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by-Ravindra Sikarwar

भारत में ईंधन क्षेत्र में एक और बदलाव देखने को मिला है, जब तेल विपणन कंपनियों ने 1 अक्टूबर 2025 से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में 15.50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की घोषणा की। यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की अस्थिर दरों और वितरण खर्चों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हालांकि, घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, जो उपभोक्ताओं को कुछ राहत प्रदान करता है। यह मूल्य निर्धारण समीक्षा हर महीने की पहली तारीख को की जाती है, और यह भारतीय तेल निगम (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा की जाती है।

इस बढ़ोतरी के बाद, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें प्रमुख महानगरों में निम्नानुसार हो गई हैं। दिल्ली में यह अब 1,595.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है, जो पहले 1,580 रुपये थी। मुंबई में कीमत 1,547 रुपये तक पहुंच गई, जो 15.50 रुपये की वृद्धि दर्शाती है। चेन्नई में 16 रुपये की बढ़ोतरी के साथ यह 1,754 रुपये हो गई, जबकि कोलकाता में भी 16 रुपये ऊपर चढ़कर 1,700 रुपये पर पहुंच गई। ये मूल्य स्थानीय करों और वितरण लागतों के आधार पर थोड़े भिन्न हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह वृद्धि व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए एक अतिरिक्त बोझ साबित हो रही है।

यह मूल्य वृद्धि वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता से प्रेरित है, जहां कच्चे तेल की कीमतें हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण प्रभावित हुई हैं। एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय दरें, जो मुख्य रूप से अमेरिका और मध्य पूर्व से आयात पर निर्भर हैं, में उतार-चढ़ाव ने कंपनियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समायोजन वितरण बुनियादी ढांचे, कराधान और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर भी आधारित है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले साल मार्च के मध्य से स्थिर बनी हुई हैं—दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है।

व्यावसायिक एलपीजी का उपयोग मुख्य रूप से रेस्तरां, होटल, केटरिंग सेवाओं, अस्पतालों और छोटे उद्योगों में किया जाता है, जहां यह खाना पकाने, हीटिंग और अन्य प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है। इस वृद्धि का सबसे ज्यादा असर आतिथ्य क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है, खासकर नवरात्रि और दीवाली जैसे त्योहारी मौसम में, जब मांग चरम पर होती है। उद्योग संगठनों ने चिंता जताई है कि यह लगातार हो रही बढ़ोतरी उनके लाभ मार्जिन को प्रभावित करेगी, जिससे उपभोक्ता मूल्यों में भी इजाफा हो सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, देश भर में करोड़ों व्यावसायिक सिलेंडरों की बिक्री होती है, इसलिए यह छोटी-सी वृद्धि सालाना अरबों रुपये का अतिरिक्त खर्च बन सकती है।

सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि यह समायोजन बाजार की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है, और भविष्य में स्थिरता के प्रयास जारी रहेंगे। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय डीलरों या आधिकारिक ऐप्स के माध्यम से नवीनतम दरों की जांच करें, क्योंकि क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण कीमतें थोड़ी बदल सकती हैं। कुल मिलाकर, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है, व्यावसायिक क्षेत्र को इस बदलाव से निपटने के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ेंगी। यह घटना ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता पर नीतिगत बहस को फिर से हवा दे रही है।

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