by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर, 2025 को भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘ज्ञानम् भारतम्’ पोर्टल का उद्घाटन किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया।
तीन दिवसीय यह सम्मेलन, जिसका आरंभ 11 सितंबर को हुआ था, ‘पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को पुनः प्राप्त करना’ (‘Reclaiming India’s Knowledge Legacy through Manuscript Heritage’) विषय पर आधारित है। इसमें विद्वान, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, संरक्षणवादी और नीति निर्माता एक साथ आए हैं ताकि भारत के विशाल और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडुलिपि संग्रह को सुरक्षित रखने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
पोर्टल का उद्देश्य और विशेषताएँ:
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘ज्ञानम् भारतम्’ पोर्टल एक व्यापक डिजिटल मंच है जो प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और उन्हें सभी के लिए सुलभ बनाने का काम करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की ज्ञान संपदा को वैश्विक स्तर पर पहुँचाना और विद्वानों के शोध को बढ़ावा देना है। यह पोर्टल एक केंद्रीकृत भंडार के रूप में कार्य करेगा, जहाँ डिजिटाइज्ड सामग्री उपलब्ध होगी।
सम्मेलन में दुर्लभ पांडुलिपियों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, साथ ही पांडुलिपि संरक्षण, उन्नत डिजिटलीकरण तकनीकों, कानूनी ढाँचों, डेटा मानकों और प्राचीन लिपियों को समझने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर शैक्षणिक सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
ज्ञान परंपराओं के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता:
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने की उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 9 अगस्त, 2025 को विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने ‘X’ पर एक पोस्ट में संस्कृत के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक कालातीत स्रोत बताया था।
उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि पिछले एक दशक में सरकार ने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जिसमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों और संस्कृत शिक्षण केंद्रों की स्थापना के साथ-साथ ‘ज्ञानम् भारतम् मिशन’ जैसी पहलें शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया पर संस्कृत को ‘भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति’ बताते हुए नागरिकों से इसे दैनिक जीवन में शामिल करने का आग्रह किया था।
‘ज्ञानम् भारतम्’ पोर्टल के लॉन्च के माध्यम से, प्रधानमंत्री मोदी भारत की पांडुलिपि विरासत को वैश्विक ज्ञान चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास कर रहे हैं। यह डिजिटल पहल न केवल प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक निधि दुनिया भर के विद्वानों और ज्ञान प्रेमियों के लिए सुलभ हो।
