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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा जिले के मऊगंज तहसीलदार को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई स्थानीय लोगों द्वारा तहसीलदार के खिलाफ असभ्य व्यवहार और अभद्रता की शिकायतों के बाद की गई है। इस कदम के माध्यम से मुख्यमंत्री ने प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

शिकायतों का विवरण:
रीवा जिले के मऊगंज तहसील में तहसीलदार के खिलाफ स्थानीय लोगों ने कई शिकायतें दर्ज की थीं। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार ने आम लोगों के साथ बातचीत के दौरान असभ्य और अपमानजनक व्यवहार किया। शिकायतों में कहा गया कि तहसीलदार ने भूमि विवाद, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक मामलों में सहायता मांगने आए लोगों के साथ ठीक ढंग से व्यवहार नहीं किया। कुछ मामलों में, उनकी ओर से अनावश्यक देरी और असहयोग की भी बात सामने आई। इन शिकायतों ने स्थानीय समुदाय में असंतोष पैदा कर दिया था।

मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई:
शिकायतें मिलने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने रीवा जिला प्रशासन को तहसीलदार के व्यवहार की जांच करने का निर्देश दिया। प्रारंभिक जांच में शिकायतों की पुष्टि होने पर, मुख्यमंत्री ने तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई 28 सितंबर 2025 को की गई, और निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया कि प्रशासन में असभ्यता और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन में जवाबदेही पर जोर:
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “हमारी सरकार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासनिक अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे लोगों की समस्याओं को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ हल करें। किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के साथ सौम्य और सहयोगी व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:
मऊगंज के स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत किया है। एक स्थानीय निवासी, रामलाल पटेल ने कहा, “तहसीलदार का व्यवहार बहुत रूखा था। हमारी समस्याएं सुनने की बजाय हमें अपमानित किया जाता था। मुख्यमंत्री का यह कदम हमें न्याय का भरोसा देता है।” इसी तरह, एक अन्य ग्रामीण, सुनीता देवी ने बताया कि इस कार्रवाई से प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा।

जांच और आगे की कार्रवाई:
मुख्यमंत्री ने निलंबन के साथ-साथ तहसीलदार के खिलाफ विस्तृत जांच के आदेश भी दिए हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह सभी शिकायतों की गहन जांच करे और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यदि तहसीलदार दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और सख्त की जाएगी। इस बीच, मऊगंज तहसील में कार्यभार संभालने के लिए एक नए अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि प्रशासनिक कार्यों में कोई रुकावट न आए।

प्रशासनिक सुधारों की दिशा:
यह घटना मध्य प्रदेश सरकार की उस नीति को रेखांकित करती है, जिसमें प्रशासन को जन-केंद्रित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल के महीनों में, मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर अधिकारियों को जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने और त्वरित समाधान प्रदान करने का निर्देश दिया है। इस निलंबन को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी जिम्मेदारी के साथ करें।

सामाजिक और राजनैतिक प्रभाव:
इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक माहौल बनाया है। विपक्षी दलों ने भी इस कदम की सराहना की है, हालांकि कुछ नेताओं ने मांग की है कि प्रशासन में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाएं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और जवाबदेही तंत्र स्थापित किया जाए ताकि जनता के साथ बेहतर संवाद सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मऊगंज तहसीलदार को निलंबित करने का निर्णय प्रशासन में जवाबदेही और जनता के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्रवाई न केवल स्थानीय लोगों के बीच विश्वास पैदा करती है, बल्कि अन्य अधिकारियों को भी यह संदेश देती है कि जनता की सेवा में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना से मध्य प्रदेश में एक अधिक उत्तरदायी और जन-केंद्रित प्रशासन की नींव मजबूत होगी।

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