by-Ravindra Sikarwar
लॉस एंजिल्स: एक दर्दनाक हादसे ने अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया निवासी 85 वर्षीय हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. असोका जयवीरा की कतर एयरवेज की लंबी दूरी की फ्लाइट के दौरान मौत हो गई। शाकाहारी आहार पसंद करने वाले जयवीरा को पहले से बुकिंग के दौरान शाकाहारी भोजन की मांग की थी, लेकिन चालक दल ने उन्हें मांस युक्त भोजन परोस दिया और मांस के टुकड़ों को नजरअंदाज कर खाने की सलाह दी। इससे वे घुटने लगे और अंततः फेफड़ों में संक्रमण (एस्पिरेशन निमोनिया) से उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद उनके बेटे ने एयरलाइन के खिलाफ लापरवाही और गलत मौत का मुकदमा दायर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि फ्लाइट को आपातकालीन लैंडिंग के लिए मोड़ने से इनकार कर दिया गया था। यह मामला न केवल आहार प्रतिबंधों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि उड़ान के दौरान चिकित्सा आपातकालीन प्रबंधन की कमियों को भी।
घटना का विस्तृत क्रम:
घटना 1 अगस्त, 2023 को हुई, जब डॉ. असोका जयवीरा कतर एयरवेज की फ्लाइट QR 739 पर लॉस एंजिल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट (LAX) से दोहा के हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DOH) के लिए रवाना हुए थे। उनका अंतिम गंतव्य श्रीलंका का कोलंबो था, जहां वे परिवार से मिलने जा रहे थे। जयवीरा ने 23 जून, 2023 को टिकट बुकिंग के समय स्पष्ट रूप से शाकाहारी भोजन का अनुरोध किया था, क्योंकि वे कट्टर शाकाहारी थे और धार्मिक कारणों से मांसाहारी भोजन से परहेज करते थे। फ्लाइट की अवधि लगभग 15.5 घंटे की थी, जो एयरबस A350 विमान से संचालित हो रही थी।
उड़ान के लगभग ढाई घंटे बाद, जब भोजन परोसने का समय आया, तो एक केबिन क्रू सदस्य ने जयवीरा को सूचित किया कि शाकाहारी भोजन उपलब्ध नहीं है। इसके बजाय, उन्हें एक सामान्य मांस-युक्त थाली (जिसमें चिकन बिरयानी या बीफ के साथ कूसकूस जैसे विकल्प शामिल थे) परोस दी गई। क्रू ने कथित तौर पर कहा, “मांस को छोड़कर बाकी चीजें खा लो,” जिसे “eat around the meat” के रूप में वर्णित किया गया है। जयवीरा, जो उम्र के कारण निगलने में पहले से ही कठिनाई महसूस कर रहे थे, ने थाली से मांस हटाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान वे किसी भोजन के टुकड़े पर घुटने लगे। मुकदमे के दस्तावेजों के अनुसार, यह घुटन तुरंत गंभीर हो गई, और वे बेहोश हो गए।
जयवीरा के साथ यात्रा कर रहे उनके साथी ने तुरंत चालक दल को सूचित किया। क्रू ने एरिजोना स्थित मेडएयर सेवा से संपर्क किया, जो विमानन चिकित्सा आपातकालीन सहायता प्रदान करती है। डॉक्टरों के दूरस्थ मार्गदर्शन के तहत जयवीरा को ऑक्सीजन दिया गया, लेकिन उनकी ऑक्सीजन संतृप्ति स्तर (SpO2) मात्र 69 प्रतिशत तक गिर गया, जो 88 प्रतिशत से नीचे होने पर अत्यंत खतरनाक माना जाता है। बाकी उड़ान के दौरान उनका स्तर कभी 85 प्रतिशत से ऊपर नहीं पहुंचा। मुकदमे में दावा किया गया है कि जयवीरा को लगभग 3.5 घंटे तक बेहोश रखा गया, और क्रू ने केवल बुनियादी उपचार ही प्रदान किया।
आपातकालीन लैंडिंग विवाद और मृत्यु का कारण:
घटना के समय फ्लाइट अमेरिकी मिडवेस्ट (विस्कॉन्सिन के ऊपर) से गुजर रही थी, जहां निकटतम हवाई अड्डे उपलब्ध थे। लेकिन पायलट ने कथित तौर पर जयवीरा के साथी को बताया कि विमान आर्कटिक सर्कल/ओशन के ऊपर उड़ रहा है, इसलिए इमरजेंसी लैंडिंग संभव नहीं है। मुकदमे के अनुसार, यह दावा गलत था, क्योंकि फ्लाइट डेटा से साबित होता है कि विमान अमेरिकी क्षेत्र में ही था और आसानी से मोड़ा जा सकता था। यदि समय पर लैंडिंग होती, तो शायद चिकित्सा सहायता मिल जाती।
फ्लाइट आठ घंटे बाद एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड के एयरपोर्ट पर उतरी, जहां जयवीरा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। 3 अगस्त, 2023 को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृत्यु का आधिकारिक कारण एस्पिरेशन निमोनिया बताया गया, जो तब होता है जब भोजन या तरल पदार्थ फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे संक्रमण फैलता है। यह स्थिति बुजुर्गों में विशेष रूप से घातक साबित होती है।
मुकदमा और एयरलाइन की लापरवाही के आरोप:
जयवीरा के बेटे सूर्या जयवीरा ने 31 जुलाई, 2023 को कैलिफोर्निया राज्य अदालत में मुकदमा दायर किया, जो बाद में 3 अक्टूबर को सेंट्रल कैलिफोर्निया फेडरल कोर्ट में स्थानांतरित हो गया। मुकदमे में कतर एयरवेज पर लापरवाही, गलत मौत और अनुबंध उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। सूर्या का दावा है कि एयरलाइन ने पहले से बुक शाकाहारी भोजन प्रदान नहीं किया, चालक दल ने आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, और फ्लाइट को जानबूझकर मोड़ा नहीं गया। मुकदमे में मांग की गई है कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत मृत्यु के लिए लगभग 1,75,000 डॉलर का मुआवजा दिया जाए।
कतर एयरवेज की वेबसाइट पर 19 विशेष भोजन विकल्पों का उल्लेख है, जिनमें 7 शाकाहारी विकल्प शामिल हैं, जो धार्मिक या आहार संबंधी जरूरतों के लिए डिजाइन किए गए हैं। लेकिन इस घटना ने एयरलाइन की कैटरिंग लॉजिस्टिक्स और स्टॉक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। एयरलाइन ने अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
पृष्ठभूमि: जयवीरा का जीवन और यात्रा का उद्देश्य:
डॉ. असोका जयवीरा एक अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ थे, जो दक्षिणी कैलिफोर्निया में रहते थे। वे श्रीलंका मूल के थे और परिवार के साथ मजबूत बंधन रखते थे। इस यात्रा का उद्देश्य श्रीलंका में रिश्तेदारों से मिलना था, जो उनके लिए एक खुशी का अवसर था। सूर्या ने बताया कि उनके पिता उम्र के बावजूद सक्रिय थे, लेकिन निगलने की समस्या पहले से थी, जिसके कारण वे सतर्क रहते थे। यह घटना उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
वैश्विक संदर्भ: विमानन में आहार और एलर्जी संबंधी समस्याएं
यह घटना विमानन उद्योग में आहार प्रतिबंधों और चिकित्सा आपातकालीन प्रबंधन की बढ़ती चुनौतियों को रेखांकित करती है। अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुसार, एयरलाइंस को अग्रिम सूचना पर विशेष भोजन और चिकित्सा जरूरतों को पूरा करना होता है। लेकिन लंबी दूरी की फ्लाइट्स में स्टॉक की कमी या लॉजिस्टिक्स त्रुटियां आम हैं।
हाल ही में इसी साल, सिंगापुर एयरलाइंस की एक फ्लाइट (फ्रैंकफर्ट से न्यूयॉर्क) को शेलफिश एलर्जी वाले यात्री की बीमारी पर पेरिस में उतारना पड़ा। कतर एयरवेज के साथ भी समान शिकायतें आई हैं—ब्रिटिश रियलिटी स्टार जैक फाउलर ने दो बार नट्स एलर्जी के बावजूद मिसलीबल्ड भोजन परोसने का आरोप लगाया, जिससे उनकी जान को खतरा हुआ। ये घटनाएं एयरलाइंस पर दबाव बढ़ा रही हैं कि वे बेहतर ट्रेनिंग, स्टॉक चेक और इमरजेंसी डायवर्शन प्रोटोकॉल अपनाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शाकाहारी या एलर्जी वाले यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, और एयरलाइंस को डिजिटल बुकिंग सिस्टम से जुड़ी कैटरिंग सुनिश्चित करनी चाहिए।
निष्कर्ष: परिवार की मांग और सबक
सूर्या जयवीरा ने कहा, “मेरे पिता की मौत अनावश्यक थी। यदि एयरलाइन ने सरल कदम उठाए होते, तो वे आज हमारे साथ होते।” यह मुकदमा न केवल न्याय की मांग करता है, बल्कि अन्य यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी। जैसे-जैसे अदालती कार्यवाही आगे बढ़ेगी, अधिक खुलासे होंगे। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि बुकिंग के समय आहार अनुरोध दोहराएं और उड़ान से पहले चालक दल को सूचित करें। यह त्रासदी विमानन कंपनियों को याद दिलाती है कि एक छोटी सी लापरवाही जीवन ले सकती है।
