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by-Ravindra Sikarwar

नेपाल में युवाओं, जिन्हें “जेन-ज़ेड” (Gen Z) भी कहा जाता है, द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा है। इन विरोध प्रदर्शनों से देश में एक मानवीय संकट भी पैदा हो गया है।

नेपाल में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक उथल-पुथल:
नेपाल में हाल के हफ्तों में युवा प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीतिक स्थिरता को गंभीर रूप से हिला दिया है। ये प्रदर्शनकारी, जिन्हें अक्सर “जेन-ज़ेड” (Gen Z) के रूप में संदर्भित किया जाता है, सरकार के कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी से निराश हैं।

ये विरोध प्रदर्शन तब भड़क उठे जब सरकार ने कई विवादास्पद नीतियां लागू कीं, जिन्हें युवाओं ने अपने भविष्य के लिए हानिकारक माना। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व में सरकार उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रही थी और राजनीतिक लाभ के लिए देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर रही थी।

विरोध की गंभीरता और व्यापकता ने अंततः प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली पर भारी दबाव डाला, जिसके चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनके इस्तीफे को प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

मानवीय संकट और अंतर्राष्ट्रीय चिंता:
इन विरोध प्रदर्शनों ने न केवल राजनीतिक उथल-पुथल मचाई है, बल्कि देश में एक मानवीय संकट भी पैदा कर दिया है। लगातार कर्फ्यू, आवश्यक सेवाओं में व्यवधान और हिंसक झड़पों ने आम नागरिकों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

कई क्षेत्रों में भोजन, पानी और चिकित्सा आपूर्ति की कमी हो गई है, जिससे आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह किया है।

नेपाल का भविष्य अब अनिश्चित लग रहा है, क्योंकि देश एक नई राजनीतिक दिशा की तलाश में है। यह देखना बाकी है कि नई सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को कैसे संभालती है और युवाओं की मांगों को कैसे संबोधित करती है।

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