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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत सरकार ने आज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) की सातवीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई। इस योजना ने पिछले सात वर्षों में 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया है, जिससे गरीब और कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “स्वास्थ्य देखभाल में सम्मान का खाका” बताते हुए कहा कि यह योजना देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य को बदल रही है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और लाभार्थियों के अनुभव साझा किए गए।

आयुष्मान भारत: एक अवलोकन
आयुष्मान भारत योजना, जिसे 23 सितंबर 2018 को लॉन्च किया गया था, दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है। यह दो प्रमुख घटकों पर आधारित है:

  1. स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (एचडब्ल्यूसी): ये केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करते हैं, जिसमें मुफ्त दवाएं, डायग्नोस्टिक्स और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
  2. पीएम-जेएवाई: यह प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त अस्पताल उपचार प्रदान करता है, जिसमें 26 विशेषज्ञता क्षेत्र जैसे कैंसर, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारियां शामिल हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 7.5 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती मुफ्त इलाज के लिए स्वीकृत की गई हैं, जिससे लाभार्थियों को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय राहत मिली है।

पीएम मोदी का संदेश:
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “आयुष्मान भारत केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों के लिए जीवन रक्षक ढाल है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी परिवार बीमारी के कारण आर्थिक संकट में न डूबे। यह स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और सम्मान का प्रतीक है।” उन्होंने यह भी बताया कि योजना ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सशक्त बनाया है। हाल ही में योजना का दायरा बढ़ाकर 6 करोड़ अतिरिक्त परिवारों को शामिल किया गया, जिसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जा रहा है।

उपलब्धियां और प्रभाव:
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • देशभर में 30,000 से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो 150 से अधिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • 27,000 से अधिक अस्पताल योजना से जुड़े हैं, जहां मरीजों को कैशलेस उपचार मिल रहा है।
  • उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में योजना का सबसे अधिक लाभ उठाया गया है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान योजना ने लाखों लोगों को मुफ्त उपचार प्रदान कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नई पहल:
सातवीं वर्षगांठ के मौके पर, सरकार ने ‘आयुष्मान मेला’ और ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू कीं। इनमें डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड का वितरण और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा, “आयुष्मान भारत ने भारत को एक स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारा लक्ष्य 2026 तक सभी पात्र परिवारों को इस योजना से जोड़ना है।”

चुनौतियां और आलोचनाएं:
योजना को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि कुछ राज्यों में जागरूकता की कमी और निजी अस्पतालों द्वारा लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की शिकायतें। विपक्षी दलों ने दावा किया है कि कई अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके जवाब में सरकार ने एक निगरानी तंत्र स्थापित किया है और शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर 14555 शुरू किया है।

जनता की प्रतिक्रिया:
सोशल मीडिया पर #AyushmanBharat और #7YearsOfAyushman जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लाभार्थियों ने अपनी कहानियां साझा कीं। एक लाभार्थी, बिहार के रमेश यादव ने बताया, “मेरे पिता के हृदय ऑपरेशन के लिए 4 लाख रुपये का खर्च आयुष्मान भारत ने कवर किया। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए वरदान है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को साकार कर रही है।

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