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by-Ravindra Sikarwar

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक नया मामला सामने आया है, जहां तीन युवकों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक फोटो में छेड़छाड़ करके अपमानजनक तरीके से शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह घटना न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही नफरत भरी सामग्री के खतरे को भी उजागर कर रही है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें जेल भेज दिया।

घटना की शुरुआत 29 सितंबर 2025 को हुई, जब स्थानीय निवासी अंकित ने पुलिस को सूचना दी कि नकुड़ क्षेत्र के नसरुल्लागढ़ गांव के तीन युवक योगी आदित्यनाथ की एक तस्वीर को हेरफेर करके सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। यह तस्वीर मूल रूप से मुख्यमंत्री की आधिकारिक या सार्वजनिक छवि पर आधारित थी, लेकिन इसमें की गई डिजिटल बदलाव के जरिए उनका अपमान करने और उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया था। आरोपियों ने इस सामग्री को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया, जिससे यह वायरल होने की कगार पर पहुंच गई। पुलिस को मिली शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि यह पोस्ट न केवल मानहानिकारक थी, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भंग करने वाली भी थी।

पुलिस ने सूचना मिलते ही नकुड़ थाने में मामला दर्ज कर लिया और साइबर सेल की टीम को जांच सौंप दी। साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण करके आरोपियों की पहचान की। गिरफ्तारी 30 सितंबर 2025 को हुई, जब तीनों—दनिश, गयूर अख्तर और हाशिम—को उनके गांव से हिरासत में लिया गया। ये सभी स्थानीय निवासी हैं और उनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पूछताछ के दौरान उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने मजाक या किसी व्यक्तिगत विवाद के चलते यह काम किया, लेकिन पुलिस का कहना है कि यह सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना), 505 (सार्वजनिक शांति भंग करने वाली अफवाहें) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 66ए तथा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने और संबंधित पोस्ट को हटाने के लिए प्लेटफॉर्म अधिकारियों से संपर्क भी किया है।

नकुड़ सर्कल अधिकारी आशीष सिसोदिया ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुख्यमंत्री या राज्य की कानून-व्यवस्था को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी प्रयास के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी। सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री फैलाना न केवल अपराध है, बल्कि समाज के लिए खतरा भी है। हमारी टीम लगातार निगरानी रख रही है और आगे भी ऐसी घटनाओं पर तुरंत अंकुश लगाएंगे।” उनके बयान से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश पुलिस डिजिटल अपराधों के प्रति सजग है और किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

यह गिरफ्तारी राज्य में सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के खिलाफ फैलाई जा रही नकारात्मक सामग्री की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है। पिछले कुछ महीनों में भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां राजनीतिक हस्तियों की छवि खराब करने के लिए फर्जी या हेरफेर की गई सामग्री वायरल की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान और सख्त कानूनी प्रावधानों से ही इस समस्या का समाधान संभव है। पीड़ित पक्ष या शिकायतकर्ता अंकित ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के सम्मान की रक्षा के लिए आगे आया, क्योंकि ऐसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं।

प्रशासन का आश्वासन है कि जांच पूरी होने पर दोषियों को पूरी सजा दी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई ऐसा अपराध करने की हिम्मत न करे। यह मामला न केवल सहारनपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है, जहां डिजिटल नैतिकता और कानून का पालन सुनिश्चित करने की मांग तेज हो रही है।

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