by-Ravindra Sikarwar
देश के कई हिस्सों में दशहरा और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के कारण स्कूलों में अवकाश था, मध्य प्रदेश के सभी स्कूल सामान्य रूप से खुले रहे। राज्य सरकार ने इस दिन कोई राज्यव्यापी अवकाश घोषित नहीं किया, भले ही कुछ स्थानीय समुदायों में उत्सव और धार्मिक आयोजन जोरों पर थे। यह निर्णय मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की उस नीति को दर्शाता है, जो शैक्षणिक सत्र को निर्बाध रखने पर जोर देती है, खासकर जब त्योहारी अवकाश पहले से ही अक्टूबर में निर्धारित हैं। इस दिन स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित हुईं, और छात्रों व शिक्षकों ने सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लिया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय उत्सवों के कारण उपस्थिति पर असर देखा गया।
पृष्ठभूमि: त्योहारी मौसम और स्कूलों की स्थिति
मध्य प्रदेश में सितंबर और अक्टूबर का महीना त्योहारों का मौसम माना जाता है, जिसमें नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं। इस वर्ष, नवरात्रि 21 सितंबर से शुरू हुई, और कई राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, और असम ने दुर्गा पूजा के उपलक्ष्य में स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग ने 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस बनाए रखने का फैसला किया। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “राज्य में शैक्षणिक कैलेंडर पहले से निर्धारित है, और त्योहारी अवकाश अक्टूबर में दशहरा (2 अक्टूबर) और दीपावली (20-22 अक्टूबर) के लिए पहले ही घोषित किए गए हैं।”
हालांकि, स्थानीय स्तर पर कुछ जिलों जैसे भोपाल, इंदौर, और जबलपुर में नवरात्रि के पहले दिन गरबा और दुर्गा पूजा के छोटे-मोटे आयोजन हुए, जिनमें कुछ छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। इन आयोजनों के बावजूद, स्कूलों को बंद करने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया। कुछ स्कूलों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए, जैसे नवरात्रि-थीम पर आधारित चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं, ताकि छात्रों को त्योहारों की भावना से जोड़ा जा सके।
स्कूलों का संचालन: उपस्थिति और गतिविधियां
27 सितंबर को मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां चलीं। भोपाल के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया, “हमने नियमित समय-सारिणी का पालन किया, और कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई सामान्य रूप से हुई। कुछ छात्रों ने नवरात्रि के कारण छुट्टी ली, लेकिन कुल उपस्थिति 80% से अधिक रही।” इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में भी स्कूलों में उपस्थिति सामान्य रही, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ स्कूलों में उपस्थिति 60-70% के बीच रही, क्योंकि कई परिवार स्थानीय मेलों और धार्मिक आयोजनों में व्यस्त थे।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ नवरात्रि से संबंधित शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित करें। उदाहरण के लिए, जबलपुर के एक निजी स्कूल ने “नवरात्रि और भारतीय संस्कृति” पर एक विशेष सभा का आयोजन किया, जिसमें छात्रों ने मां दुर्गा के नौ रूपों पर प्रस्तुतियां दीं। उज्जैन, जो धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, वहां के स्कूलों में बच्चों ने मंदिरों के दर्शन के लिए छोटी यात्राएं भी आयोजित कीं, लेकिन यह स्कूल समय के बाद किया गया।
अन्य राज्यों से तुलना: अवकाश नीतियों में अंतर
जबकि मध्य प्रदेश में स्कूल खुले रहे, कई अन्य राज्यों ने अलग-अलग रणनीति अपनाई। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के लिए 26 सितंबर से ही स्कूलों में अवकाश शुरू हो गया, जो 4 अक्टूबर तक चलेगा। ओडिशा और असम में भी इसी तरह के अवकाश घोषित किए गए। उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में नवरात्रि के पहले दिन स्थानीय अवकाश दिए गए, लेकिन मध्य प्रदेश ने एकरूपता बनाए रखने के लिए कोई बदलाव नहीं किया।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश की यह नीति शैक्षणिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। भोपाल के एक शिक्षा विश्लेषक, डॉ. रमेश शर्मा ने कहा, “मध्य प्रदेश में पहले से ही त्योहारी अवकाशों की संख्या पर्याप्त है। स्कूलों को खुला रखने से पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाता है, जो बोर्ड परीक्षाओं के लिए जरूरी है।” हालांकि, कुछ अभिभावकों ने इस निर्णय पर असंतोष जताया, उनका कहना था कि त्योहारी माहौल में बच्चों को स्कूल भेजना चुनौतीपूर्ण होता है।
स्थानीय उत्सव और प्रभाव:
मध्य प्रदेश में नवरात्रि का विशेष महत्व है, खासकर उज्जैन, इंदौर, और ग्वालियर जैसे शहरों में, जहां गरबा और डांडिया आयोजनों की धूम रहती है। 27 सितंबर को भोपाल के बिट्टन मार्केट और इंदौर के विजय नगर में छोटे-मोटे गरबा आयोजन हुए, जिनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। हालांकि, इन आयोजनों का समय शाम को रखा गया, ताकि स्कूल की पढ़ाई प्रभावित न हो। कुछ स्कूलों ने बच्चों को जल्दी छुट्टी देने की मांग की थी, लेकिन शिक्षा विभाग ने इसे अस्वीकार कर दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेष रूप से आदिवासी बाहुल्य जिलों जैसे मंडला और डिंडोरी में, स्थानीय मेले और पूजा-अर्चना के कारण स्कूलों में उपस्थिति कम रही। इन क्षेत्रों में कई परिवार अपने बच्चों को धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल करते हैं, जिससे स्कूलों में छुट्टियां प्रभावित होती हैं। फिर भी, शिक्षा विभाग ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सुनिश्चित करें कि स्कूल खुले रहें और शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें।
सरकार और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया:
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने एक बयान में कहा, “हमारा लक्ष्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, और इसके लिए नियमित कक्षाएं जरूरी हैं। नवरात्रि और दशहरा के लिए अक्टूबर में पर्याप्त अवकाश दिए जाएंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्कूलों में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करके बच्चों को त्योहारों की जानकारी दी जा सकती है, ताकि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय बना रहे।
शिक्षा विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि स्कूलों में बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि बच्चों को पढ़ाई में कोई असुविधा न हो। कुछ स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प भी दिया, जहां बच्चे घर से ही कुछ गतिविधियों में शामिल हो सके।
निष्कर्ष: शिक्षा और उत्सव का संतुलन
27 सितंबर, 2025 को मध्य प्रदेश में स्कूलों का खुला रहना इस बात का प्रतीक है कि राज्य सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है, भले ही त्योहारी मौसम में उत्साह अपने चरम पर हो। यह निर्णय जहां एक ओर शैक्षणिक निरंतरता को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर कुछ अभिभावकों और छात्रों के लिए असुविधा का कारण भी बना। फिर भी, स्कूलों में सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन ने बच्चों को नवरात्रि के महत्व से जोड़े रखा। यह स्थिति दर्शाती है कि मध्य प्रदेश शिक्षा और सांस्कृतिक उत्सवों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में प्रयासरत है।
