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by-Ravindra Sikarwar

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। इन प्रदर्शनों में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। युवा पीढ़ी, विशेष रूप से जेन-जेड, ने सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हुईं। यह आंदोलन खराब शासन, बुनियादी सुविधाओं की कमी, और क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर शुरू हुआ।

प्रदर्शन की शुरुआत और कारण:
पिछले कुछ हफ्तों से PoJK में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से बिजली कटौती, खराब सड़कों, और अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में भ्रष्टाचार और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़क उठा। विशेष रूप से युवा, जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं, ने सरकार के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन शुरू किए।

प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर उनकी जरूरतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • बिजली और पानी की नियमित आपूर्ति।
  • रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।
  • भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शी प्रशासन।

हिंसक झड़पें और हताहत:
हाल के दिनों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। कुछ क्षेत्रों में गोलीबारी की खबरें भी सामने आईं, जिसके परिणामस्वरूप 20 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में कई नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं, जिसने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, और स्थानीय अस्पतालों में बेड की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजबूरन कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ स्थानीय नेताओं ने इन मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जेन-जेड की भूमिका:
इस आंदोलन में जेन-जेड की भूमिका उल्लेखनीय रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #PoJKProtests और #JusticeForKashmir जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवा प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को वैश्विक मंच तक ले जाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। उनकी रचनात्मकता और संगठनात्मक क्षमता ने इस आंदोलन को नई दिशा दी है।

सरकार और प्रशासन का रुख:
पाकिस्तान सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई ठोस बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है और बातचीत के लिए तैयार होने का दावा किया है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी किसी भी समझौते से पहले ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:
इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी खींचा है। मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की निंदा की है और मृतकों की संख्या को लेकर चिंता जताई है। कुछ देशों ने PoJK में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच की मांग की है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने खारिज कर दिया है।

विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी हैं, और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय लोग और प्रदर्शनकारी सरकार से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मांगों को जल्दी नहीं सुना गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

PoJK में यह उथल-पुथल क्षेत्र की जटिल सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को उजागर करती है। यह देखना बाकी है कि सरकार और प्रदर्शनकारी इस गतिरोध को कैसे सुलझाते हैं, लेकिन फिलहाल यह क्षेत्र अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

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