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by-Ravindra Sikarwar

मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस पावर लिमिटेड के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) और अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी अशोक कुमार पाल को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दिल्ली से की गई और इसके पीछे रिलायंस ग्रुप से जुड़े 17,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी का मामला है। ईडी का आरोप है कि पाल ने फर्जी बैंक गारंटी के जरिए फंड्स डायवर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ। इस कार्रवाई से रिलायंस ग्रुप के वित्तीय लेन-देन पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं, और अनिल अंबानी की कंपनियों पर जांच का दायरा बढ़ सकता है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

गिरफ्तारी का विवरण: दिल्ली से हुई तत्काल कार्रवाई
ईडी ने 10 अक्टूबर 2025 की रात को अशोक कुमार पाल को दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया। पाल, जो रिलायंस पावर के न केवल सीएफओ हैं बल्कि एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी हैं, लंबे समय से अनिल अंबानी के विश्वासपात्र रहे हैं। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गई है। पाल को 11 अक्टूबर को दिल्ली की एक विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी की जांच में सामने आया है कि पाल ने रिलायंस पावर और अन्य ग्रुप कंपनियों के माध्यम से येस बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से लिए गए लोन को गलत तरीके से इस्तेमाल किया। विशेष रूप से, एक फर्जी बैंक गारंटी के जरिए करोड़ों रुपये के फंड्स को डायवर्ट करने का आरोप है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पाल ने ग्रुप की कंपनियों में फर्जी लेन-देन कराकर ब्लैक मनी को सफेद करने में मदद की। यह मामला एडीए ग्रुप और येस बैंक के बीच हुए वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।”

मनी लॉन्ड्रिंग का पृष्ठभूमि: 17,000 करोड़ का लोन फ्रॉड
यह मामला 2020 से चल रही जांच का हिस्सा है, जब ईडी ने अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस और अन्य कंपनियों पर 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। येस बैंक के पूर्व प्रमोटर राणा कपूर के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया गया था, जिसमें रिलायंस ग्रुप ने बिना पर्याप्त कोलैटरल के भारी कर्ज लिया। ईडी का दावा है कि इस धोखाधड़ी से बैंकों को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अशोक कुमार पाल पर विशेष आरोप है कि उन्होंने रिलायंस पावर में फर्जी निवेशकों को नियुक्त करने और फंड्स को शेल कंपनियों में ट्रांसफर करने में सहयोग किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाल ने 2018-2020 के बीच कई ऐसी ट्रांजेक्शन को मंजूरी दी, जो अब जांच के दायरे में हैं। ईडी ने पाल के दिल्ली और मुंबई स्थित आवासों पर छापेमारी भी की, जहां से दस्तावेज, डिजिटल डेटा और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। इनमें से कुछ दस्तावेजों में अनिल अंबानी के हस्ताक्षर भी मिले हैं, हालांकि ग्रुप ने इनका खंडन किया है।

रिलायंस ग्रुप का पक्ष: ‘पूरी तरह निर्दोष’
रिलायंस पावर ने गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अशोक कुमार पाल पूरी तरह निर्दोष हैं और यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित लगती है। कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा, “हम ईडी की जांच में पूर्ण सहयोग कर रहे हैं। पाल साहब ने हमेशा पारदर्शी तरीके से काम किया है, और यह गिरफ्तारी बिना ठोस सबूत के की गई है। हम कानूनी सहायता लेंगे और अदालत में अपना पक्ष रखेंगे।” अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत रूप से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन ग्रुप के सूत्रों का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं।

इससे पहले, 2023 में ईडी ने रिलायंस ग्रुप के खिलाफ कई संपत्तियां जब्त की थीं, जिनमें मुंबई के ऑफिस स्पेस और शेयर शामिल थे। अनिल अंबानी, जो एक समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार थे, अब कर्ज के बोझ तले दबे हैं, और उनकी कंपनियां आईबीआर (इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के तहत पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।

वित्तीय अनियमितताओं का व्यापक प्रभाव:
यह गिरफ्तारी न केवल रिलायंस ग्रुप बल्कि पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक लोन फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, और ईडी की सख्ती से बड़े उद्योगपतियों पर नजर पड़ी है। वित्तीय विशेषज्ञ राजेश मेहता ने कहा, “यह मामला दिखाता है कि फंड डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार का रुख कड़ा हो गया है। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों को अब अपनी वित्तीय प्रक्रियाओं को और पारदर्शी बनाना होगा।”

इसके अलावा, येस बैंक के निवेशकों को भी इस मामले से झटका लगा है। बैंक, जो पहले ही संकट से जूझ चुका है, अब पुराने लोन फ्रॉड के कारण फिर से जांच के घेरे में आ गया है। स्टॉक मार्केट में रिलायंस पावर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जो 2% नीचे आ गए।

कानूनी प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाएं:
अशोक कुमार पाल को अब ईडी की कस्टडी में रखा गया है, और अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी। ईडी ने अदालत से अनुरोध किया है कि पाल से और गहन पूछताछ की जाए, क्योंकि उनके पास ग्रुप के वित्तीय सौदों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो पाल को 7 साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी।

इस मामले ने अनिल अंबानी की छवि पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। एक समय एशिया के सबसे धनी व्यक्ति रहे अंबानी अब कर्ज चुकाने के लिए संपत्तियां बेचने पर मजबूर हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईडी की जांच अब ग्रुप के अन्य अधिकारियों तक फैल सकती है।

समाज और अर्थव्यवस्था पर असर:
यह गिरफ्तारी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करती है। भारत की अर्थव्यवस्था, जो तेजी से बढ़ रही है, में ऐसे घोटालों से निवेशकों का भरोसा कम होता है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। उम्मीद है कि यह कार्रवाई अन्य कंपनियों के लिए सबक बनेगी और ईडी की जांच से सच्चाई सामने आएगी।

अशोक कुमार पाल की गिरफ्तारी रिलायंस ग्रुप के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता। मामले की अगली कड़ी पर नजरें टिकी हुई हैं।

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