by-Ravindra Sikarwar
भारत जल्द ही UPI (Unified Payments Interface) लेन–देनों के लिए पारंपरिक PIN (पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर) को एक विकल्प के रूप में छोड़ते हुए बायोमेट्रिक (जैसे कि चेहरे की पहचान और फिंगरप्रिंट) प्रमाणन लागू करने वाला है।
योजना और समयसीमा:
- यह सुविधा 8 अक्टूबर 2025 से लागू होने की संभावना है।
- इसे लॉन्च करते समय NPCI (National Payments Corporation of India), जो UPI को संचालित करती है, इस नवप्रवर्तन को Global Fintech Festival (मुंबई) में प्रस्तुत करेगी।
- इस कदम के पीछे RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) की नई दिशानिर्देशें हैं, जो डिजिटल भुगतान में वैकल्पिक प्रमाणीकरण पद्धतियों को स्वीकार करने की अनुमति देती हैं।
कैसे काम करेगा सिस्टम:
- उपयोगकर्ता जब कोई UPI लेनदेन करते हैं, तो वे PIN डालने की बजाय फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे की पहचान (facial recognition) से लेनदेन को अधिकृत कर सकेंगे।
- इसके लिए बायोमेट्रिक डाटा, जो पहले से ही आधार (Aadhaar) प्रणाली में संग्रहित है (फिंगरप्रिंट, चेहरे का फोटो आदि), उपयोग किया जाएगा।
- यह प्रमाणीकरण डिवाइस-आधारित होगा — यानि आपके स्मार्टफोन या डिवाइस में ही बायोमेट्रिक सेंसर (फिंगरप्रिंट सेंसर या कैमरा) का उपयोग किया जाएगा।
- इस विकल्प को उपयोगकर्ता वैकल्पिक (optional) रूप से चुन सकेंगे। यदि कोई उपयोगकर्ता चाहें, तो अभी की तरह PIN आधारित प्रमाणीकरण जारी रख सकते हैं।
प्रतिबंध और सुरक्षा प्रावधान:
- प्रारंभिक चरण में, इस विधि से की जाने वाली UPI लेनदेन की सीमा ₹5,000 तक सीमित होगी। बाद में इस सीमा की समीक्षा की जा सकती है।
- यदि किसी उपयोगकर्ता ने 90 दिनों तक बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग नहीं किया, तो उनकी सुविधा निष्क्रिय (inactive) मानी जाएगी और पुनः सक्रिय करने के लिए पुष्टि आवश्यक होगी।
- यदि उपयोगकर्ता अपना UPI PIN रीसेट करते हैं या डिवाइस बदलते हैं, तो बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण सुविधा को अनुकूलित करने के लिए नया अनुमोदन देना आवश्यक होगा।
- हर लेनदेन को संबंधित बैंक द्वारा स्वतंत्रता से क्रिप्टोग्राफिक चेक द्वारा सत्यापित किया जाएगा, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अपेक्षित प्रभाव और चुनौतियाँ:
फायदे:
- सुविधा में वृद्धि — विशेषकर उन लोगों के लिए जो PIN याद नहीं रख पाते या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में सहज नहीं हैं।
- सुरक्षा सुधार — PIN आधारित प्रणालियों में चोरी या फ़िशिंग का जोखिम अधिक होता है; बायोमेट्रिक जानकारी (चेहरा, अंगुली) कॉपी करना कठिन माना जाता है।
- डिजिटल समावेशन — ग्रामीण क्षेत्रों या डिजिटल नवागंतुकों के लिए भुगतान प्रक्रिया सरल होगी।
चुनौतियाँ और सावधानियाँ:
- सुनियोजित कार्यान्वयन — बैंकों, UPI ऐप्स और NPCI को इस बदलाव को सुचारू रूप से लागू करना होगा।
- गोपनीयता (Privacy) — बायोमेट्रिक डेटा संवेदनशील है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना प्रचार और मजबूत एन्क्रिप्शन की आवश्यकता होगी।
- सक्षम हार्डवेयर — हर डिवाइस में उपयुक्त चेहरे पहचान उपकरण या फिंगरप्रिंट सेंसर होना आवश्यक है।
- उपयोगकर्ता स्वीकृति — उपयोगकर्ता को स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिए कि उनका बायोमेट्रिक डेटा कैसे और किस उद्देश्य से उपयोग किया जाएगा।
