by-Ravindra Sikarwar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य भूमिका निभाई। 1 अक्टूबर 2025 को विजयादशमी के पावन अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने संगठन के योगदान की सराहना की और विशेष स्मारक डाक टिकट तथा 100 रुपये के सिक्के का अनावरण किया। यह सिक्का भारतीय मुद्रा पर पहली बार ‘भारत माता’ की छवि अंकित करता है, जबकि डाक टिकट 1963 के गणतंत्र दिवस परेड को दर्शाता है। पीएम ने अपने संबोधन में आरएसएस को ‘बलिदान और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक’ बताते हुए कहा कि यह संगठन चुनौतियों के बावजूद अटल खड़ा रहा है। यह समारोह न केवल संगठन के एक शताब्दी के सफर का उत्सव है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करने का माध्यम भी बना।
आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेजवार द्वारा विजयादशमी के दिन की गई थी, जो संगठन के लिए एक विशेष महत्व रखता है। यह संगठन शुरू से ही हिंदू समाज के एकीकरण, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहा है। 100 वर्षों में आरएसएस ने प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लाखों स्वयंसेवकों के माध्यम से योगदान दिया है। आजादी की लड़ाई से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक, संगठन ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि दशहरे के दिन आरएसएस की स्थापना ‘संयोग मात्र नहीं थी, बल्कि एक दैवीय संदेश थी’, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। उन्होंने संगठन को ‘अग्निपरीक्षा’ के दौर से गुजरने के बावजूद मजबूत बने रहने की प्रशंसा की, खासकर विभाजन, आपातकाल और अन्य संकटों के समय।
कार्यक्रम दिल्ली के एक प्रमुख सभागार में आयोजित हुआ, जहां हजारों स्वयंसेवक, पदाधिकारी और अतिथि उपस्थित थे। पीएम मोदी ने संबोधन में आरएसएस के स्वयंसेवकों को ‘अनगिनत जीवन संवारने वाले’ बताया, जो समाज के हर वर्ग में सेवा भाव से कार्यरत हैं। उन्होंने संगठन की ‘सेवा भारती’ जैसी शाखाओं का उल्लेख किया, जो आपदा प्रबंधन में अग्रणी रही हैं। स्मारक सिक्के का डिजाइन भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया, जिसमें एक ओर ‘भारत माता’ की प्रतिमा और दूसरी ओर आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख है। यह सिक्का भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रचलन में लाया जाएगा, जो संग्राहकों और राष्ट्रप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रखता है। वहीं, डाक टिकट डाक विभाग द्वारा जारी किया गया, जो 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की भागीदारी को चित्रित करता है—जब वे अनुशासन और एकता का प्रतीक बने थे।
इस विमोचन ने आरएसएस के इतिहास को औपचारिक मान्यता प्रदान की। पीएम मोदी ने कहा कि ये स्मृति चिह्न संगठन के ‘राष्ट्रीय एकात्मता’ के प्रयासों को अमर बनाएंगे। कार्यक्रम में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी संबोधित किया, जहां उन्होंने पीएम को धन्यवाद देते हुए कहा कि मोदी जी का नेतृत्व भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बना रहा है। यह समारोह आरएसएस की शाखा प्रथा, सामाजिक उत्थान और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में योगदान को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयोजन संगठन की राजनीतिक और सामाजिक प्रासंगिकता को पुनः स्थापित करता है, खासकर युवा पीढ़ी के बीच।
आरएसएस शताब्दी समारोह पूरे वर्ष भर चलने वाली श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। यह न केवल संगठन के स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एकता और सेवा का संदेश भी देता है। पीएम मोदी का यह संबोधन और विमोचन निश्चित रूप से इतिहास का एक स्वर्णिम पन्ना बन जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा देगा।
