by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षा और डिजिटल समावेशन को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। 1 अक्टूबर 2025 से राज्यव्यापी ‘विद्यार्थी के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार’ अभियान की शुरुआत हो गई है, जो 26 लाख स्कूली बच्चों को लक्षित कर रहा है। यह पहल मुख्य रूप से 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के आधार कार्ड में बायोमेट्रिक विवरण—जैसे फिंगरप्रिंट्स, आईरिस स्कैन और फोटोग्राफ—के अपडेट पर केंद्रित है। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह अभियान स्कूलों में ही विशेष कैंप लगाकर चलाया जाएगा, ताकि माता-पिता को अलग से दौड़-भाग न करनी पड़े। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कल्याण योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति, मिड-डे मील और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराना है, जिससे बच्चों के भविष्य के अवसरों पर कोई असर न पड़े।
यह अभियान अगस्त-सितंबर 2025 में शुरू हुए प्रारंभिक चरण का विस्तार है, जब राज्य के 52 जिलों में आधार कार्ड निर्माण और सुधार पर फोकस किया गया था। अब अक्टूबर से विशेष रूप से बायोमेट्रिक अपडेट पर ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि 5 वर्ष से कम उम्र में जारी आधार कार्डों में केवल फोटो होता है, बिना बायोमेट्रिक्स के। यूआईडीएआई के अनुसार, बच्चों को 5 वर्ष की उम्र पूरी होने पर पहला अपडेट (5-7 वर्ष के बीच मुफ्त) और 15 वर्ष पर दूसरा अपडेट (15-17 वर्ष के बीच मुफ्त) अनिवार्य है। यदि समय पर न किया जाए, तो बाद में शुल्क लग सकता है। मध्य प्रदेश में लगभग 26 लाख बच्चे इस श्रेणी में आते हैं, जिनके अपडेट लंबित हैं, और यह संख्या यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडाइस+) पोर्टल से प्राप्त की गई है।
अभियान की प्रक्रिया सरल और स्कूल-केंद्रित रखी गई है। राज्य शिक्षा केंद्र (आरएसकेजे) और यूआईडीएआई के संयुक्त तत्वावधान में प्रत्येक जिले के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनों से लैस मोबाइल टीमें भेजी जा रही हैं। स्कूल प्राचार्य यूडाइस+ पोर्टल के माध्यम से उन छात्रों की सूची तैयार करेंगे, जिन्हें अपडेट की जरूरत है। फिर, निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार टीमें स्कूल पहुंचेंगी, जहां बच्चे की उंगलियों के निशान, आंखों की स्कैनिंग और नई फोटो ली जाएगी। अपडेट के लिए आवश्यक दस्तावेज सीमित हैं—बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल आईडी कार्ड और माता-पिता का आधार कार्ड। यदि बच्चे का आधार न हो, तो नया निर्माण भी मुफ्त किया जाएगा, जिसमें स्कूल प्रमुख या शिक्षक गवाह की भूमिका निभाएंगे। अभिभावकों को स्कूल से ही सूचना दी जाएगी, और अपडेट पूरा होने पर नया आधार कार्ड स्कूल के माध्यम से ही वितरित होगा। इंदौर जैसे जिलों में पहले ही इसकी सफलता देखी गई है, जहां सितंबर में विशेष कैंप लगाकर हजारों बच्चों का काम किया गया।
इस अभियान के फायदे बहुआयामी हैं। आधार अपडेट से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट, जेईई और सीयूईटी में पंजीकरण आसान हो जाएगा, साथ ही स्कूल प्रवेश, छात्रवृत्ति वितरण और सरकारी लाभों में देरी नहीं होगी। मध्य प्रदेश में डिजिटल इंडिया की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधार-लिंक्ड बैंक खाते के बिना डीबीटी रुक जाता है। शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि कोई बच्चा आधार की कमी से वंचित न रहे। यह अभियान न केवल प्रशासनिक सुगमता लाएगा, बल्कि बच्चों के डिजिटल सशक्तिकरण को भी सुनिश्चित करेगा।” यूआईडीएआई के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 17 करोड़ बच्चों के लिए यह ड्राइव चल रही है, लेकिन मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानीय सहयोग से यह अधिक प्रभावी हो रहा है।
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे मॉनिटरिंग करें और रिपोर्ट साझा करें। यदि कोई बच्चा अपडेट से चूक जाए, तो नजदीकी आधार सेवा केंद्र का विकल्प भी उपलब्ध है। यह पहल न केवल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं के लिए तैयार पीढ़ी भी गढ़ेगी। अभिभावक अपने बच्चों के आधार की स्थिति जांचने के लिए यूआईडीएआई की वेबसाइट या स्कूल से संपर्क कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह अभियान मध्य प्रदेश को डिजिटल समावेशी राज्य बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
