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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में हुई 11 बच्चों की मौतों के बाद एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है, जिसमें 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं देने से मना किया गया है। ये मौतें मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित खांसी की सिरप से जुड़ी बताई जा रही हैं, हालांकि प्रारंभिक जांच में कोई विषाक्त पदार्थ नहीं पाया गया। इस सलाह का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से छोटी उम्र के बच्चों में जहां ऐसी दवाओं के दुष्प्रभाव घातक हो सकते हैं।

मौतों का विवरण:
पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में नौ बच्चों की मौत हो गई, जबकि राजस्थान में दो से तीन बच्चों की मौत दर्ज की गई, कुल मिलाकर 11 से 12 मौतें। मध्य प्रदेश में प्रभावित बच्चे मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के थे, जिन्हें सर्दी और हल्के बुखार के बाद खांसी की सिरप दी गई थी। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई, जिसमें मूत्र उत्पादन कम होना और गुर्दे की विफलता जैसे लक्षण दिखे। पांच अन्य बच्चे नागपुर में विशेष उपचार ले रहे हैं।

राजस्थान में, सीकर और भरतपुर जिलों में मौतें हुईं। उदाहरण के लिए, 29 सितंबर को सीकर में एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत, जबकि 27 सितंबर को भरतपुर के वीर शहर में ढाई वर्षीय बच्चे की मौत जयपुर के जेके लोन अस्पताल में हुई। यहां प्रभावित बच्चों में उल्टी, सुस्ती, चिंता, चक्कर आना, बेचैनी और बेहोशी जैसे लक्षण देखे गए। बांसवाड़ा में भी 16 से 30 सितंबर के बीच जटिलताओं की जांच चल रही है। परिवारों का आरोप है कि मौतें खांसी की सिरप से जुड़ी हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने सीधा संबंध नकारा है।

शामिल दवाएं और दूषित होने का संदेह:
मध्य प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ’ नामक खांसी की सिरप को मुख्य रूप से दोषी ठहराया जा रहा है, जिसे छिंदवाड़ा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नंदुरकर ने मौतों से जोड़ा है। जिले ने दो ब्रांडों की सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया और जबलपुर के वितरक के स्टॉक को सील कर दिया। राजस्थान में, डेक्स्ट्रोमेथोर्फन आधारित ‘अमोड्रोक्सोल’ सिरप शामिल है, जो राज्य सरकार की मुफ्त दवा योजना के तहत वितरित की गई थी। यह सिरप जयपुर स्थित केसन्स फार्मा द्वारा निर्मित थी।

प्रारंभिक जांच में मध्य प्रदेश के 19 नमूनों में से नौ में कोई दूषित पदार्थ जैसे डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं पाया गया, जो गुर्दे की क्षति का कारण बन सकते हैं। शेष 10 नमूनों की फोरेंसिक और जैव रासायनिक जांच जारी है। राजस्थान में भी टेस्ट परिणाम लंबित हैं।

सरकार की सलाह और दिशानिर्देश:
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह जारी की। मुख्य बिंदु:

  • 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं न दें या निर्धारित न करें।
  • 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ये दवाएं सामान्य रूप से अनुशंसित नहीं हैं।
  • 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए, सावधानीपूर्वक नैदानिक मूल्यांकन, करीबी निगरानी, उचित खुराक, सबसे कम प्रभावी अवधि और कई दवाओं के संयोजन से बचाव के साथ उपयोग करें।
  • जनता को डॉक्टरों के पर्चे का सख्ती से पालन करने के लिए जागरूक करें।

यह सलाह 2021 की केंद्र सरकार की पूर्व सलाह पर आधारित है, जिसमें चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को डेक्स्ट्रोमेथोर्फन न देने की बात कही गई थी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह सिरप पांच वर्ष से ऊपर के बच्चों को ही दी जानी चाहिए।

सरकार द्वारा की गई कार्रवाईयां:

  • मध्य प्रदेश: आईसीएमआर और राज्य टीमों द्वारा जांच, दवाओं पर प्रतिबंध, और स्टॉक सील। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि मौतों के सभी संभावित कारणों की जांच हो रही है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), और केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की संयुक्त टीम ने स्थल का दौरा किया।
  • राजस्थान: ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने दवा मानकों को प्रभावित करने का आरोप है। केसन्स फार्मा की सभी 19 दवाओं की आपूर्ति रोक दी गई। डेक्स्ट्रोमेथोर्फन युक्त सभी खांसी सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विस्तृत जांच के आदेश दिए, और एक विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन ने बताया कि 2012 से केसन्स फार्मा के 10,119 नमूनों में से 42 घटिया पाए गए।
  • केंद्र सरकार: सभी राज्यों को सलाह जारी, और जांच जारी। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने की घोषणा।

अधिकारियों के बयान और सिफारिशें

  • छिंदवाड़ा के जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिंह ने नौ मौतों और पांच बच्चों के उपचार की पुष्टि की।
  • मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा संयुक्त निदेशक डॉ. संजय मिश्रा ने कहा कि नौ नमूनों में कोई दूषित पदार्थ नहीं मिला, लेकिन आगे की जांच जरूरी है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दूषित पदार्थ नहीं मिले, लेकिन सभी कारणों की जांच हो रही है।
  • राजस्थान स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने जांच और जनहित संरक्षण के उपायों के निर्देश दिए।
  • प्रधान सचिव गायत्री राठौर ने 2021 की सलाह की याद दिलाई।

यह घटना दवा सुरक्षा पर सवाल उठाती है, और सरकार ने आश्वासन दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चों को कोई दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न दें, और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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