by-Ravindra Sikarwar
वाशिंगटन: भारतीय मूल के प्रमुख विदेश नीति विशेषज्ञ और रक्षा रणनीतिकार एश्ले जे. टेलिस को अमेरिकी न्याय विभाग ने राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी को अवैध रूप से रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। 64 वर्षीय टेलिस, जो अमेरिका-भारत संबंधों के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम हैं, को वर्जीनिया के विएना में उनके घर पर छापेमारी के दौरान मिले हजारों पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। इस मामले में चीन के अधिकारियों से उनकी मुलाकातों का भी जिक्र है, जिसने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। टेलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है और उनके वकीलों ने कहा है कि वे इन दावों का जोरदार विरोध करेंगे।
गिरफ्तारी और आरोपों का विवरण:
टेलिस को सप्ताहांत में गिरफ्तार किया गया और सोमवार को औपचारिक रूप से आरोप लगाए गए। एफबीआई की एक हलफनामे के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर 2025 में टेलिस ने अमेरिकी रक्षा और विदेश विभाग की इमारतों में प्रवेश किया, जहां उन्होंने गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच बनाई और उन्हें प्रिंट किया। इनमें अमेरिकी सैन्य विमानों की क्षमताओं से जुड़ी जानकारी शामिल थी। निगरानी कैमरों में उन्हें एक लेदर ब्रिफकेस या बैग के साथ इमारत से बाहर जाते हुए देखा गया। शनिवार को उनके विएना स्थित घर की तलाशी में 1,000 से अधिक पन्नों के ‘टॉप सीक्रेट’ और ‘सीक्रेट’ चिह्नित दस्तावेज बरामद हुए।
टेलिस को स्टेट डिपार्टमेंट में एक अवैतनिक सलाहकार और रक्षा विभाग के ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट में एक ठेकेदार के रूप में काम करने के कारण टॉप सीक्रेट सुरक्षा मंजूरी प्राप्त थी, जो उन्हें संवेदनशील जानकारी तक पहुंच प्रदान करती थी। अगर दोषी साबित हुए, तो उन्हें अधिकतम 10 साल की जेल और 250,000 डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है। अमेरिकी अटॉर्नी लिंडसे हॉलिगन ने एक बयान में कहा कि इस तरह के आरोप हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
चीन से संबंध:
एफबीआई के दस्तावेजों में उल्लेख है कि टेलिस ने हाल के वर्षों में कई बार चीनी सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। एक विशेष घटना सितंबर 2022 (या 2025, स्रोतों में भिन्नता) की है, जब वे वर्जीनिया के फेयरफैक्स में एक रेस्तरां में पहुंचे, जहां वे एक मनीला लिफाफे के साथ आए लेकिन जाते समय वह उनके पास नहीं था। दो अन्य मौकों पर चीनी अधिकारियों ने उन्हें उपहार बैग दिए। इन मुलाकातों ने जांचकर्ताओं का ध्यान खींचा, हालांकि टेलिस के वकीलों ने किसी विदेशी ताकत के लिए काम करने के किसी भी आरोप को खारिज किया है।
टेलिस का पृष्ठभूमि और योगदान:
टेलिस का जन्म मुंबई, भारत में हुआ और वे अमेरिका में अध्ययन के लिए आए। वे दक्षिण एशिया, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और एशियाई रणनीतिक मुद्दों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सेवा की और अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक ऐतिहासिक कदम था। वर्तमान में वे कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलो हैं, जहां वे टाटा चेयर फॉर स्ट्रैटेजिक अफेयर्स संभालते हैं।
टेलिस ने अमेरिका-भारत-चीन संबंधों पर व्यापक रूप से टिप्पणियां की हैं। हाल ही में एक भारतीय पत्रकार करण थापर को दिए साक्षात्कार में उन्होंने भारत पर ट्रंप के उच्च शुल्कों और वाशिंगटन के लिए दिल्ली की रणनीतिक महत्व पर चर्चा की। वे अमेरिकी प्रशासनों को भारत संबंधों पर सलाह देते रहे हैं, लेकिन वे वाशिंगटन में भारत के प्रति अमेरिकी दृष्टिकोण के आलोचक भी रहे हैं।
उनके प्रमुख विचार:
टेलिस ने विभिन्न निबंधों और भाषणों में अपनी राय व्यक्त की है:
- भारत पर: वे मानते हैं कि भारत की बहुध्रुवीय दुनिया में एक ध्रुव बनने की महत्वाकांक्षा उसकी क्षमताओं से अधिक है, जो धीमी आर्थिक वृद्धि, सीमित सैन्य क्षमता और कमजोर संस्थानों से बाधित है। वे भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति की आलोचना करते हैं, जो लचीलापन प्रदान करती है लेकिन चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ गठबंधन जैसी गहरी साझेदारी को रोकती है। वे भारत में लोकतांत्रिक गिरावट, ध्रुवीकरण और बहुसंख्यकवाद की राजनीति को वैश्विक स्थिति के लिए हानिकारक मानते हैं।
- पाकिस्तान पर: पाकिस्तान को भारत की उन्नति में एक संरचनात्मक बाधा के रूप में देखते हैं, जो पश्चिमी सीमा पर संघर्ष की धमकी से संसाधनों को खींचता है और चीन के खतरे से ध्यान हटाता है। वे बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच समन्वय से दो-मोर्चे की स्थिति की चेतावनी देते हैं।
- चीन पर: चीन को 21वीं सदी की परिभाषित रणनीतिक चुनौती मानते हैं, जिसमें सैन्य, वैचारिक, आर्थिक और तकनीकी आयाम शामिल हैं। वे चीन की परमाणु नीति को प्रतिरोध और दबाव की मिश्रित रणनीति के रूप में देखते हैं, और भारत को रक्षा सहयोग बढ़ाने, प्रतिरोध मजबूत करने और अमेरिका के साथ साझेदारी गहराने की सलाह देते हैं।
- अमेरिका और ट्रंप पर: वे तर्क देते हैं कि भारत कभी भी चीन के खिलाफ अमेरिका का स्वतः पक्ष नहीं लेगा, क्योंकि उसकी रणनीतिक स्वायत्तता इसे रोकती है। ट्रंप की नीतियां, जैसे शुल्क और व्यापार दबाव, भारत की रणनीतिक महत्व को कम कर सकती हैं और विश्वास को क्षति पहुंचा सकती हैं।
इनकार और प्रतिक्रियाएं:
टेलिस के वकीलों डेबोरा कर्टिस और जॉन नासिकास ने एक बयान में कहा कि वे एक सम्मानित विद्वान हैं और वे आरोपों का विरोध करेंगे, विशेष रूप से किसी विदेशी विरोधी के लिए काम करने के किसी भी संकेत को। कार्नेगी एंडोमेंट ने उन्हें प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया है। स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन ने चल रही मुकदमेबाजी पर टिप्पणी करने से इनकार किया। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग करने वालों पर मुकदमा चलाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
यह मामला अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में एक बड़ा विवाद पैदा कर रहा है, खासकर जब टेलिस जैसे विशेषज्ञ की भूमिका भारत-अमेरिका संबंधों में इतनी महत्वपूर्ण रही है। जांच जारी है, और आने वाले दिनों में और विवरण सामने आ सकते हैं।
