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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के जरिए हर वर्ष लगभग 2.5 लाख लचीले और प्रौद्योगिकी-सक्षम रोजगार अवसर पैदा करना है। यह पहल गिग इकोनॉमी को मजबूत करने और युवाओं तथा महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार प्रदान करने पर केंद्रित है, जो प्लेटफॉर्म इकोनॉमी की भूमिकाओं को औपचारिक रोजगार प्रणाली में एकीकृत करेगी। इस एमओयू पर 15 अक्टूबर 2025 को हस्ताक्षर किए गए, जो सरकार की विकासशील भारत 2047 की दृष्टि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस साझेदारी के तहत जोमैटो को एनसीएस पोर्टल पर एक नई ‘एग्रीगेटर’ श्रेणी में शामिल किया गया है। इस श्रेणी के माध्यम से जोमैटो हर साल 2.5 लाख रोजगार अवसर सूचीबद्ध करेगा, जो डिलीवरी पार्टनर और गिग वर्कर्स के लिए वास्तविक समय पर आय के स्रोत उपलब्ध कराएंगे। ये अवसर लचीले होंगे, जिससे काम करने वाले व्यक्ति अपनी सुविधा अनुसार समय चुन सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा और औपचारिकता प्रदान करेगा।

एनसीएस पोर्टल की बात करें तो यह 2015 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय मंच है, जो अब तक 7.7 करोड़ से अधिक रिक्तियों को जुटा चुका है। यह पोर्टल नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के बीच एक महत्वपूर्ण पुल का काम करता है, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाखों व्यक्तियों को रोजगार अवसरों से जोड़ता है। इस साझेदारी से पोर्टल पर गिग इकोनॉमी से जुड़े नए अवसर जुड़ेंगे, जो दीपावली के आसपास उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे नौकरी तलाशने वालों और नियोक्ताओं दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस एमओयू को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म इकोनॉमी की भूमिकाओं को औपचारिक रोजगार प्रणाली में शामिल करेगा। उन्होंने जोर दिया कि इससे युवाओं और महिलाओं को प्रौद्योगिकी-आधारित सम्मानजनक रोजगार मिलेंगे। मंत्री ने पोर्टल की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह लाखों लोगों को रोजगार से जोड़ चुका है।

श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस अवसर पर कहा कि सरकार का प्रयास देश के हर संगठित और असंगठित कामगार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने इस एमओयू को प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) से जोड़ते हुए बताया कि यह विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में मदद करेगा। मंत्री ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे सरकार के साथ मिलकर समावेशी और सुरक्षित रोजगार सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

मंत्रालय की सचिव वंदना गुर्नानी ने सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि यह साझेदारी सभी कामगारों के लिए सम्मानजनक रोजगार और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने दीपावली के आसपास एनसीएस पोर्टल पर नए करियर अवसरों की शुरुआत का जिक्र किया, जो नौकरी बाजार को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

यह साझेदारी श्रम मंत्रालय की पहले से चल रही पहलों का विस्तार है, जिसमें कई प्रमुख संगठनों को एनसीएस पोर्टल से जोड़ा गया है। इसका फोकस गिग इकोनॉमी को मजबूत करने पर है, जहां प्रौद्योगिकी के माध्यम से लचीले काम के अवसर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को औपचारिक लाभ जैसे सामाजिक सुरक्षा, बीमा और प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, यह एमओयू न केवल रोजगार सृजन में योगदान देगा, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर युवाओं को सशक्त बनाएगा। सरकार और जोमैटो दोनों इस साझेदारी से उत्साहित हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे लाखों लोगों का जीवन बेहतर होगा।

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