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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सालाना परंपरा को जारी रखते हुए इस साल दीवाली का त्योहार भारतीय नौसेना के जवानों के साथ मनाया। वे 20 अक्टूबर 2025 को गोवा और कारवार (कर्नाटक) तट से दूर समुद्र में खड़े भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर पहुंचे। यह पहली बार था जब मोदी ने किसी नौसैनिक जहाज पर दीवाली मनाई, जो उनके 2014 से चली आ रही परंपरा का 12वां अवसर था। इस दौरान उन्होंने सैनिकों की बहादुरी, समन्वय और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की जमकर तारीफ की, साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं की एकजुटता को याद किया। मोदी ने इसे ‘समुद्र पर विशेष दीवाली’ बताया और कहा कि सैनिकों के साथ यह पल उनके लिए परिवार के साथ त्योहार मनाने जैसा है।

आईएनएस विक्रांत पर पहुंच और रात का अनुभव:
प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली से गोवा की गोपनीय यात्रा पर निकले और आईएनएस विक्रांत पर पहुंचकर सैकड़ों नौसेना अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की। उन्होंने जहाज पर रात गुजारी, जहां उन्होंने सैनिकों की ऊर्जा और उत्साह को देखा। मोदी ने बताया कि सैनिकों ने देशभक्ति गीत गाए, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन था। उन्होंने कहा, ‘आईएनएस विक्रांत पर बीती रात को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। आप सभी में भरी अपार ऊर्जा और जोश को देखकर मैं अभिभूत हूं। जब आपने गीतों में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया, तो यह एक जवान के युद्धक्षेत्र के अनुभव जैसा लगा।’ इस पल को उन्होंने अविस्मरणीय बताया और कहा कि दीवाली उनके लिए इन बहादुरों के बीच विशेष बन गई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम, डिनर और योग सत्र:
दीवाली के जश्न में मोदी ने सैनिकों के साथ कई गतिविधियां कीं। एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां नौसेना के जवानों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिसमें ‘कसम सिंदूर की’ नामक एक विशेष गीत शामिल था, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित था। मोदी ने इस कार्यक्रम को हमेशा याद रखने योग्य बताया। इसके बाद, उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों के साथ पारंपरिक ‘बारा खाना’ डिनर किया, जहां मिठाइयां बांटी गईं और आपसी बातचीत हुई। अगली सुबह, जहाज के डेक पर योग सत्र में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने सैनिकों के साथ योगासन किए और कहा कि भारत की गौरव आईएनएस विक्रांत पर योग करना सुखद अनुभव है।

एयर पावर डेमो और जहाजों का प्रदर्शन:
मोदी ने आईएनएस विक्रांत के फ्लाइट डेक का दौरा किया, जहां मिग-29के लड़ाकू विमानों से घिरे हुए उन्होंने वायु शक्ति प्रदर्शन देखा। दिन और रात के समय छोटी रनवे पर मिग-29के के टेकऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन हुआ, जिसे उन्होंने ‘आश्चर्यजनक’ बताया। इसमें सटीकता, कौशल, अनुशासन और तकनीकी उत्कृष्टता दिखाई गई। साथ ही, एक स्टीमपास्ट हुआ, जिसमें आईएनएस विक्रांत, आईएनएस विक्रमादित्य, आईएनएस सूरत, आईएनएस मोरमुगाओ, आईएनएस चेन्नई, आईएनएस इम्फाल, आईएनएस कोलकाता, आईएनएस तुशील, आईएनएस तबार, आईएनएस तेग, आईएनएस बेतवा, आईएनएस दीपक और आईएनएस आदित्य जैसे युद्धपोत शामिल थे। फ्लाईपास्ट में चेतक (झंडा और नौसेना चिन्ह लेकर), एमएच-60आर, सीकिंग, कामोव 31, डॉर्नियर, पी-8आई और मिग-29के जैसे विमान उड़े। मोदी ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंश भी थे।

भाषण में सैनिकों की प्रशंसा और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र:
अपने संबोधन में मोदी ने सैनिकों की बहादुरी और दृढ़ता की सराहना की, जिससे देश ने माओवादी आतंकवाद को खत्म करने में बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि 90% काम पूरा हो चुका है और पुलिस बल पूरी तरह माओवाद को मिटा देंगे। पहले 125 जिले माओवादी हिंसा की चपेट में थे, अब सिर्फ 11 बचे हैं, और उनमें से भी केवल तीन में प्रभाव दिखता है। 100 से अधिक जिलों में अब सड़कें, स्कूल, अस्पताल, मोबाइल टावर, हाईवे और उद्योग विकसित हो रहे हैं। मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं के समन्वय की तारीफ की, कहा कि नौसेना की धाक, वायुसेना की कुशलता और थलसेना की बहादुरी ने पाकिस्तान को जल्द घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, ‘आईएनएस विक्रांत के नाम से ही पाकिस्तान को रातों की नींद हराम हो गई थी।’ स्वदेशी मिसाइलों ब्रह्मोस और आकाश की क्षमता का जिक्र किया, जिन्होंने ऑपरेशन में अपनी ताकत साबित की और अब कई देश इन्हें खरीदना चाहते हैं।

स्वदेशी रक्षा और निर्यात पर जोर:
मोदी ने आईएनएस विक्रांत को 21वीं सदी के भारत की मेहनत, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सशस्त्र बलों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज प्रगति की है। हजारों वस्तुओं का आयात बंद हुआ और अधिकांश आवश्यक सैन्य उपकरण अब देश में बनते हैं। रक्षा उत्पादन तीन गुना बढ़कर पिछले साल 1.5 लाख करोड़ रुपये पार कर गया। 2014 से भारतीय शिपयार्डों ने नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंपी हैं। रक्षा निर्यात 30 गुना बढ़ा है और सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल करना है। उन्होंने कहा, ‘जब दुश्मन सामने हो और युद्ध सिर पर, तो जो पक्ष स्वतंत्र रूप से लड़ने की ताकत रखता है, वही हमेशा फायदे में रहता है।’

भारतीय नौसेना की भूमिका और मानवीय सहायता:
मोदी ने भारतीय नौसेना को हिंद महासागर का संरक्षक बताया, जो विश्व की 66% तेल आपूर्ति और 50% कंटेनर शिपमेंट की सुरक्षा करता है। मिशन-आधारित तैनाती, समुद्री डकैती विरोधी गश्त और मानवीय अभियानों से नौसेना वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में काम करती है। उन्होंने भारत की मानवीय सहायता का उदाहरण दिया: 2014 में मालदीव को जल संकट में ऑपरेशन नीर से साफ पानी पहुंचाया; 2017 में श्रीलंका को बाढ़ राहत; 2018 में इंडोनेशिया में सुनामी के बाद救ाव; म्यांमार में भूकंप, 2019 में मोजांबिक और 2020 में मेडागास्कर में सहायता। मोदी ने कहा कि भारत दुनिया भर में मानवीय मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है।

दीवाली मनाने की परंपरा का इतिहास:
2014 से मोदी ने दीवाली सैनिकों के साथ मनाई है: 2014 में सियाचिन, लद्दाख; 2015 में खासा/डोगराई, पंजाब; 2016 में सुमदो, हिमाचल; 2017 में गुरेज घाटी, जम्मू-कश्मीर; 2018 में हरसिल, उत्तराखंड; 2019 में राजौरी, जम्मू-कश्मीर; 2020 में लोंगेवाला, राजस्थान; 2021 में नौशेरा, जम्मू-कश्मीर; 2022-2023 में लेपचा, हिमाचल; 2024 में सर क्रीक, गुजरात; और 2025 में आईएनएस विक्रांत पर। कुल 9 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में, जिसमें जम्मू-कश्मीर में तीन बार शामिल है।

आईएनएस विक्रांत की विशेषताएं:
आईएनएस विक्रांत 45,000 टन का है, जिसमें 76% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। यह उच्च स्वचालन वाला है और 30 विमानों को संचालित कर सकता है, जैसे मिग-29के, कामोव-31, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर, स्वदेशी एएलएच और एलसीए (नेवी)। 2022 में कमीशन हुआ यह पोत भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

यह उत्सव सैनिकों के प्रति देश की कृतज्ञता और राष्ट्रीय एकता को दर्शाता है, जहां मोदी ने सैनिकों और उनके परिवारों को दीवाली की शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों और वीडियो ने इस घटना को और अधिक प्रचारित किया।

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