिओम शर्मा ने आरोप लगाया कि मृत पशुओं के उठाने का ठेका लेने वाला असलम कुरैशी ही स्लॉटर हाउस भी चला रहा था, जो स्पष्ट नियमों का उल्लंघन है। 

उन्होंने सवाल उठाया:

  • स्वस्थ पशु घोषित करने वाले पशु चिकित्सक पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • स्लॉटर हाउस प्रभारी और संबंधित नगर निगम अधिकारियों को अब तक क्यों संरक्षण मिला हुआ है?

कार्यकर्ताओं का दावा है कि पिछले छह महीनों में गौवंश मांस से जुड़े 10-12 मामले पकड़े जा चुके हैं, लेकिन हर बार छोटे-मोटे आरोपियों को पकड़कर बड़े दोषियों को बचाने की कोशिश की गई।

नगर निगम की जिम्मेदारी पर उठे गंभीर सवाल

हालांकि स्लॉटर हाउस जन सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर संचालित है, लेकिन उसकी निगरानी, निरीक्षण और नियमों के पालन की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की ही है। 

ट्रक पकड़े जाने के दिन ही स्लॉटर हाउस की जांच क्यों नहीं की गई? 

क्या यह महज लापरवाही थी या फिर किसी स्तर पर संरक्षण और सांठगांठ का मामला?

नगर निगम अधिकारियों के बयान

नगर निगम समापति किशन सूर्यवंशी ने कहा, “मुझे अभी तक गौवंश मांस की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। यदि पुष्टि हुई तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौवंश हत्या जैसे अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया, “स्लॉटर हाउस पीपीपी मॉडल पर चल रहा है, इसलिए निगम का सीधा हस्तक्षेप नहीं था। शेष जानकारी पता करके बताई जाएगी।”

बचे हुए सवाल

जब ट्रक में 26 टन मांस पकड़ा गया था, तब नगर निगम और पुलिस ने तत्काल स्लॉटर हाउस की तलाशी क्यों नहीं ली? 

क्या केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई करके बड़े लोगों को बचाने की तैयारी है? 

और क्या नगर निगम की जिम्मेदारी सिर्फ ताला लगाने तक ही सीमित रह गई है? 

यह मामला केवल गौवंश वध तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के पालन और जनता के विश्वास से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।

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