by-Ravindra Sikarwar
मुंबई: एक प्रमुख निजी कंपनी ने अपने कर्मचारियों से आगामी दीवाली उत्सव के आयोजन के लिए प्रति व्यक्ति 1200 रुपये का योगदान मांगा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की लहर दौड़ गई है। यह घोषणा कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग द्वारा एक आधिकारिक ईमेल के माध्यम से की गई, जिसमें कहा गया कि यह राशि भव्य दीवाली समारोह, जिसमें भोजन, मनोरंजन और सजावट शामिल हैं, के खर्चों को कवर करने के लिए आवश्यक है। हालांकि, कई कर्मचारियों ने इस निर्णय को अनुचित ठहराया है और इसे लेकर सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
घोषणा का विवरण:
कंपनी, जिसका नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, ने अपने 500 से अधिक कर्मचारियों को सूचित किया कि दीवाली उत्सव 25 अक्टूबर, 2025 को मुंबई के एक प्रमुख बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया जाएगा। ईमेल में बताया गया कि इस आयोजन में लाइव संगीत, नृत्य प्रदर्शन, स्वादिष्ट भोजन और आकर्षक सजावट की व्यवस्था होगी। साथ ही, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए पुरस्कार और उपहार वितरण का भी आयोजन किया जाएगा। लेकिन इस भव्य आयोजन का खर्च उठाने के लिए, कंपनी ने प्रत्येक कर्मचारी से 1200 रुपये का अनिवार्य योगदान देने को कहा है।
एचआर विभाग ने अपने संदेश में दावा किया कि यह योगदान “सामूहिक उत्सव की भावना को बढ़ावा देने” और “सभी के लिए एक यादगार अनुभव सुनिश्चित करने” के लिए जरूरी है। ईमेल में यह भी उल्लेख किया गया कि जो कर्मचारी इस राशि का भुगतान करने में असमर्थ हैं, वे एचआर विभाग से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया को अस्पष्ट और अपमानजनक बताया गया है।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया:
कंपनी के इस फैसले ने कर्मचारियों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। कई कर्मचारियों ने इसे अनुचित और जबरदस्ती का कदम बताया है। एक कर्मचारी, जिन्होंने गोपनीयता की शर्त पर बात की, ने कहा, “हमें पहले ही वेतन वृद्धि में कटौती और अतिरिक्त काम का बोझ झेलना पड़ रहा है। अब कंपनी हमसे उत्सव के लिए पैसे मांग रही है, जो पहले मुफ्त हुआ करता था। यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।”
सोशल मीडिया, विशेष रूप से एक्स प्लेटफॉर्म पर, कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। एक कर्मचारी ने पोस्ट किया, “दीवाली एक खुशी का त्योहार है, लेकिन कंपनी इसे तनाव का कारण बना रही है। 1200 रुपये कोई छोटी राशि नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही आर्थिक तंगी में हैं।” एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, “क्या यह वाकई उत्सव है या कंपनी का लागत बचाने का तरीका?”
कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में दीवाली उत्सव पूरी तरह से कंपनी द्वारा प्रायोजित था, और कर्मचारियों को कोई योगदान नहीं देना पड़ता था। इस बदलाव ने कई लोगों को आश्चर्यचकित किया है, क्योंकि कंपनी ने हाल ही में अपने तिमाही मुनाफे में वृद्धि की घोषणा की थी।
कंपनी का पक्ष:
कंपनी के एक प्रवक्ता ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि बढ़ती लागत और आयोजन की भव्यता को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों का योगदान आवश्यक है। प्रवक्ता ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह दीवाली उत्सव हमारे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव हो। योगदान की राशि को न्यूनतम रखा गया है ताकि सभी इसका हिस्सा बन सकें।” हालांकि, प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कंपनी इस आयोजन के लिए कितना खर्च वहन कर रही है या कुल बजट कितना है।
व्यापक प्रभाव:
यह घटना केवल इस कंपनी तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में, कई संगठनों ने आर्थिक दबाव के कारण कर्मचारी कल्याण कार्यक्रमों और उत्सवों के खर्च को कम करने की कोशिश की है। कुछ कंपनियों ने त्योहारों के आयोजन को पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि अन्य ने कर्मचारियों से योगदान मांगना शुरू कर दिया है। यह प्रवृत्ति कर्मचारी मनोबल और कार्यस्थल की संतुष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
श्रम कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक योगदान अनिवार्य नहीं है, यह कानूनी रूप से स्वीकार्य है। हालांकि, अगर कर्मचारियों पर दबाव डाला जाता है या गैर-भागीदारी के लिए नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं, तो यह श्रम नियमों का उल्लंघन हो सकता है। एक विशेषज्ञ ने कहा, “कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे योगदान स्वैच्छिक हों और कर्मचारियों पर अनुचित दबाव न डाला जाए।”
निष्कर्ष:
यह विवाद दीवाली जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों के आयोजन में कॉर्पोरेट जवाबदेही और कर्मचारी कल्याण के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है। कर्मचारियों का मानना है कि कंपनी को इस तरह के आयोजनों को प्रायोजित करना चाहिए, खासकर तब जब वह मुनाफा कमा रही हो। दूसरी ओर, कंपनी का तर्क है कि कर्मचारियों का योगदान सामूहिक उत्सव को और बेहतर बनाएगा।
जैसे-जैसे दीवाली नजदीक आ रही है, कर्मचारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या वे इस योगदान को देना चाहेंगे या इस आयोजन का बहिष्कार करेंगे। यह स्थिति न केवल इस कंपनी, बल्कि अन्य संगठनों के लिए भी एक सबक हो सकती है कि कर्मचारी संतुष्टि और उत्सव की भावना को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है।
