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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं—सेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच सबसे बड़े ड्रोन और काउंटर-ड्रोन युद्ध अभ्यास ‘एक्सरसाइज कोल्ड स्टार्ट’ आज मध्य प्रदेश में आरंभ हो रहा है। यह चार दिवसीय ड्रिल (7 से 10 अक्टूबर तक) राज्य के बबीना और म्होव सैन्य स्थानों पर आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य वर्तमान हवाई रक्षा प्रणालियों की प्रभावकारिता और कमियों का आकलन करना है। रक्षा मुख्यालय (एकीकृत रक्षा स्टाफ) के नेतृत्व में हो रही इस अभ्यास की निगरानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान कर रहे हैं, जो खुद इसमें शामिल होंगे। यह अभ्यास हाल ही में मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कार्रवाई से प्राप्त सबकों पर आधारित है, जहां ड्रोन युद्ध की भूमिका निर्णायक साबित हुई थी।

अभ्यास का उद्देश्य और महत्व:
‘कोल्ड स्टार्ट’ अभ्यास का मुख्य फोकस ड्रोन हमलों और उनके प्रतिकार की क्षमताओं को एकीकृत रूप से परखना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, जहां आक्रामक ड्रोन और रक्षात्मक उपायों के बीच एक निरंतर प्रतिस्पर्धा चल रही है। इस ड्रिल के माध्यम से सशस्त्र बल हवाई खतरों, जैसे दुश्मन ड्रोनों के घुसपैठ या हमलों, से निपटने की तैयारियों का परीक्षण करेंगे। अभ्यास के बाद प्राप्त निष्कर्षों को लागू कर सेनाएं भविष्य के संघर्षों के लिए अधिक मजबूत रणनीतियां तैयार करेंगी।

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह अभ्यास तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत करेगा, ताकि ड्रोन युद्ध में रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सके। ड्रोन न केवल निगरानी और हमले के लिए उपयोगी हैं, बल्कि काउंटर-ड्रोन सिस्टम दुश्मन की हवाई गतिविधियों को बेअसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” यह भारत की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां स्वदेशी और आयातित ड्रोन प्रौद्योगिकियों का एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।

भाग लेने वाली इकाइयां और निगरानी:
अभ्यास में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की विशेष इकाइयां शामिल हैं, जिनमें ड्रोन ऑपरेटर, काउंटर-ड्रोन विशेषज्ञ और हवाई रक्षा दस्ते प्रमुख हैं। एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) के निर्देशन में यह ड्रिल संचालित हो रही है, और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान व्यक्तिगत रूप से प्रगति की समीक्षा करेंगे। सेना की दक्षिणी कमांड, जो मध्य प्रदेश में स्थित है, इसकी स्थानीय समन्वयक भूमिका निभा रही है। अभ्यास के दौरान वास्तविक परिदृश्यों का अनुकरण किया जाएगा, जिसमें ड्रोन स्वार्म हमलों का सामना और उनके निष्प्रभावीकरण शामिल है।

स्थान और समयावधि:
मध्य प्रदेश के बबीना (झांसी के निकट) और म्होव (इंदौर के पास) सैन्य अभ्यास क्षेत्रों को चुना गया है, क्योंकि ये स्थान हवाई अभ्यासों के लिए आदर्श हैं—विस्तृत इलाके, उन्नत सुविधाएं और रणनीतिक महत्व। अभ्यास कल (7 अक्टूबर) से शुरू हो चुका है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान आसपास के इलाकों में हवाई गतिविधियां बढ़ेंगी, लेकिन नागरिकों को कोई खतरा नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा उपाय सख्त कर दिए हैं, और अभ्यास क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है।

शामिल प्रौद्योगिकियां:
अभ्यास में स्वदेशी ड्रोन जैसे ‘स्वुप्त’ और ‘रुस्तम’ श्रृंखला, साथ ही आयातित मॉडल्स का उपयोग होगा। काउंटर-ड्रोन सिस्टम में जामिंग डिवाइस, लेजर-आधारित हथियार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण शामिल हैं, जो ड्रोन सिग्नलों को बाधित कर उन्हें गिराने में सक्षम हैं। ड्रोन स्वार्म (एक साथ कई ड्रोनों का हमला) के खिलाफ एकीकृत रक्षा प्रणालियों का परीक्षण प्रमुख होगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नई तकनीकों को भी यहां प्रदर्शित किया जाएगा, जो भारत को ड्रोन युद्ध में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगदान देंगी।

ऐतिहासिक संदर्भ: ऑपरेशन सिंदूर से सबक
यह अभ्यास मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (6 से 10 मई) से प्रेरित है, जो ड्रोन युद्ध का पहला बड़ा उदाहरण था। इस कार्रवाई में भारतीय ड्रोनों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए, जबकि पाकिस्तान के तुर्की और चीनी ड्रोनों को भारतीय काउंटर-मेजर्स ने निष्फल कर दिया। इस संचालन ने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता की आवश्यकता को रेखांकित किया, और ‘कोल्ड स्टार्ट’ उसी की निरंतरता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभ्यास भारत को क्षेत्रीय खतरों, खासकर सीमा पार ड्रोन घुसपैठ से निपटने में सक्षम बनाएंगे।

यह अभ्यास न केवल सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की रक्षा नीतियों में ड्रोन प्रौद्योगिकी को केंद्रीय स्थान प्रदान करेगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अभ्यास के नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मध्य प्रदेश सरकार ने स्थानीय सहयोग का आश्वासन दिया है, और अभ्यास के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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