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by-Ravindra Sikarwar

तेल अवीव/स्टॉकहोम: स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग के साथ इजरायली हिरासत में कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। गाजा के लिए मानवीय सहायता ले जा रहे एक बेड़े को इजरायली सेना द्वारा रोकने के बाद थुनबर्ग सहित करीब 450 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। अब रिहा हुए कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि थुनबर्ग को बालों से घसीटा गया, पीटा गया और इजरायली झंडे को चूमने या पहनने के लिए मजबूर किया गया। ये आरोप इजरायल द्वारा सिरे से खारिज कर दिए गए हैं, जिन्होंने इन्हें ‘पूर्णतः झूठे’ करार दिया है। यह घटना गाजा पर इजरायल की नौसैनिक नाकाबंदी को चुनौती देने वाली इस पहल को और जटिल बना रही है, जहां सहायता की कमी से भुखमरी जैसी स्थिति बनी हुई है।

घटना की पृष्ठभूमि: गाजा सहायता बेड़े का इंटरसेप्शन
यह विवाद ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ (जीएसएफ) नामक अभियान से जुड़ा है, जिसमें 40 से अधिक नावों का एक बेड़ा गाजा की ओर बढ़ रहा था। इस बेड़े का उद्देश्य इजरायल की 16 वर्ष पुरानी समुद्री नाकाबंदी तोड़ना और प्रतीकात्मक रूप से सहायता सामग्री पहुंचाना था। सहायता में चिकित्सा सामग्री, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। थुनबर्ग सहित कार्यकर्ता, सांसद और वकील इस अभियान का हिस्सा थे, जिसमें नेल्सन मंडेला के पोते मंडला मंडेला भी शामिल थे।

अगस्त के अंत में रवाना हुए इस बेड़े को 2 अक्टूबर 2025 को इजरायली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जल में रोक लिया। इजरायली विदेश मंत्रालय ने इसे ‘सेल्फी यॉट’ करार देते हुए प्रचार स्टंट बताया, लेकिन थुनबर्ग ने बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसका खंडन किया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई अपनी जान जोखिम में डालकर केवल प्रचार के लिए ऐसा करेगा।” इजरायली सेना ने सभी नावों को जब्त कर लिया और यात्रियों को हिरासत में ले लिया। वीडियो फुटेज में थुनबर्ग को नाव पर बैठे हुए दिखाया गया, जहां इजरायली सैनिक उन्हें पानी और जैकेट दे रहे थे। हालांकि, बाद में हिरासत की स्थितियों पर गंभीर आरोप लगे।

कार्यकर्ताओं के आरोप: थुनबर्ग के साथ दुर्व्यवहार का विस्तृत विवरण
रिहा हुए कार्यकर्ताओं ने इजरायली हिरासत में अमानवीय व्यवहार का खुलासा किया है। 4 अक्टूबर 2025 को तुर्की के इस्तांबुल हवाई अड्डे पर पहुंचे 137 कार्यकर्ताओं में से कई ने थुनबर्ग के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का जिक्र किया। तुर्की के पत्रकार और फ्लोटिला सदस्य एर्सिन चेलिक ने आनाडोलू न्यूज एजेंसी को बताया, “हमारी आंखों के सामने थुनबर्ग के बालों से घसीटा गया, उन्हें पीटा गया और इजरायली झंडे को चूमने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने उनके साथ सब कुछ किया जो कल्पना की जा सकती है, ताकि बाकी लोगों को चेतावनी दी जा सके।” चेलिक ने थुनबर्ग को ‘बहादुर महिला’ बताते हुए कहा कि मात्र 22 वर्ष की उम्र में उन्हें अपमानित किया गया।

मलेशियाई कार्यकर्ता हाजवानी हेल्मी (28 वर्ष) और अमेरिकी कार्यकर्ता विंडफील्ड बीवर (43 वर्ष) ने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने थुनबर्ग को धक्का दिया जाता और इजरायली झंडे को पहनने के लिए मजबूर किया जाता देखा। हेल्मी ने कहा, “यह आपदा थी। उन्होंने हमें जानवरों जैसा व्यवहार किया।” उन्होंने दावा किया कि हिरासत में स्वच्छ भोजन, पानी और दवाओं की कमी थी, साथ ही व्यक्तिगत सामान जब्त कर लिए गए। बीवर ने कहा कि थुनबर्ग को “प्रचार के लिए इस्तेमाल किया गया” और उन्हें एक कमरे में धकेला गया जब इजरायल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर वहां पहुंचे। बेन-ग्विर ने पहले कार्यकर्ताओं को जेल भेजने की मांग की थी।

इटालवी पत्रकार लोरेंजो डी’अगोस्टिनो ने इस्तांबुल लौटने पर कहा कि थुनबर्ग को इजरायली झंडे में लपेटकर “ट्रॉफी की तरह घुमाया गया।” एक अन्य कार्यकर्ता इकबाल गुरपिनार ने तुर्की टीवी पर कहा, “उन्होंने हमें कुत्तों जैसा व्यवहार किया।” एडाला नामक इजरायली मानवाधिकार संगठन ने बताया कि हिरासत में कार्यकर्ताओं को घुटनों पर बिठाकर हाथ बांधे रखा गया, दवाओं से वंचित किया गया और वकीलों से बात करने से रोका गया। एक कार्यकर्ता ने कहा कि ‘फ्री फिलिस्तीन’ के नारे लगाने पर पांच घंटे तक सजा दी गई।

स्वीडिश अधिकारियों की पुष्टि: थुनबर्ग की शिकायतें
स्वीडिश विदेश मंत्रालय ने थुनबर्ग के करीबियों को ईमेल भेजकर पुष्टि की कि एक अधिकारी ने हिरासत में उनकी मुलाकात की। थुनबर्ग ने बताया कि उन्हें बेडबग्स से भरी कोठरी में रखा गया, जहां भोजन और पानी की कमी थी। वे कठोर सतहों पर लंबे समय तक बैठने को मजबूर की गईं, जिससे रैशेज और डिहाइड्रेशन की समस्या हुई। एक अन्य हिरासतकर्ता ने दूतावास को बताया कि थुनबर्ग को झंडे पकड़ाए गए जबकि उनकी तस्वीरें ली गईं, और वे चिंतित थीं कि ये तस्वीरें वायरल हो सकती हैं। यह दावा दो अन्य फ्लोटिला सदस्यों द्वारा भी समर्थित है। थुनबर्ग ने कहा, “यह सब एक चेतावनी के रूप में किया गया।”

इजरायल का खंडन: ‘झूठे और आधारहीन आरोप’
इजरायली विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को ‘निराधार और झूठा’ बताते हुए खारिज कर दिया। एक प्रवक्ता ने कहा, “सभी हिरासतकर्ताओं को पानी, भोजन, शौचालय और कानूनी सलाह का पूरा अधिकार दिया गया। थुनबर्ग ने कभी शिकायत नहीं की क्योंकि ये घटनाएं कभी हुई ही नहीं।” इजरायली जेल सेवा के एक अधिकारी ने झंडे चूमने या पकड़ाने की घटना से इनकार किया। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “हामास-सुमुद फ्लोटिला के हिरासतकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार के दावे साहसिक झूठ हैं।” इजरायल ने सभी को निर्वासित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, और अब तक 137 को तुर्की भेजा जा चुका है।

अन्य कार्यकर्ताओं की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:
हिरासत में बाकी कार्यकर्ता, जिनमें अमेरिका, यूएई, अल्जीरिया, मोरक्को, इटली, कुवैत, लीबिया, मलेशिया, मॉरिटानिया, स्विट्जरलैंड, ट्यूनीशिया और जॉर्डन के नागरिक शामिल हैं, अभी भी इजरायल में हैं। एडाला ने कहा कि अधिकारों का “व्यवस्थित उल्लंघन” हुआ, जिसमें शारीरिक और मानसिक हिंसा शामिल थी। इटालवी क्षेत्रीय परिषद सदस्य पाओलो रोमानो ने एएफपी को बताया, “उन्होंने हमें घुटनों पर लिटाया, हिलने पर मारा। वे हंसते, अपमानित करते और शारीरिक-मानसिक हिंसा करते।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है। यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्धविराम की कोशिश की है, लेकिन इजरायल ने बमबारी रोकने के आदेश को नजरअंदाज किया। कार्यकर्ता समूहों ने इजरायल पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह थुनबर्ग की दूसरी ऐसी गिरफ्तारी है; पहले वे फिलिस्तीन समर्थन प्रदर्शनों में पकड़ी गई थीं।

क्या करें प्रभावित पक्ष?

  • कानूनी सहायता: एडाला जैसे संगठनों से संपर्क करें।
  • जागरूकता: सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा करें।
  • सतर्कता: मानवीय अभियानों में भाग लेते समय सुरक्षा सुनिश्चित करें।

यह घटना न केवल थुनबर्ग की व्यक्तिगत गरिमा पर सवाल उठाती है, बल्कि गाजा संकट में मानवीय सहायता की बाधाओं को भी उजागर करती है। उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। शांति और न्याय की मांग जारी रहेगी। (स्रोत: अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, कार्यकर्ता बयान और आधिकारिक ईमेल के आधार पर)

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