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by-Ravindra Sikarwar

गुवाहाटी: असम के प्रख्यात गायक और संगीतकार ज़ुबीन गर्ग के आकस्मिक निधन ने पूरे राज्य और देश को शोक में डुबो दिया है। मंगलवार को गुवाहाटी के कामरकुची में उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। इससे पहले, उनके पार्थिव शरीर का पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसके बाद लाखों प्रशंसकों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए उनके लोकप्रिय गीत ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ को सामूहिक रूप से गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह गीत असम में एक सांस्कृतिक भजन के रूप में उभरा, जो उनके प्रशंसकों के दुख को एकजुटता में बदल रहा है।

ज़ुबीन गर्ग: एक सांस्कृतिक आइकन
ज़ुबीन गर्ग, जिन्हें असम का ‘हृदय सम्राट’ कहा जाता था, ने अपनी मधुर आवाज और संगीत के माध्यम से न केवल असम बल्कि पूरे भारत में लाखों दिलों को छुआ। उनके गीत, जो असमिया, हिंदी, बंगाली और अन्य भाषाओं में गाए गए, ने उन्हें एक बहुभाषी सांस्कृतिक आइकन बनाया। ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’, ‘यादों की बरात’ जैसे उनके गीत और बॉलीवुड फिल्मों जैसे ‘गैंगस्टर’ और ‘डम मारो डम’ में उनके योगदान ने उन्हें राष्ट्रीय ख्याति दिलाई। उनकी मृत्यु की खबर ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया, जहां एक्स पर उनके प्रशंसकों ने #ZubeenGarg और #AssamMourns जैसे हैशटैग के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

निधन और अंतिम संस्कार:
ज़ुबीन गर्ग का निधन 22 सितंबर 2025 को देर रात हुआ, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को गुवाहाटी के एक प्रमुख अस्पताल में ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम आज सुबह पूरा हुआ, और प्रारंभिक रिपोर्टों में हृदय संबंधी जटिलताओं का उल्लेख किया गया है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। असम सरकार ने तुरंत उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान देने की घोषणा की, जिसमें पुलिस बैंड और सलामी शामिल थी। कामरकुची में आयोजित अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें स्थानीय नेता, कलाकार और प्रशंसक शामिल थे। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ज़ुबीन को “राज्य का रत्न” करार देते हुए कहा कि उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

प्रशंसकों की श्रद्धांजलि:
असम के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरे और सामूहिक रूप से ज़ुबीन के गीत गाकर उन्हें याद किया। गुवाहाटी, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर जैसे शहरों में उनके प्रशंसकों ने कैंडल मार्च निकाले और उनके गीतों को गाकर श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दिखा कि स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में लोग ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ गा रहे थे, जो उनके प्रति असम की गहरी सांस्कृतिक और भावनात्मक लगाव को दर्शाता है। कई प्रशंसकों ने उनकी सामाजिक कार्यों, जैसे बाढ़ राहत और शिक्षा के लिए उनके योगदान, को भी याद किया।

ज़ुबीन की विरासत:
ज़ुबीन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को जोरहाट, असम में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में असमिया संगीत से की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उनकी आवाज में एक अनूठी भावना थी, जो असम की संस्कृति को जीवंत करती थी। बॉलीवुड में उनके गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया, जबकि असम में वे एक सांस्कृतिक प्रतीक थे। उनके निधन ने असम के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बड़ा शून्य छोड़ दिया है।

भविष्य की योजनाएं:
असम सरकार ने घोषणा की है कि ज़ुबीन गर्ग की स्मृति में एक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा, और उनके गीतों को स्कूलों में पढ़ाया जाएगा ताकि नई पीढ़ी उनकी विरासत से प्रेरणा ले सके। उनके प्रशंसकों का कहना है कि ज़ुबीन भले ही अब इस दुनिया में न हों, लेकिन उनके गीत हमेशा उनके दिलों में गूंजते रहेंगे।

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