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by-Ravindra Sikarwar

हाल ही में, हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता (Full Functional Literacy) का महत्वपूर्ण दर्जा प्राप्त करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही, यह त्रिपुरा, मिजोरम और गोवा के बाद इस गौरव को पाने वाला चौथा राज्य बन गया है। इस उपलब्धि को केंद्र सरकार की ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (Understanding of Lifelong Learning for All in Society – New India Literacy Programme) के तहत मापा गया है, जिसका लक्ष्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के निरक्षर वयस्कों को शिक्षित करना है।

ULLAS कार्यक्रम के अंतर्गत, किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को 95% से अधिक साक्षरता दर हासिल करने पर पूर्ण कार्यात्मक साक्षर घोषित किया जाता है। हिमाचल प्रदेश ने 99.30% की साक्षरता दर के साथ यह मानदंड पार कर लिया है। यह राष्ट्रीय बेंचमार्क से काफी अधिक है।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और दुर्गम भूभाग वाले राज्य ने सीमित संसाधनों और पहुंच की चुनौतियों के बावजूद इसे प्राप्त किया है। इस सफलता में सरकार, समाज और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो यह दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प भौगोलिक बाधाओं को पार कर सकता है। इस प्रयास में स्वयंसेवा की भावना को बनाए रखने पर जोर दिया गया है, क्योंकि जब नागरिक एक-दूसरे की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं तो साक्षरता सबसे तेजी से फैलती है।

लद्दाख: पहला पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश
हिमाचल प्रदेश की इस उपलब्धि से पहले, 24 जून 2024 को, लद्दाख को भारत का पहला पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया था। इस घोषणा ने लद्दाख को कार्यात्मक साक्षरता के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान दिया। इस उपलब्धि को भी ULLAS कार्यक्रम के तहत ही मान्यता दी गई, जहाँ लद्दाख ने 97% से अधिक साक्षरता दर हासिल की।

यह दोनों उपलब्धियां भारत के ‘जन-जन साक्षर’ बनाने के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जो कर्तव्य बोध की भावना और स्वैच्छिक प्रयासों पर आधारित है।

कार्यात्मक साक्षरता क्या है?
केवल पढ़ना-लिखना जानना ही साक्षरता नहीं है। कार्यात्मक साक्षरता (Functional Literacy) एक व्यापक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि एक व्यक्ति रोजमर्रा के जीवन में पढ़ने, लिखने और गणितीय कौशल का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकता है। इसमें सिर्फ अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि डिजिटल, वित्तीय और कानूनी साक्षरता भी शामिल होती है। इसका उद्देश्य व्यक्तियों को समाज में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने और अपने जीवन स्तर में सुधार करने में सक्षम बनाना है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक सभी नागरिकों को पूर्ण कार्यात्मक साक्षर बनाना है, और हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मिजोरम, गोवा और लद्दाख जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सफलता इस दिशा में एक बड़ा कदम है।

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