by-Ravindra Sikarwar
भोपाल: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश में मानसून के विदा होने से पहले आज, सोमवार को, आखिरी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इंदौर, नर्मदापुरम, जबलपुर और उज्जैन संभागों में तीव्र वर्षा की संभावना है, जबकि अन्य क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश इस साल के मानसून की अंतिम बड़ी घटना होगी, जिसने पूर्वी मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा के साथ अपनी छाप छोड़ी है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के कारण इंदौर, नर्मदापुरम, जबलपुर और उज्जैन संभागों में आज 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जो स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने का संकेत देता है। शेष मध्य प्रदेश, जैसे भोपाल, ग्वालियर, रीवा और सागर में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बारिश मानसून की कमजोरी का संकेत है, और अगले कुछ दिनों में यह पूरी तरह से राज्य से विदा हो जाएगा।
इस साल मानसून का प्रदर्शन:
2025 का मानसून मध्य प्रदेश के लिए असाधारण रहा है। खास तौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, सागर, रीवा) और बुंदेलखंड (छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह) में सामान्य से 25-35% अधिक बारिश दर्ज की गई। इस अत्यधिक वर्षा ने कई क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा की, विशेष रूप से नर्मदा, बेतवा और केन नदियों के तटवर्ती इलाकों में। हालांकि, इस बारिश ने खरीफ फसलों, जैसे धान, सोयाबीन और मक्का, के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाईं, जिससे किसानों को काफी लाभ हुआ है।
संभावित प्रभाव और प्रशासन की तैयारी:
भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए, राज्य प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। इंदौर और उज्जैन, जहां नवरात्रि उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं, वहां जलभराव से बचने के लिए नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है। जबलपुर और नर्मदापुरम में नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमें तैनात की गई हैं। स्थानीय अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
किसानों को भी सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि उनकी तैयार फसल को बारिश से नुकसान न हो। मौसम विभाग ने सुझाव दिया है कि कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए।
मानसून की विदाई और भविष्य की संभावनाएं:
IMD के अनुसार, मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद मौसम शुष्क होने लगेगा, और तापमान में क्रमिक वृद्धि के साथ सर्दी का आगमन होगा। हालांकि, मानसून की देरी से विदाई के कारण कुछ क्षेत्रों में अक्टूबर के प्रारंभ में हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है, जिसके लिए भविष्य में बेहतर योजना की आवश्यकता होगी।
स्थानीय लोगों और आयोजकों की प्रतिक्रिया:
इंदौर के एक स्थानीय निवासी, संजय पटेल ने कहा, “इस साल की बारिश ने खेती को तो फायदा पहुंचाया, लेकिन जलभराव ने शहर में मुश्किलें बढ़ाईं। उम्मीद है कि यह आखिरी बारिश होगी, और नवरात्रि का उत्सव बिना किसी रुकावट के मनाया जा सकेगा।” उज्जैन में एक नवरात्रि पंडाल आयोजक, मनीष जोशी ने बताया कि उन्होंने बारिश से बचाव के लिए जलरोधक तिरपाल और उन्नत ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था की है ताकि भक्तों को कोई असुविधा न हो।
निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश में मानसून का यह अंतिम चरण भारी बारिश के साथ समाप्त हो रहा है, जो राज्य के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर यह बारिश कृषि के लिए वरदान साबित हुई है, वहीं जलभराव और बाढ़ की आशंका ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। मानसून की विदाई के साथ, मध्य प्रदेश अब नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों की तैयारी में जुटेगा, और शुष्क मौसम की शुरुआत के साथ नई उम्मीदें जागेंगी।
