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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट परिसर में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भालचंद्र रविंद्र गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सीजेआई से फोन पर बात की और इस कृत्य को “निंदनीय” बताते हुए कहा कि इससे “हर भारतीय आक्रोशित है।” उन्होंने सीजेआई की संयमित प्रतिक्रिया की सराहना की, जो न्याय के मूल्यों और संवैधानिक भावना को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। घटना के कुछ ही घंटों बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आरोपी वकील राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। राजनीतिक दलों और कानूनी संगठनों ने भी इस हमले की एकसुर से निंदा की, इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया।

यह घटना सोमवार सुबह करीब 11:35 बजे सुप्रीम कोर्ट की अदालत नंबर 1 में घटी, जब सीजेआई गवई की अध्यक्षता वाली बेंच विभिन्न मामलों की सुनवाई कर रही थी। 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर, जो सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सदस्य हैं, अचानक बेंच के निकट पहुंचे। उन्होंने अपना स्पोर्ट्स जूता उतारकर सीजेआई की ओर फेंकने का प्रयास किया और नारा लगाया, “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” जूता सीजेआई को नहीं लगा, बल्कि बेंच के पास गिर गया। किशोर ने बाद में स्वीकार किया कि उनका इरादा सीजेआई पर ही था।

सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और किशोर को बाहर ले जाकर हिरासत में लिया। पूरे कक्ष में क्षण भर के लिए सन्नाटा छा गया, लेकिन सीजेआई गवई ने पूर्ण संयम बरता। उन्होंने वकीलों से कहा, “इन बातों से विचलित न हों। हम इससे प्रभावित नहीं हो रहे। कृपया अपनी बहस जारी रखें।” उनकी यह शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया ने स्थिति को जल्दी नियंत्रित कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की मंजूरी के बाद किशोर को रिहा कर दिया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनकी जिरह की और उनके पास से एक नोट बरामद किया, जिसमें लिखा था: “मेरा संदेश हर सनातनी के लिए है… सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”

यह हमला सीजेआई गवई की हालिया टिप्पणियों से जुड़ा माना जा रहा है। सितंबर में एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान, मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर में क्षतिग्रस्त भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई ने कहा था, “यह पूरी तरह प्रचार का मामला लगता है। अब जाकर खुद देवता से कहो कि वह कुछ करे।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई धार्मिक संगठनों तथा नेताओं ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया। लगभग दो दिनों तक चली सोशल मीडिया बहस के बाद सीजेआई ने खुली अदालत में स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और “सच्चा धर्मनिरपेक्षता” में विश्वास रखते हैं। किशोर की नाराजगी इसी विवाद से प्रेरित बताई जा रही है, जो एक वरिष्ठ वकील के रूप में लंबे समय से सक्रिय हैं।

घटना के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सीजेआई गवई से फोन पर बात की। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “मुख्य न्यायाधीश भारत, जस्टिस बीआर गवई जी से बात की। आज सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुआ हमला हर भारतीय को आक्रोशित कर गया है। हमारी समाज में ऐसी निंदनीय घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। यह पूरी तरह निंदनीय है।” उन्होंने आगे कहा, “ऐसी स्थिति में जस्टिस गवई द्वारा दिखाई गई शांति की सराहना करता हूं। यह न्याय के मूल्यों और हमारी संवैधानिक भावना को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करता है।” मोदी की यह प्रतिक्रिया न केवल हमले की निंदा करती है, बल्कि न्यायपालिका के प्रति सरकार के समर्थन को भी रेखांकित करती है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा, धमकी या न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राकेश किशोर दिल्ली के मयूर विहार के निवासी हैं और 2009 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) से पंजीकृत (पंजीकरण संख्या D/1647/2009) हैं। वे सुप्रीम कोर्ट में नियमित रूप से प्रैक्टिस करते हैं। घटना के कुछ घंटों बाद ही बीसीआई ने उन्हें तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी किया। बीसीआई अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने आदेश में कहा, “आपने सुप्रीम कोर्ट की अदालत नंबर 1 में चल रही कार्यवाही के दौरान अपना स्पोर्ट्स जूता उतारकर मुख्य न्यायाधीश की ओर फेंकने का प्रयास किया, जो अदालत की गरिमा और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 तथा बीसीआई नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।” किशोर को 15 दिनों में कारण बताने का नोटिस दिया गया है। यह निलंबन सभी अदालतों, ट्रिब्यूनलों और कानूनी संस्थाओं में उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगाता है।

यह घटना राजनीतिक दलों के बीच एकजुटता का प्रतीक बनी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “यह हमला संविधान पर प्रहार है और समाज में फैले नफरत, कट्टरता तथा संकीर्णता को दर्शाता है।” सोनिया गांधी ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह एक ऐसे व्यक्ति पर हमला है, जिन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़कर संविधान की रक्षा की। राहुल गांधी ने इसे “नफरत संस्कृति” का परिणाम बताया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, केरल के सीएम पिनाराई विजयन और कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया समेत अन्य नेताओं ने भी निंदा की। सीपीएम ने इसे भाजपा की सांप्रदायिक बयानबाजी से जोड़ा।

कानूनी संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि यह वकील का अनुचित आचरण है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को चुनौती देता है। एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (स्काओरा) ने इसे “अभूतपूर्व और शर्मनाक” बताते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर #JusticeForCJI और #ProtectJudiciary जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग सीजेआई की शांति की तारीफ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर गलत व्याख्या ने इस घटना को भड़काया।

सीजेआई गवई ने घटना के बाद कहा, “ये बातें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” लंच ब्रेक के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल, सुरक्षा प्रमुख और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। सीजेआई को जेड-प्लस सुरक्षा कवर प्राप्त है, जो दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदान की जाती है। अदालत कक्षों में प्रवेश पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए।

सीजेआई गवई पर यह हमला भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक काला धब्बा है, जो धार्मिक संवेदनशीलता, सोशल मीडिया की गलत सूचनाओं और अदालती आचरण के बीच संतुलन की चुनौतियों को उजागर करता है। प्रधानमंत्री मोदी की त्वरित प्रतिक्रिया और राजनीतिक एकजुटता ने स्थिति को मजबूत बनाया, लेकिन यह घटना न्यायपालिका की सुरक्षा और वकीलों के प्रशिक्षण पर पुनर्विचार की मांग करती है। बीसीआई की अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद अंतिम निर्णय आएगा, लेकिन फिलहाल निलंबन से किशोर की प्रैक्टिस पूरी तरह रुक गई है। यह प्रकरण सभी को याद दिलाता है कि अदालतें कानून का मंदिर हैं, जहां भावनाओं को न्याय के ऊपर कभी वरीयता नहीं मिलनी चाहिए। उम्मीद है कि इससे सीख लेकर ऐसी विडंबनाएं टाली जा सकेंगी, और न्यायपालिका की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहेगी।

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