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by-Ravindra Sikarwar

नाशिक: महाराष्ट्र के नाशिक शहर में एक ऐसी भयावह घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। मंगलवार रात (7 अक्टूबर, 2025) को शिवाजीनगर क्षेत्र के जेल रोड पर एक 58 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी 80 वर्षीय बुजुर्ग मां की गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी का दावा है कि उसने यह कृत्य ‘बोरियत’ (उबाऊपन) के कारण किया। हत्या के तुरंत बाद आरोपी ने खुद नाशिक रोड पुलिस स्टेशन पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की मानसिक स्थिति की जांच के लिए चिकित्सकीय परीक्षण का आदेश दिया है। यह घटना परिवार में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक अलगाव की गहराई को उजागर करती है।

घटना का क्रमबद्ध विवरण:
घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे के आसपास घटी। आरोपी अरविंद मुरलीधर पाटिल, जिन्हें स्थानीय स्तर पर बालू पाटिल के नाम से जाना जाता है, अपनी मां यशोदाबाई मुरलीधर पाटिल के साथ जेल रोड स्थित एक छोटे से घर में रहते थे। परिवार के अन्य सदस्यों के अनुसार, अरविंद लंबे समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे। रात को जब यशोदाबाई सो रही थीं, अरविंद ने अचानक उनका गला दबा दिया। पड़ोसियों ने बताया कि घर से कोई चीखने की आवाज नहीं आई, जिससे लगता है कि हमला सोते समय किया गया। हत्या के बाद अरविंद ने शव को घर में ही छोड़ दिया और सीधे नाशिक रोड पुलिस स्टेशन की ओर चल पड़े।

थाने पहुंचते ही अरविंद ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बताया, “मैंने अपनी मां को मार डाला है क्योंकि मुझे बोर हो रहा था।” यह कबूलनामा इतना चौंकाने वाला था कि पुलिसकर्मी तुरंत सतर्क हो गए। उन्होंने अरविंद को हिरासत में लिया और एक टीम को घटनास्थल पर भेजा। वहां पहुंचकर पुलिस ने यशोदाबाई के शव को बरामद किया, जिस पर गले के आसपास निशान साफ दिखाई दे रहे थे। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए नाशिक के सिविल अस्पताल भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि हो चुकी है, और कोई अन्य चोट के निशान नहीं मिले।

आरोपी का पारिवारिक और व्यक्तिगत इतिहास:
अरविंद की उम्र 58 वर्ष है, और वह विवाहित हैं। लेकिन उनकी पत्नी ने कुछ वर्ष पहले उनकी बिगड़ती मानसिक स्थिति के कारण उन्हें छोड़ दिया था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अरविंद अकेलेपन से जूझ रहे थे और अक्सर असामान्य व्यवहार करते थे। वे कभी-कभी घर से बाहर घूमते रहते और बिना वजह गुस्सा दिखाते। परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं था, जो उनकी देखभाल कर सके। एक पड़ोसी ने बताया, “अरविंद को पहले से ही मानसिक समस्या थी। वे दवाइयां लेते थे, लेकिन नियमित चेकअप नहीं कराते थे। यशोदाबाई अकेली उनकी देखभाल करती थीं, लेकिन हाल ही में उनकी सेहत भी कमजोर हो गई थी।”

पुलिस सूत्रों का कहना है कि अरविंद का ‘बोरियत’ का दावा उनकी मानसिक अस्थिरता को दर्शाता है। वे रोजगाररत नहीं थे और दिनभर घर पर ही रहते थे। घटना से पहले भी वे मां से छोटे-मोटे झगड़े करते थे, लेकिन इतनी हिंसा की कोई कल्पना नहीं की गई थी। पुलिस ने आरोपी के चचेरे भाई और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की है, जो बताते हैं कि अरविंद को बचपन से ही तनावपूर्ण जीवन जीना पड़ा था।

पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया:
नाशिक रोड पुलिस स्टेशन के प्रभारी ने बताया कि अरविंद के आत्मसमर्पण के आधार पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और उनकी मानसिक स्थिति की जांच के लिए मनोचिकित्सक की सलाह ली जा रही है। पुलिस ने घर की तलाशी ली, जहां से कोई हथियार या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य संग्रहित किए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह एक दुखद घटना है। आरोपी की मानसिक बीमारी की पुष्टि होने पर हम अदालत को सूचित करेंगे। फिलहाल, हम पूर्ण जांच कर रहे हैं ताकि कोई अन्य पहलू सामने न आए।” पड़ोसियों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन उन्होंने इलाके में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की मांग की।

सामाजिक प्रभाव और मानसिक स्वास्थ्य पर बहस:
यह घटना महाराष्ट्र में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को रेखांकित करती है। राज्य में हर साल सैकड़ों पारिवारिक हिंसा के मामले सामने आते हैं, जिनमें मानसिक तनाव एक प्रमुख कारक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन और बेरोजगारी जैसी समस्याएं बुजुर्गों और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। एक स्थानीय एनजीओ ने बताया कि नाशिक जैसे शहरों में काउंसलिंग सेंटरों की कमी है, जिससे ऐसी त्रासदियां बढ़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर इस घटना ने व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जहां लोग इसे ‘बोरियत’ के बजाय गहरी मनोवैज्ञानिक समस्या का परिणाम बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ बोरियत नहीं, बल्कि अनदेखी मानसिक बीमारी का नतीजा है। समाज को जागरूक होना होगा।” परिवार के सदस्यों ने यशोदाबाई को एक समर्पित मां के रूप में याद किया, जो बेटे की देखभाल में लगी रहती थीं।

निष्कर्ष: सबक और सावधानियां:
यह हृदयविदारक घटना न केवल एक परिवार को बर्बाद कर गई, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि मानसिक स्वास्थ्य को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति या परिवार मानसिक तनाव का शिकार हो, तो तुरंत हेल्पलाइन 104 या स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। जांच के नतीजे आने पर और विवरण सामने आएंगे, लेकिन उम्मीद है कि यह घटना अन्य परिवारों के लिए चेतावनी बनेगी और मानसिक सहायता प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।