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by-Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: शहर में लाखों लोगों को राहत देने के उद्देश्य से ₹35.81 करोड़ की लागत से बनाए गए तानसेन आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) की स्थिति चिंताजनक है। पुल के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और इंजीनियरिंग की खामियों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुल की जर्जर हालत:
हाल ही में, पुल के बीचो-बीच एक बड़े छेद और बाहर निकली हुई लोहे की छड़ों की तस्वीरें सामने आई हैं। यह पुल के ढाँचे की खराब गुणवत्ता को दर्शाती है।

  • विशाल छेद: पुल के ऊपर कंक्रीट और तारकोल की परतें टूट गई हैं, जिससे एक बड़ा छेद बन गया है। इस छेद से नीचे रेलवे ट्रैक और गुजरती हुई ट्रेनें साफ दिखाई देती हैं।
  • बाहर निकली हुई सरिया: पुल के अंदर की लोहे की सरिया (iron rods) भी कई जगहों पर बाहर निकल आई है। ये सरिया सड़क की सतह से ऊपर उठी हुई हैं, जिससे वाहनों के टायर फटने का खतरा बढ़ गया है।
  • सतह का उखड़ना: पुल की सतह पर कई जगहों पर दरारें पड़ गई हैं और तारकोल उखड़ रहा है, जिससे पुल की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जनता और अधिकारियों की प्रतिक्रिया:
इस स्थिति से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि इतने भारी बजट से बने पुल की यह हालत महज कुछ ही समय में कैसे हो गई।

  • जनता का गुस्सा: स्थानीय निवासियों ने इसे एक बड़ी लापरवाही बताया है और इसकी जाँच की मांग की है। उनका कहना है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और इससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
  • प्रशासनिक चुप्पी: इस मुद्दे पर अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कोई ठोस बयान नहीं दिया है। हालांकि, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने कहा है कि वे जल्द ही पुल का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक मरम्मत का काम शुरू करेंगे।

यह घटना शहर के बुनियादी ढाँचे के निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को उजागर करती है। यह सवाल उठाती है कि क्या निर्माण कार्य की निगरानी सही ढंग से की गई थी या नहीं।

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