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by- Ravindra Sikarwar

इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हाल के दिनों में हुई तीव्र गोलीबारी के बाद पाकिस्तान ने बुधवार को संघर्ष विराम की घोषणा कर दी। यह झड़प वर्षों की सबसे घातक मानी जा रही है, जिसमें दोनों पक्षों से दर्जनों लोगों की मौत हुई है। तालिबान शासित अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच यह संघर्ष सीमा क्षेत्र में बढ़ते तनाव का परिणाम था, जिसने क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंकाओं को बढ़ा दिया था। अधिकारियों के अनुसार, यह 48 घंटे का अस्थायी संघर्ष विराम है, जो दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए समय प्रदान करेगा। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह लंबे समय से चली आ रही सीमा विवादों की वजह से हुआ है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि अफगान पक्ष ने पहले हमला किया, जबकि अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी बलों पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इस संघर्ष में कम से कम 20 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें सैनिक और नागरिक दोनों शामिल हैं।

संघर्ष का विवरण और समयरेखा:
संघर्ष की शुरुआत हाल के दिनों में हुई, जब दोनों देशों की सेनाओं ने सीमा पर गोलीबारी शुरू की। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, अफगान तालिबान बलों ने पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई की। दूसरी ओर, अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने दावा किया कि पाकिस्तानी बलों ने पहले हमला किया और उनके क्षेत्र में घुस आए। यह गोलीबारी इतनी तीव्र थी कि इसमें तोपखाने और भारी हथियारों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वर्षों की सबसे घातक झड़प थी, जिसमें दोनों पक्षों से सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई।

समयरेखा इस प्रकार है:

  • शुरुआत: संघर्ष कुछ दिनों पहले शुरू हुआ, जब सीमा पर छोटी-मोटी गोलीबारी बड़ी झड़प में बदल गई।
  • चरम: मंगलवार को संघर्ष अपने चरम पर पहुंचा, जब दर्जनों राउंड गोलीबारी हुई। एक रिपोर्ट में उल्लेख है कि एक लड़ाकू विमान भी गिराया गया, जिससे 8 सैनिकों की मौत हुई।
  • समाप्ति: बुधवार देर रात दोनों पक्षों ने 48 घंटे के संघर्ष विराम की घोषणा की। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच शांति बहाली के लिए लिया गया है। अफगान तालिबान ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि वे सीमा पर शांति चाहते हैं।

इस दौरान, पाकिस्तानी पक्ष से कम से कम 8 सैनिक मारे गए, जबकि अफगानिस्तान ने दावा किया कि उनके 12 से अधिक नागरिकों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। कुल मौतों की संख्या 30 से अधिक बताई जा रही है, हालांकि सटीक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं। घायलों की संख्या भी दर्जनों में है, और कई गांवों में संपत्ति का नुकसान हुआ।

पृष्ठभूमि और कारण:
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। डूरंड लाइन के रूप में जानी जाने वाली यह सीमा ब्रिटिश काल से विवादास्पद है, और अफगानिस्तान इसे मान्यता नहीं देता। हाल के वर्षों में, तालिबान के सत्ता में आने के बाद तनाव और बढ़ गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान से आतंकवादी समूह जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तानी क्षेत्र में हमले कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान पाकिस्तान पर उनके क्षेत्र में ड्रोन हमलों का आरोप लगाता है।

इस संघर्ष के प्रमुख कारण:

  • आतंकवाद: पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान टीटीपी जैसे समूहों को शरण दे रहा है, जो पाकिस्तानी सैनिकों पर हमले कर रहे हैं।
  • सीमा घुसपैठ: दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाते हैं।
  • आर्थिक और राजनीतिक तनाव: व्यापार और शरणार्थी मुद्दे भी विवाद का हिस्सा हैं।
  • हालिया घटनाएं: हाल के महीनों में कई छोटी झड़पें हुईं, लेकिन यह सबसे घातक थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं।

दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं:
पाकिस्तानी सरकार ने संघर्ष विराम की घोषणा करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं और वार्ता के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “हमने अफगान पक्ष के हमलों का जवाब दिया, लेकिन अब शांति के लिए कदम उठा रहे हैं।” दूसरी ओर, अफगान तालिबान के अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान ने उनके नागरिकों को निशाना बनाया, और वे संघर्ष विराम का सम्मान करेंगे लेकिन अपनी सीमा की रक्षा जारी रखेंगे। तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह संघर्ष पाकिस्तान की आक्रामकता का परिणाम था, लेकिन हम शांति चाहते हैं।”

स्थानीय निवासियों ने राहत व्यक्त की है, क्योंकि संघर्ष से उनके गांव प्रभावित हुए थे। एक अफगान नागरिक ने मीडिया से कहा, “हम शांति चाहते हैं; युद्ध से केवल नुकसान होता है।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और मध्यस्थता:
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, और रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी मध्यस्थता से यह संघर्ष विराम संभव हुआ। संयुक्त राष्ट्र ने भी बयान जारी कर कहा कि सीमा विवादों को बातचीत से सुलझाना चाहिए। चीन और भारत जैसे पड़ोसी देशों ने स्थिति पर नजर रखी हुई है, क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शांति के लिए दोनों देशों को द्विपक्षीय वार्ता बढ़ानी होगी।

भविष्य की संभावनाएं:
यह 48 घंटे का संघर्ष विराम अस्थायी है, और दोनों पक्षों को इसे स्थायी बनाने के लिए प्रयास करने होंगे। अगर तनाव जारी रहा, तो यह व्यापक संघर्ष में बदल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दोनों देश सीमा प्रबंधन पर समझौते करें और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाएं। इस घटना से सीखते हुए, अंतरराष्ट्रीय संगठन मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले दिनों में और अधिक विवरण सामने आने की संभावना है, लेकिन फिलहाल शांति की उम्मीद है। यह संघर्ष दोनों देशों के लोगों के लिए एक सबक है कि बातचीत से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

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