by-Ravindra Sikarwar
भारत सरकार ने 3 सितंबर, 2025 को नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के तहत ई-कचरा और बैटरी कचरे की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों को निकालना और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। यह छह साल की योजना रीसाइक्लिंग करने वालों को पूंजी और परिचालन सब्सिडी प्रदान करती है, जिसमें एक-तिहाई राशि स्टार्टअप्स के लिए आवंटित है। इस पहल से 70,000 नौकरियाँ पैदा होने और ₹8,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
योजना का विवरण:
उद्देश्य:
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ई-कचरा, लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप, और पुराने हो चुके वाहनों के उत्प्रेरक कन्वर्टर (catalytic converters) से महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग के लिए घरेलू क्षमता का विकास करना है। यह भारत की बढ़ती हुई ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
अवधि:
यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर वित्त वर्ष 2030-31 तक छह साल की अवधि के लिए लागू रहेगी।
प्रोत्साहन:
इस योजना के तहत, नए और मौजूदा दोनों तरह के रीसाइक्लिंग इकाइयों को पूंजी और परिचालन सब्सिडी दी जाएगी। बड़े उद्यमों के लिए सब्सिडी की सीमा ₹50 करोड़ और छोटे उद्यमों के लिए ₹25 करोड़ निर्धारित की गई है।
फंड का आवंटन:
योजना के लिए आवंटित कुल ₹1,500 करोड़ में से एक-तिहाई राशि विशेष रूप से स्टार्टअप्स और छोटे रीसाइक्लिंग करने वालों के लिए रखी गई है। इससे नए उद्यमियों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
अपेक्षित परिणाम:
इस योजना से कई महत्वपूर्ण परिणाम मिलने की उम्मीद है, जो भारत के आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए फायदेमंद होंगे:
- क्षमता: प्रति वर्ष कम से कम 270 किलो टन की रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना।
- खनिज उत्पादन: प्रति वर्ष लगभग 40 किलो टन महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन करना।
- निवेश: लगभग ₹8,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना, जिससे इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास होगा।
- रोजगार सृजन: लगभग 70,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना, जिससे आजीविका में सुधार होगा।
सामरिक महत्व:
यह योजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है:
- आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन: यह स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। वर्तमान में, भारत इन खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
- निकट-अवधि का समाधान: यह महत्वपूर्ण खनिजों की मांग को पूरा करने का एक तेज तरीका प्रदान करता है, जो खनन और अन्वेषण जैसे दीर्घकालिक प्रयासों का पूरक है। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
