by-Ravindra Sikarwar
भारत की आध्यात्मिक परंपरा जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही गहरी भी। साधु-संन्यासियों के कई पंथ हैं, लेकिन इनमें से अघोरी साधु सबसे अलग और रहस्यमय माने जाते हैं। उनके जीवन, साधना और रीति-रिवाजों को देखकर अक्सर लोग हैरान रह जाते हैं।
कौन होते हैं अघोरी साधु?
अघोरी साधु शिवजी के सबसे भयावह स्वरूप ‘अघोर’ के उपासक होते हैं। माना जाता है कि वे संसार की मोह-माया से परे होकर, मृत्यु और जीवन के रहस्यों को समझने की कोशिश करते हैं। अघोरियों का विश्वास है कि भगवान शिव ही सृष्टि के निर्माता और संहारक हैं।
श्मशान घाट ही आश्रम:
सामान्य साधु जहां मंदिरों या आश्रमों में रहते हैं, वहीं अघोरी साधु श्मशान घाट को अपना घर बनाते हैं। उनका मानना है कि मृत्यु ही सबसे बड़ी सच्चाई है, इसलिए वे मुर्दों के बीच रहते हैं। अक्सर वे मुर्दों की चिताओं के पास साधना करते हैं और राख को अपने शरीर पर मल लेते हैं।
अघोरी साधना की विचित्र परंपराएं:
- अघोरी मानते हैं कि भय और वर्जनाओं को तोड़ना ही मोक्ष का मार्ग है।
- वे अक्सर मानव खोपड़ी (कपाल) को अपने पात्र की तरह इस्तेमाल करते हैं।
- कुछ अघोरी मांस और शराब को साधना का हिस्सा मानते हैं।
- ऐसा भी कहा जाता है कि वे मुर्दों के मांस का भक्षण करते हैं, हालांकि यह केवल विशेष साधना काल में ही किया जाता है।
क्यों रहते हैं मुर्दों के साथ?
अघोरी साधुओं के लिए मृत्यु कोई अंत नहीं, बल्कि एक नया आरंभ है। मुर्दों के साथ रहकर वे मृत्यु के भय को जीतने और जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की कोशिश करते हैं। उनका विश्वास है कि जब तक इंसान मौत के डर से मुक्त नहीं होता, तब तक वह सच्चे ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकता।
आम इंसानों से दूरी:
अघोरी साधु सामान्य लोगों के बीच कम ही दिखाई देते हैं। वे अक्सर गुप्त स्थानों या श्मशान घाटों में ही साधना करते हैं। लोगों में उनके प्रति भय और सम्मान दोनों की भावना होती है।
अघोरी जीवन से क्या सीख मिलती है?
अघोरी साधुओं की साधना हमें यह सिखाती है कि:
- मृत्यु से डरने के बजाय उसे स्वीकार करना चाहिए।
- जीवन की सच्चाई केवल सुख और सुविधा नहीं है, बल्कि त्याग और कठोरता भी है।
- जब इंसान हर भय को छोड़ देता है, तभी वह सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव करता है।
अघोरी साधुओं का जीवन रहस्यमय और भयावह जरूर लगता है, लेकिन उनकी साधना का मकसद मानव जीवन के सबसे गहरे रहस्यों को जानना है। वे हमें यह समझाते हैं कि मृत्यु भी जीवन का एक हिस्सा है, जिसे डरकर नहीं बल्कि समझकर जीना चाहिए।
