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by-Ravindra Sikarwar

कोलकाता: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल के दक्षिणी जिलों में 29 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट एक तेजी से बढ़ रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण जारी किया गया है, जिसके चलते कोलकाता में सितंबर का एक सबसे गीला दिन दर्ज किया गया। इस भारी बारिश ने दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारियों के बीच जलभराव की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

मौसम विभाग की चेतावनी:
IMD के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना एक निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिणी पश्चिम बंगाल के ऊपर सक्रिय हो गया है, जिसके कारण कोलकाता, हावड़ा, हुगली, दक्षिण 24 परगना, और पूर्व मेदिनीपुर जैसे जिलों में भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक वर्षा हो सकती है। येलो अलर्ट के तहत, स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने और जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। अन्य जिलों, जैसे उत्तर 24 परगना और मुर्शिदाबाद में हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद है।

कोलकाता में रिकॉर्ड बारिश:
कोलकाता में रविवार को भारी बारिश दर्ज की गई, जिसे मौसम विभाग ने सितंबर महीने का सबसे गीला दिन बताया। शहर के कई हिस्सों में 100 मिमी से अधिक बारिश हुई, जिसके कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सॉल्ट लेक, दमदम, और बेलियाघाटा जैसे क्षेत्रों में सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ। मौसम वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि यह बारिश मानसून के अंतिम चरण का हिस्सा है, और अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव कम हो सकता है।

दुर्गा पूजा पर प्रभाव:
यह भारी बारिश दुर्गा पूजा के उत्सव के दौरान आई है, जो पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है। कोलकाता और अन्य दक्षिणी जिलों में पंडालों की स्थापना और सजावट का कार्य जोरों पर है, लेकिन जलभराव और बारिश ने आयोजकों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कई पंडालों में जलरोधक तिरपाल और अस्थायी ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था की गई है ताकि भक्तों को असुविधा न हो।

प्रशासन की तैयारियां:
स्थानीय प्रशासन ने बारिश और जलभराव से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोलकाता नगर निगम (KMC) ने नालों की सफाई तेज कर दी है और जल निकासी पंपों को तैनात किया है। हावड़ा और दक्षिण 24 परगना में आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं, और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, बिजली और परिवहन सेवाओं को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

स्थानीय लोगों और आयोजकों की प्रतिक्रिया:
कोलकाता के निवासियों ने बारिश को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। एक स्थानीय निवासी, सुनील मंडल ने कहा, “यह बारिश पूजा के माहौल को थोड़ा प्रभावित कर रही है, लेकिन हम कोलकाता में ऐसी बारिश के आदी हैं। प्रशासन को जल्दी से जलभराव की समस्या हल करनी चाहिए।” एक पूजा समिति के आयोजक, ममता बनर्जी ने बताया, “हमने अपने पंडाल को बारिश से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उम्मीद है कि मौसम जल्द साफ हो जाएगा।”

मानसून का अंत और भविष्य का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि यह भारी बारिश मानसून के अंतिम चरण का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल से मानसून की विदाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है। इसके बाद मौसम शुष्क होगा, और तापमान में क्रमिक वृद्धि के साथ ठंड शुरू हो जाएगी। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिसके लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव:
भारी बारिश और जलभराव ने कोलकाता और अन्य दक्षिणी जिलों में दैनिक जीवन को प्रभावित किया है। छोटे व्यापारियों, विशेष रूप से सड़क किनारे दुकानदारों, को नुकसान हुआ है। इसके अलावा, यातायात जाम और सार्वजनिक परिवहन में देरी ने दैनिक यात्रियों को परेशान किया है। हालांकि, यह बारिश कृषि के लिए लाभकारी रही है, क्योंकि धान और अन्य फसलों को अतिरिक्त नमी मिली है।

पश्चिम बंगाल में जारी भारी बारिश और येलो अलर्ट ने दुर्गा पूजा के उत्साह को थोड़ा प्रभावित किया है, लेकिन प्रशासन और स्थानीय समुदाय इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कोलकाता में सितंबर का यह गीला दिन मानसून की विदाई का एक जोरदार संदेश है। उम्मीद है कि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और आयोजकों की सतर्कता से पूजा उत्सव निर्बाध रूप से मनाया जा सकेगा। यह बारिश पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक चुनौती के साथ-साथ त्योहारी मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी है।

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