by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश, जिसे ‘भारत का हृदय’ कहा जाता है, इस बार नवरात्रि के आगमन के साथ आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल का गवाह बन रहा है। 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हो रही नौ दिवसीय नवरात्रि के मद्देनजर उज्जैन की महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर धाम, ओर्छा, मैहर और अन्य पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रहा है। होटलों, होमस्टे और परिवहन सेवाओं में बुकिंग्स की भरमार से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जबकि पर्यटन विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक महीने में ही होमस्टे से बुकिंग और भोजन पर औसतन 43 लाख रुपये की आय हुई है।
नवरात्रि का यह मौसम मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्रों को जीवंत कर देता है, जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। उज्जैन, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का घर है, इस बार भी फोकस में है। 2023 में यहां 5.28 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, और इस वर्ष नवरात्रि से पहले ही बुकिंग्स में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। महाकालेश्वर कॉरिडोर के विकास के बाद यह स्थल वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है, जहां भक्तों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक अनुभव मिलता है। इसी तरह, नर्मदा नदी के तट पर बसे ओंकारेश्वर धाम में 2023 में 34.75 लाख भक्तों ने जल चढ़ाया था, और वर्तमान में यहां के घाटों पर स्नान और पूजा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
अन्य प्रमुख स्थलों में मैहर की शक्ति पीठ, जहां मां शारदा देवी विराजमान हैं, और सलकनपुर का बीजासन माता मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं। ओर्छा के राम राजा मंदिर और चित्रकूट की राम घाट जैसी जगहें भी इस सर्किट का हिस्सा हैं, जो बौद्ध स्थल सांची (यूनेस्को विश्व धरोहर) के साथ मिलकर मध्य प्रदेश को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक हृदय स्थल बनाती हैं। राज्य पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) के अनुसार, नवरात्रि से पहले ही 332 पंजीकृत होमस्टे लगभग पूरी क्षमता पर चल रहे हैं, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से मासिक कारोबार 1 लाख रुपये तक पहुंच गया है। परिवहन क्षेत्र में भी उछाल आया है—उज्जैन के कैब चालक जैसे रमेश पटेल ने बताया कि उनकी दैनिक यात्राएं दोगुनी हो गई हैं, क्योंकि श्रद्धालु ग्रुप में आ रहे हैं।
यह आध्यात्मिक उमंग राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रहा है। 2023 में मध्य प्रदेश ने कुल 11.21 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित किया था, जो 2022 के 3.41 करोड़ से तीन गुना अधिक था। आध्यात्मिक पर्यटन भारत के घरेलू यात्रा का 60% हिस्सा रखता है, और 2022 में ही 143.3 करोड़ आंतरिक पर्यटकों ने तीर्थ स्थलों का दौरा किया। विशेषज्ञों के अनुमान से, 2028 तक यह क्षेत्र 59 अरब डॉलर का हो जाएगा, जिसमें 2030 तक 10 करोड़ से अधिक नौकरियां सृजित होंगी। मध्य प्रदेश में यह वृद्धि स्थानीय स्तर पर खुदरा, आतिथ्य और परिवहन को बढ़ावा दे रही है, जबकि मेगा इवेंट्स जैसे 2025 का महाकुंभ मेला (जिसमें प्रयागराज में 66 करोड़ श्रद्धालु जुटे) जैसी घटनाओं का असर यहां भी दिख रहा है।
सरकार इस उछाल को मजबूत करने के लिए सक्रिय है। उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ के लिए 33 परियोजनाओं पर 2,675 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें क्षिप्रा नदी पर 30 किलोमीटर नए घाटों का निर्माण शामिल है, जो एक दिन में 5 करोड़ भक्तों को समायोजित कर सकेंगे। सलकनपुर के बीजासन माता मंदिर को ‘देवी लोक’ बनाने के लिए 100 करोड़ और मैहर मंदिर के लिए 50 करोड़ का प्रस्ताव पास हो चुका है। इसके अलावा, उज्जैन-ओंकारेश्वर में नई होटल सुविधाएं और उड़ान सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने की योजनाएं हैं। 27 अगस्त 2025 को उज्जैन में आयोजित दूसरे वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन ने भी इस दिशा में वैश्विक साझेदारियां मजबूत कीं।
नवरात्रि की यह धूम न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सतत विकास का भी उदाहरण। पर्यटन विभाग ने श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन बुकिंग, साफ-सफाई और सुरक्षा पर जोर दिया है, ताकि यह उत्सव पर्यावरण अनुकूल रहे। मध्य प्रदेश अब आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है, जहां इतिहास, संस्कृति और आस्था का संगम हर आने वाले को मोहित कर देता है।
