by-Ravindra Sikarwar
छिंदवाड़ा/भोपाल: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली खांसी की दवा ‘कोल्ड्रिफ’ सीरप से जुड़ी एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। पिछले दो महीनों में इस दवा के सेवन से 14 मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि आठ अन्य बच्चे अभी भी नागपुर के अस्पतालों में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं। दवा में घातक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की घातक मात्रा मिलने के बाद डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्होंने इन बच्चों को यह दवा लिखी थी। तमिलनाडु की कंपनी स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ भी हत्या और दवा में मिलावट के आरोप में मुकदमा दर्ज हो गया है। राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से इस दवा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है और विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है।
घटना का पूरा विवरण और समयरेखा:
यह दुखद सिलसिला अगस्त के अंत से शुरू हुआ, जब छिंदवाड़ा जिले के परासिया उपमंडल, शहर क्षेत्र और चौरई तहसील में छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम के इलाज के लिए ‘कोल्ड्रिफ’ सीरप दिया गया। बैच नंबर एसआर-13 (मई 2025 में निर्मित, अप्रैल 2027 तक वैध) वाली यह दवा डॉक्टरों द्वारा निर्धारित की गई थी। शुरुआत में बच्चों को उल्टी, दस्त, चक्कर और सुस्ती जैसे लक्षण दिखे, जो धीरे-धीरे किडनी फेलियर में बदल गए। सबसे ताजा मामला दो वर्षीय योगिता ठाकरे का है, जिनकी मौत के बाद शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया।
कुल 14 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें सभी बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र के थे। इसके अलावा, 1,102 बच्चों के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 4,868 परिणाम प्राप्त हो चुके हैं। आठ बच्चे वर्तमान में नागपुर के एम्स और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राजस्थान में भी इसी दवा से कुछ मौतें होने की खबरें आई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डीईजी नामक यह विषैला पदार्थ छोटी मात्रा में भी घातक साबित होता है, जो किडनी को नष्ट कर देता है।
जहरीली दवा का रहस्य: निर्माण और जांच
‘कोल्ड्रिफ’ सीरप तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाई गई थी। राज्य औषधि नियंत्रक की जांच में पाया गया कि दवा में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत तक थी, जो निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। 13 नमूनों में से 10 जहरीले साबित हुए, जबकि तीन साफ निकले। कंपनी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई।
यह घटना भारत की फार्मा इंडस्ट्री के लिए झटका है, जहां पहले भी गैंबिया (2022 में 70 बच्चों की मौत) और उज्बेकिस्तान (20 मौतें) जैसे मामलों में भारतीय दवाओं पर सवाल उठे हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अब छह राज्यों में 19 दवा इकाइयों का निरीक्षण शुरू कर दिया है, ताकि ऐसी मिलावट रोकी जा सके।
डॉक्टर की गिरफ्तारी: लापरवाही का आरोप
घटना में मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी हैं, जो छिंदवाड़ा के एक सरकारी अस्पताल में तैनात थे। जांच में पता चला कि दवा के दुष्प्रभावों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कई बच्चों को यह सीरप लिखा। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, “डॉक्टर जो प्रिस्क्रिप्शन लिखते हैं, उनकी जिम्मेदारी सबसे बड़ी होती है।” सोनी को गिरफ्तार कर सेवा से निलंबित कर दिया गया है। उनके सहकर्मियों ने रिहाई की मांग में हड़ताल की धमकी दी है, लेकिन सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
सोनी और कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत हत्या न amounting to murder, दवा में मिलावट और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के उल्लंघन का केस दर्ज किया गया है। सजा 10 वर्ष से अधिक हो सकती है।
सरकारी कदम: प्रतिबंध, मुआवजा और जांच
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत कार्रवाई की। मध्य प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ’ और स्रेसन की अन्य दवाओं की बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी गई, साथ ही स्टॉक जब्त कर लिया गया। तमिलनाडु और केरल में भी यही प्रतिबंध लागू हो गया। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई है।
एक 12 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व परासिया के एसडीओपी जितेंद्र सिंह जाट कर रहे हैं। टीम कंपनी के उत्पादन रिकॉर्ड, वितरण चेन और सबूत इकट्ठा करेगी। प्रभावित बच्चों के नमूने पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजे गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक पुष्टि की और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की।
विपक्षी कांग्रेस ने सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है और प्रभावित परिवारों के लिए अधिक राहत की मांग की है।
क्या सावधानियां बरतें अभिभावक?
- बच्चों को कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह बिना न दें।
- दवा के पैकेट पर बैच नंबर और एक्सपायरी डेट चेक करें।
- असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं।
- फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें।
यह त्रासदी न केवल माता-पिता के दिलों को तोड़ रही है, बल्कि दवा उद्योग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रही है। उम्मीद है कि एसआईटी की जांच से पूरी सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। स्वास्थ्य पहले, सतर्कता जरूरी। (स्रोत: सरकारी बयान, स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट और समाचार स्रोतों के आधार पर)
