Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की अदालत नंबर 1 में सोमवार सुबह एक अभूतपूर्व घटना ने पूरे न्यायिक जगत को हिला दिया। 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भालचंद्र रविंद्र गवई पर अपना स्पोर्ट्स जूता फेंकने का प्रयास किया, जो खजुराहो मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्स्थापन की याचिका पर सीजेआई की टिप्पणियों से नाराजगी का परिणाम था। हालांकि जूता सीजेआई को नहीं लगा, लेकिन इस कृत्य ने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। घटना के कुछ ही घंटों बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जिससे वे देशभर की किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल या कानूनी संस्था में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। यह घटना न केवल न्यायपालिका की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि वकीलों के आचरण को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ रही है।

घटना का पूरा विवरण: अदालत में हंगामा और नारा
यह घटना सोमवार सुबह करीब 11:35 बजे हुई, जब सीजेआई गवई की अध्यक्षता वाली बेंच विभिन्न मामलों के उल्लेख (मेंशनिंग) की सुनवाई कर रही थी। अचानक राकेश किशोर, जो सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पंजीकृत सदस्य हैं, बेंच के पास पहुंचे। उन्होंने अपने जूते उतारे और सीजेआई की ओर फेंकने का प्रयास किया, साथ ही नारा लगाया, “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”। जूता जस्टिस चंद्रन के पास गिर गया, लेकिन सीजेआई को चोट नहीं लगी। किशोर ने बाद में स्वीकार किया कि उनका इरादा सीजेआई पर ही था और उन्होंने जस्टिस चंद्रन से माफी मांगी।

सुरक्षा कर्मियों ने फौरन हस्तक्षेप किया और किशोर को बाहर निकाल लिया। पूरे कक्ष में सन्नाटा छा गया, लेकिन सीजेआई गवई ने शांति बनाए रखी। उन्होंने वकीलों से कहा, “इससे विचलित न हों। हम इससे विचलित नहीं हो रहे। आप आगे मामले की बहस जारी रखें।” उनकी यह संयमित प्रतिक्रिया ने पूरे घटना को कुछ ही मिनटों में संभाल लिया। एक वकील ने बताया कि किशोर ने जूता फेंकते समय धार्मिक भावनाओं का हवाला दिया, जो सीजेआई की हालिया टिप्पणियों से जुड़ा था।

पृष्ठभूमि: खजुराहो मामले पर टिप्पणियों से उपजी नाराजगी
यह घटना सीजेआई गवई की सितंबर में की गई टिप्पणियों से जुड़ी है। एक जनहित याचिका (पीआईएल) में मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर के जावरी मंदिर में क्षतिग्रस्त सात फुट ऊंची भगवान विष्णु की मूर्ति को बहाल करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की, “यह पूरी तरह से प्रचार का मामला है। अब जाकर खुद देवता से कहो कि वह कुछ करे।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और धार्मिक संगठनों तथा नेताओं ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया। कई लोगों ने सीजेआई की आलोचना की, जबकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। किशोर की नाराजगी इसी से उपजी बताई जा रही है, जो एक वरिष्ठ वकील के रूप में लंबे समय से बार एसोसिएशनों से जुड़े हैं।

आरोपी की पहचान: दिल्ली के मयूर विहार निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता
राकेश किशोर दिल्ली के मयूर विहार क्षेत्र के निवासी हैं और 2009 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) के साथ पंजीकृत हुए (पंजीकरण संख्या D/1647/2009)। वे सुप्रीम कोर्ट में नियमित प्रैक्टिस करते हैं और कानूनी भाईचारे में अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। पुलिस स्रोतों के अनुसार, उन्हें दिल्ली पुलिस की सुरक्षा इकाई और नई दिल्ली जिले के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (नई दिल्ली) और सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा जोन के वरिष्ठ अधिकारी ने जांच की। किशोर को रजिस्ट्रार जनरल की मंजूरी के बाद ही रिहा किया गया, लेकिन उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

बार काउंसिल की त्वरित कार्रवाई: निलंबन और अनुशासनात्मक प्रक्रिया
घटना के कुछ ही घंटों बाद बीसीआई ने किशोर को तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी किया। बीसीआई चेयरपर्सन और सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने आदेश में कहा, “आपने सुप्रीम कोर्ट की अदालत नंबर 1 में चल रही कार्यवाही के दौरान अपने स्पोर्ट्स जूते उतारकर मुख्य न्यायाधीश की ओर फेंकने का प्रयास किया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने आपको हिरासत में लिया। यह आचरण अदालत की गरिमा और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियमों (चैप्टर II, पार्ट VI, सेक्शन I, नियम 1, 2 और 3) का स्पष्ट उल्लंघन है।”

नियमों के तहत वकीलों को न्यायपालिका के प्रति सम्मान बनाए रखना, गरिमा का पालन करना और किसी भी अनुचित कृत्य से बचना अनिवार्य है। बीसीआई ने किशोर को 15 दिनों के अंदर कारण बताने का नोटिस जारी किया है, ताकि निलंबन को आगे बढ़ाया जाए या अन्य कार्रवाई हो। आदेश को सुप्रीम कोर्ट, सभी हाई कोर्ट्स, जिला कोर्ट्स और बार एसोसिएशंस को प्रसारित करने का निर्देश दिया गया है। बीसीडी को किशोर का दर्जा अपडेट करने और सभी अदालतों को सूचित करने को कहा गया। यह निलंबन अस्थायी है, लेकिन सामान्य कानून या एडवोकेट्स एक्ट के तहत अन्य कार्यवाहियों को प्रभावित नहीं करेगा।

सीजेआई गवई की प्रतिक्रिया और सुरक्षा समीक्षा:
सीजेआई गवई ने घटना के बाद कहा, “ये बातें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” लंच ब्रेक के दौरान उन्होंने सेक्रेटरी जनरल, सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा प्रमुख और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल्स को सख्त करने पर चर्चा हुई। सीजेआई को जेड प्लस सुरक्षा कवर मिला हुआ है, जो दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी डिवीजन द्वारा प्रदान की जाती है। सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में भी चर्चा हुई कि अदालत कक्षों में प्रवेश पर और सतर्कता बरती जाए।

कानूनी जगत और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं:
यह घटना कानूनी समुदाय में व्यापक निंदा का विषय बनी। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (स्काओरा) ने इसे “अभूतपूर्व और शर्मनाक” बताते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की। बीसीआई चेयरपर्सन मिश्रा ने कहा कि यह अदालत की गरिमा के विरुद्ध है। सोशल मीडिया पर #JusticeForCJI और #CourtDignity जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग किशोर की कार्रवाई को गलत ठहरा रहे हैं। कुछ ने इसे धार्मिक भावनाओं का अतिरंजित रूप बताया, जबकि अन्य ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमले का नाम दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना वकीलों के प्रशिक्षण और आचार संहिता को मजबूत करने की जरूरत बताती है।

निष्कर्ष: न्यायिक गरिमा की रक्षा का संकल्प
राकेश किशोर की यह कृत्य भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक काला अध्याय जोड़ता है, जो धार्मिक संवेदनशीलता और अदालती आचरण के बीच संतुलन की चुनौतियों को उजागर करता है। सीजेआई गवई का संयम और बीसीआई की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन यह घटना सुरक्षा और नैतिकता पर पुनर्विचार की मांग करती है। अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद अंतिम फैसला आएगा, लेकिन फिलहाल निलंबन से किशोर की प्रैक्टिस पर पूर्ण रोक लग गई है। यह प्रकरण सभी हितधारकों को याद दिलाता है कि अदालतें केवल कानून का मंदिर हैं, जहां भावनाओं को न्याय के ऊपर कभी प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए। उम्मीद है कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी विडंबनाएं टाली जा सकेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *