by-Ravindra Sikarwar
भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक है। यह “व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Global Strategic Partnership) के रूप में जानी जाती है, जो रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है। 2025 में, यह साझेदारी मजबूत हुई है, लेकिन व्यापारिक तनावों (जैसे ट्रंप प्रशासन के टैरिफ) ने चुनौतियां भी पैदा की हैं। नीचे प्रमुख पहलुओं का विवरण दिया गया है, जो हालिया विकास (सितंबर 2025 तक) पर आधारित है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- आरंभ: 2000 के दशक से साझेदारी तेजी से बढ़ी, खासकर 2008 के भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (123 Agreement) के बाद। यह भारत को वैश्विक परमाणु व्यापार में शामिल करने वाला था।
- कुंजी फ्रेमवर्क: क्वाड (Quad: भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण है। 2025 में, भारत क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जहां डोनाल्ड ट्रंप की उपस्थिति संभावित है।
- व्यापार वृद्धि: 2021-22 में द्विपक्षीय व्यापार $119.42 बिलियन तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात $76.11 बिलियन था। 2030 तक $500 बिलियन का लक्ष्य (“मिशन 500”) है।
प्रमुख क्षेत्र और हालिया विकास (2025):
नीचे तालिका में प्रमुख क्षेत्रों का सारांश दिया गया है:
| क्षेत्र | प्रमुख पहल/विकास (2025) | महत्व |
|---|---|---|
| रक्षा | – 10-वर्षीय रक्षा फ्रेमवर्क (2025-2035) पर सहमति, जिसमें जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल, स्ट्राइकर वाहन और 6 अतिरिक्त P-8I विमान शामिल। – “टाइगर ट्रायम्फ” त्रि-सेवा अभ्यास का विस्तार। – MQ-9 ड्रोन और जेट इंजन का संयुक्त उत्पादन। – युध अभ्यास (अलास्का, सितंबर 2025) और INS सिंधुविजय का अमेरिकी पनडुब्बी टेंडर के साथ अभ्यास। | इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा सहयोग मजबूत, लेकिन रूस से S-400 खरीद पर CAATSA प्रतिबंधों की आशंका। |
| व्यापार | – द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) का पहला चरण शरद ऋतु 2025 तक। – अमेरिकी कृषि उत्पादों और भारतीय श्रम-गहन निर्यात के लिए बाजार पहुंच। – ट्रंप के 50% टैरिफ (फार्मास्यूटिकल्स, ज्वेलरी, झींगा आदि पर) ने तनाव बढ़ाया, लेकिन सितंबर 2025 में वार्ता फिर शुरू। – भारत ने GST कम कर उपभोग बढ़ाया। | $500 बिलियन लक्ष्य की ओर, लेकिन टैरिफ ने BRICS (रूस-चीन) के साथ वैकल्पिक साझेदारियों को प्रोत्साहित किया। |
| प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष | – TRUST पहल: AI, सेमीकंडक्टर, साइबरसिक्योरिटी पर फोकस। – NISAR सैटेलाइट (NASA-ISRO) और Axiom-4 मिशन (भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ISS पर)। – ग्लोबल फाउंड्रीज का कोलकाता पावर सेंटर; भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत IR, GaN चिप्स का निर्माण। – ग्लोबल डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप (एशिया-अफ्रीका में डिजिटल तकनीक)। | चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशनों से भारत की क्षमता बढ़ी; 2025 में सिविल स्पेस वर्किंग ग्रुप की बैठक। |
| ऊर्जा और पर्यावरण | – ऊर्जा सुरक्षा पार्टनरशिप: अमेरिका से कच्चा तेल, LNG आपूर्ति। – CLNDA संशोधन से अमेरिकी डिजाइन के रिएक्टरों का निर्माण। – क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, टाइटेनियम) पर संयुक्त अनुसंधान; IEA सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन। – भारत 2025 में कम्बाइंड टास्क फोर्स 150 का सह-नेतृत्व करेगा (अरब सागर में समुद्री सुरक्षा)। | वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिरता; भारत की रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी आलोचना। |
| अन्य | – शिक्षा: संयुक्त डिग्री प्रोग्राम, ऑफशोर कैंपस। – आतंकवाद विरोध: खुफिया साझा, काउंटर-टेररिज्म पहल। – I2U2 (भारत, इजराइल, UAE, अमेरिका) और IMEEC कॉरिडोर पर नई पहल। | मानवाधिकार (CAA पर) और धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी चिंताएं। |
चुनौतियां (2025 में):
- ट्रंप प्रशासन का प्रभाव: फरवरी 2025 में मोदी-ट्रंप शिखर सम्मेलन (“कॉम्पैक्ट” पहल) से शुरुआत मजबूत हुई, लेकिन जुलाई-सितंबर में टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर आलोचना ने संकट पैदा किया। अमेरिकी सीनेट में बहस हुई, जहां भारत को “चीन-रूस की ओर झुकने” वाला बताया गया।
- रणनीतिक स्वायत्तता: भारत BRICS और SCO (तियानजिन बैठक, सितंबर 2025) में सक्रिय रहा, जिससे अमेरिका को चिंता।
- H-1B वीजा: भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ाया, STEM क्षेत्रों में प्रभाव।
- क्षेत्रीय मुद्दे: कश्मीर हमले (अप्रैल 2025) पर अमेरिकी निंदा, लेकिन पाकिस्तान के साथ अमेरिकी निकटता ने भारत को सतर्क किया।
भविष्य की संभावनाएं:
2025 के अंत तक BTA और क्वाड शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तनाव के बावजूद, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग मजबूत रहेगा, क्योंकि दोनों देश चीन को संतुलित करने के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। भारत को अमेरिकी नीति परिवर्तनों के प्रति लचीलापन बनाना होगा, जबकि विविधीकरण (EU, रूस) जारी रखना चाहिए। कुल मिलाकर, यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
