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by-Ravindra Sikarwar

उत्तर प्रदेश के हथकरघा और वस्त्र उद्योग को नई उड़ान देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में “संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क” स्थापित किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य न केवल उत्पादन और निवेश को बढ़ावा देना है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा करना भी है।

निवेश और रोजगार का खाका:
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के तहत करीब 15,431 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। अनुमान है कि इससे एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे।

इस योजना के तहत लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की स्थापना अनिवार्य होगी। बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी।

संत कबीर के नाम पर योजना:
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा। संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सबसे ऊपर रखा था। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस योजना से परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संतुलन बनेगा, जो उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।

यूपी का वस्त्र उद्योग और निर्यात:
उत्तर प्रदेश पहले से ही देश के प्रमुख वस्त्र निर्यातक राज्यों में गिना जाता है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश से 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र और परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है। इस उद्योग से राज्य में लगभग 22 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। प्रदेश की जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 1.5 प्रतिशत है।

वाराणसी, मऊ, भदोही, मेरठ और गोरखपुर जैसे पारंपरिक क्लस्टर पहले ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिला चुके हैं।

युवाओं और बुनकरों पर फोकस:
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का सबसे बड़ा केंद्र युवा होंगे। कौशल विकास और रोजगार सृजन इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले में बुनकरों से संवाद स्थापित किया जाए, उनकी अपेक्षाओं को समझा जाए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने की प्रक्रिया को भी तेज़ करने के निर्देश दिए, ताकि उत्पादन लागत कम हो और बुनकरों की आय में वृद्धि हो सके।

आधारभूत सुविधाएं और PPP मॉडल:
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि निवेश प्रस्तावों को तेजी से लागू करने के लिए भूमि की पहचान और विकास कार्य में तेजी लाई जाए। इस योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा।

सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, बिजली और पानी जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि निवेशकों को समय पर और सुगम सुविधाएं मिल सकें।

निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वास जताया कि “संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना” न केवल निवेश और रोजगार का नया अध्याय खोलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की बुनकरी परंपरा को आधुनिक उद्योग से जोड़ते हुए प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिलाएगी।

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